बड़े बजट से नहीं दमदार स्क्रिप्ट से चलती हैं फिल्में: 'मसान' एक्टर उत्कर्ष रमन

Utkarsh Raman is talking about his film Masaan

नई दिल्ली: अब सिनेमाघरों में स्टार फैक्टर फीका पड़ने लगा है जहां दर्शक बड़े-बड़े स्टार्स की खराब फिल्मों को नकारने लगे हैं वहीं लो बजट की अच्छी फिल्मों को लोग पसंद करन लगे हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म कैटरीना कैफ की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई है. लेकिन इसी महीने रिलीज हुई छोटे बजट की फिल्म ज़ुबान की काफी पसंद किया जा रहा है. छोटे बजट की फिल्मों की बात करें तो चाहे ‘मसान’ का हो या ‘तितली’ या फिर ‘चौरंगा’ इन फिल्मों को समीक्षकों सहित दर्शकों ने भी काफी सराहा है. इन छोटे बजट की फिल्मों में खास बात ये भी है कि ये फिल्मी नहीं हैं. ये फिल्मों दूसरी फिल्मों से अलग इसलिए भी हैं क्योंकि ये फिल्में बॉलीवुड के स्टार फैक्टर और हीरो-हीरोइन के बंधे-बंधाए ढांचे को धराशायी कर देती है और छोटे कलाकारों को अपना अभिनय क्षमता को दिखाने का पूरा मौका भी देती हैं.

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पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘मसान’ की ना सिर्फ चर्चा में रही बल्कि कान फिल्म फेस्टिवल में भी अवॉर्ड जीतने में सफल हुई. ‘मसान’ के निर्देशक नीरज घेवान हैं जिन्होंने बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की शूटिंग भी बनारस में ही की है. कलाकार भी स्थानीय हैं और स्क्रिप्ट भी बनारस के ही रहने वाले वरूण ग्रोवर ने लिखा है. बनारस से ही थियेटर में डिप्लोमा कर रहे उत्कर्ष रमन को भी इसी फिल्म से बड़े पर्दे पर अपनी अभिनय प्रतिभा को दिखाने का मौका मिला. उत्कर्ष ने इस फिल्म में लीड कैरेक्टर दीपक (विकी कौशल) के दोस्त नवीन की भूमिका निभाई है. उत्कर्ष का कहना है कि अब दर्शकों की दिलचस्पी सिर्फ स्टार्स तक नहीं है बल्कि अगर अच्छी कहानी हो तो अब छोटे बजट की फिल्मों को भी दर्शक मिलने लगे हैं. उत्कर्ष मानते हैं कि अब दर्शकों की च्वाइस बदली है और अब बड़े बजट से नहीं फिल्में दमदार स्क्रिप्ट से चलती हैं.

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हाल ही में द्रौपदी नाटक के मंचन के लिए दिल्ली पहुंचे उत्कर्ष इससे पहले कई मशहूर नाटकों का मंचन कई राज्यों में कर चुके हैं. जिन नाटकों का मंचन उत्कर्ष ने किया है उनमें ‘लड़ी नजरिया’, ‘वांगचू’, ‘कर्मभारम’ (संस्कृत), ‘इंद्र’, ‘अंधायुग’, ‘बड़े भाईसाहब’, ‘कर्बला’ मुख्य हैं. इससे पहले उत्कर्ष फिल्म ‘रांझणा’ में भी नजर आ चुके हैं जिसकी शूटिंग बनारस में हुई थी. हालांकि इस फिल्म में उत्कर्ष का किरदार कुछ सेकेंड्स के लिए ही पर्दे पर नजर आया था. लेकिन ‘मसान’ ने उत्कर्ष के सपनों को एक अलग ही पहचान दे दी है.

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उत्कर्ष काफी समय से थियेटर कर रहे हैं. लेकिन जब उनसे ये सवाल किया गया कि क्या बड़े पर्दे के लिए एक्टिंग करना ज्यादा कठिन हैं? तो उत्कर्ष ने कहा, ‘थियेटर में हम महीनों तक प्रैक्टिस करते हैं, रिहर्सल करते हैं और फिर एक दिन ऐसा आता है जब हमें एक ही बार में उस कैरेक्टर को जीवंत करना होता है लेकिन फिल्मी पर्दे पर एक्टिंग के साथ ये फायदा है कि अगर सही ना कर पाए तो कई बार रिटेक दे सकते हैं.’  हालांकि उत्कर्ष ये भी बताते हैं कि ‘मसान’ की शूटिंग के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि वो पूरी तरह वो ब्लैंक हो गए कि उन्हें क्या करना है, लेकिन यहां पर उनके पास रिटेक के कई मौके थे.

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‘मसान’ फिल्म के एक दृश्य, जिसमें शालू की मौत के बाद दीपक के अपने दोस्तों के साथ फूट-फूटकर रोने लगते हैं, की शूटिंग को याद करते हुए बताते हैं कि फिल्म में तो ये दृश्य कुछ सेकेंड का ही है लेकिन इसके लिए इन लोगों ने करीब चार घंटे शूट किया था. इस सीन में विकी के साथ तीन और दोस्त रहते हैं. शूटिंग के दौरान ये सभी एक्टर्स अपने किरदार में इस कदर घुस गए थे कि डायरेक्टर के कट बोलने के बाद भी ये लोग लगातार घंटो तक रोते रहे.

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढाई कर चुके उत्कर्ष जल्द ही मुंबई नगरिया जाकर अपनी किस्मत आजमाने की प्लानिंग कर रहे हैं.

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Web Title: Utkarsh Raman is talking about his film Masaan
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