'विजय फैक्टर': पटना शहर में कैसी है पोस्टरों से लड़ाई और क्या कहती है जनता?

By: | Last Updated: Sunday, 13 September 2015 9:37 AM

बिहार चुनाव को लेकर एबीपी न्यूज़ के कार्यकारी संपादक विजय विद्रोही खबरों और विश्लेषण की एक नई सीरीज़ ‘विजय फैक्टर’ लेकर हाजिर हैं. अब आप हर रोज पढ़ें विजय विद्रोही के निराले अंदाज़, बेबाक राय और सटीक विश्लेषण की ये नई सीरीज़.

 

पटना शहर में कैसी है पोस्टरों से लड़ाई और क्या कहती है जनता?

 

बिहार में विधानसभा चुनावों का एलान हो गया है. दो सर्वे भी आ गए हैं. एक में नीतीश, लालू, कांग्रेस के महागठबंधन को बढ़त मिली है तो दूसरे में बीजेपी का एनडीए सरकार बनाता दिख रहा है. लेकिन दोनों ही सर्वे नजदीकी मुकाबले की तरफ इशारा कर रहे हैं.

 

बिहार में पिछले दिनों दस दिन गहन दौरा करने के बाद मेरा भी आकलन यही है कि फिलहाल मामला कांटे का लग रहा है. सिर्फ दो बातें तय हैं. एक , मुस्लिम वोटर का रुझान पूरी तरह से महागठबंधन के पक्ष में दिख रहा है. (ओवैसी की एमआईएम के चुनाव मैदान में उतरने से पहले). दो, अगड़ा पूरी तरह से बीजेपी को वोट देता दिख रहा है. मधेपुरा में पप्पू यादव ताल ठोंक रहे हैं लेकिन उनको बहुत ज्यादा महेनत करने की जरुरत है. लालू प्रसाद यादव के यादव वोट बैंक में सेंध लगती दिख रही है लेकिन इतनी नहीं है कि लालू परेशान हो जाएं. बाकी रहा तो पासवान, नीतीश और जीतन राम मांझी अपने अपने वोट बैंक को लेकर आश्वस्त हो सकते हैं. उपेन्द्र कुशवाहा को जरुर अपना वोट बैंक बचाने के लिए पसीना बहाना पड़ सकता है. कुल मिलाकर बिहार में सत्ता की चाबी महापिछड़ा वोटर के हाथ में दिख रही है. इसे पचपनिया वोट भी कहा जाता है. पचपन प्रमुख जातियां इसमें शामिल हैं और कुछ जानकार तो इनकी संख्या तीस फीसद से ज्यादा बताते हैं.

 

कुल मिलाकर बिहार चौराहे पर खड़ा है. एक तरफ जाति है दूसरी तरफ विकास का सपना. एक तरफ मोदी का सवा लाख करोड़ का पैकेज है तो दूसरी तरफ नीतीश का दो लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज.

 

कवि श्रीकांत वर्मा ने मगध शीर्षक से कविताएं लिखी थी . उनकी एक कविता है …

सुनो भाई घुड़सवार,

मगध किधर है

मगध से आया हूं , मगध मुझे जाना है

किधर मुड़ूं उत्तर के दक्षिण

या पूर्व के पश्चिम …….

तुम भी तो मगध को ढ़ूंढ रहे हो बंधुओं,

यह वह मगध नहीं

जिसे तुमने पढ़ा है किताबों में .

यह वह मगध है 

जिसे तुम

मेरी तरह गंवा

चुके हो

 

बिहार में जीत के विजय फैक्टर की तलाश उसी मगध की तलाश जैसी ही है. पटना एयरपोर्ट से टैक्सी ली. क्या रहेगा बिहार में. ड़्राइवर से पूछा तो शुरू हो गया लालू यादव के गुण गाने. यह चुनाव अगड़ा पिछड़ा होने वाला है और मंडल टू महागठबंधन को जिताएगा. नाम पूछा तो बोला सीता राम. पूरा नाम सीताराम यादव. बिहार का दौरा पूरा करने के बाद जो टैक्सी वाला वापस एयरपोर्ट छोड़ने आआ था उससे पूछा तो कहने लगा कि बीजेपी सौ में सवा सौ सीटें जीतेगी, कोई रोक नहीं सकता इस बार. नाम पूछा . ओम प्रकाश . जाति पूछी तो बोला भूमिहार. बिहार में जाति के हिसाब से ही बयान सामने आते हैं. खैर, पटना शहर में पोस्टर ही पोस्टर है. बड़े बड़े पोस्टरों में बड़े बड़े चेहरे बड़े बड़े वायदे करते हुए. पोस्टर एक दूसरे पर हमले करने और पोल खोलने के काम भी आ रहे हैं. बीजेपी के पोस्टर में मोदी हैं. सर झुकाए, हाथ जोड़े. बड़ी ही विनम्रता से सवा लाख करोड़ रुपये के पैकेज का एलान करते हुए. लेकिन महागठबंधन ने इस पोस्टर के साथ ही अपना एक पोस्टर लगा दिया है. उतना ही बड़ा. इस पोस्टर में नीतीश मुटठी बांधे हुए हैं. चश्मे के भीतर से झांक रही आंखे हैं और वह कह रहे हैं कि झांसे में नहीं आएंगे, नीतीश को जिताएंगे. यानि मोदी से पैकेज को झांसा बताया जा रहा है.

 

एक अन्य पोस्टर नीतीश का है. यहीं लिखा है कि बिहार में बहार हो, नीतीशे कुमार हो. देसी टच देने की कोशिश की गयी है नीतीशे लिखकर . लेकिन इस पोस्टर का बीजेपी ने तोड़ निकाला है. उसने बहार वाले पोस्टरों के साथ ही अपने पोस्टर लगा दिये हैं. इनमें बिहार की बदहाली को सामने रखा गया है और उस बहाने नीतीश की बहार का सच सामने रखा गया है. इन पोस्टरों में कवितानुमा शैली में कहा गया है कि शिक्षकों पर लाठी का वार है , किसानों को नहीं मिलती धान की पैदावार है, युवा बेरोजगार तो क्या यह बिहार में बहार है. बीजेपी के इन पोस्टरों का जवाब लालू यादव देते हैं. उनके पोस्टर कहते हैं कि जुमलों और जुल्मी सरकार है, गरीबों धोखे में नहीं आना है, बदला चुकाना है.

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Web Title: Vijay Factor: Bihar election reporting and analysis series by Vijay Vidrohi
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