अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत, 5 से 5.5 प्रतिशत वृद्धि की संभावना : चिदंबरम

By: | Last Updated: Friday, 15 November 2013 8:22 AM

<p style=”text-align: justify;”>
<b>मुंबई:</b>
वित्त मंत्री मंत्री पी.
चिदंबरम ने आज कहा कि अब
अर्थव्यस्था में सुधार के
संकेत दिख रहे हैं और उन्हें
विश्वास है कि चालू वित्त
वर्ष में 5 से 5.5 प्रतिशत की
वृद्धि हासिल कर ली जाएगी.
संभवत: औद्योगिक उत्पादन एवं
निर्यात के ताजा आंकड़ों से
उत्साहित वित्त मंत्री ने
भरोसा जताया कि
अर्थव्यवस्था दूसरी छमाही
में और गति पकड़ेगी.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
चिदंबरम ने साथ ही जांच
एजेंसियों को संदेश दिया कि
उन्हें सभी वाणिज्यिक
फैसलों को किसी विशेष मंशा या
दुर्भावना से प्रेरित नहीं
मानना चाहिए क्योंकि ऐसा
करने से कोई कारोबार नहीं चल
पाएगा.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
उन्होंने बैंकों से कहा कि
जान-बूझकर चूक करने वालों से
सख्ती से निपटें लेकिन
आर्थिक नरमी के असर से जूझ
रही कंपनियों की मदद करें.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
उन्होंने बैंकॉन 2013 में
बैंकों और अर्थशास्त्रियों
को संबोधित करते हुए कहा
‘‘जहां तक सरकार का सवाल है
तो मैं आपको आश्वस्त करना
चाहता हूं कि सही तरीके से
सही मंच के जरिए लिये गए उनके
निर्णयों के लिए सरकार उनका
पूरा बचाव करेगी.’’ चिदंबरम
ने अर्थव्यवस्था की स्थिति
में सुधार पर विश्वास जताते
हुए मुद्रास्फीति प्रबंधन
को ‘सबसे कठिन चुनौती’ बताया.
गौरतलब है कि औद्योगिक
वृद्धि दर अगस्त के 0.43
प्रतिशत की तुलना में सितंबर
में दो प्रतिशत रही तथा
अक्तूबर में निर्यात वृद्धि
13.47 प्रतिशत रही.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
चिदंबरम ने कहा कि सरकार
राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू
उत्पाद के 4.8 प्रतिशत तक सीमित
रखेगी और चाूल खाते के घाटे
को कम कर 56 अरब डालर से नीचे
लाएगी हालांकि मुद्रास्फीति
चिंताजनक स्तर पर बनी हुई है.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
अर्थव्यवस्था की स्थिति के
संदर्भ में चिदंबरम ने कहा
‘‘अब हालात सुधारने के संकेत
दिख रहे हैं. इसमें तेजी आएगी
और अर्थवयवस्था गति पकड़ेगी.
इस साल की दूसरी छमाही में
सुधार होगा और यह बिल्कुल
संभव है कि रिजर्व बैंक और
प्रधानमंत्री की आर्थिक
सलाहकार परिषद या सरकार
द्वारा अनुमानित 5 से 5.5
प्रतिशत के बीच की वृद्धि को
प्राप्त कर लिया जाए.’’
वृद्धि का हवाला देते हुए
चिदंबरम ने कहा कि यह भारत
जैसे आकार के देश के के लिए यह
बेचारगी है कि वह आठ प्रतिशत
से अधिक की वृद्धि दर प्राप्त
करने की अपनी संभावनाओं का
दोहन नहीं कर पा रहा है.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
आर्थिक वृद्धि दर 2012-13 में
घटकर पांच प्रतिशत के दशक भर
के न्यूनतम स्तर पर आ गई और
चालू वित्त वर्ष की पहली
तिमाही के दौरान वृद्धि दर 4.4
प्रतिशत रही.<br />उन्होंने कहा
‘‘बचत सकल घरेलू उत्पाद के 30
प्रतिशत से अधिक है, तथा इस
समय वृद्धि संबंधी जो
पूंजी-उत्पादन अनुपात है . जो
पहल हमने की है उसका फायद
हेागा और हम उच्च वृद्धि के
मार्ग पर वापस आएंगे. उच्च
वृद्धि संबंधी गतिविधि 2014 में
दिखेगी.’’ मंहगाई दर के संबंध
में उन्होंने कहा कि
मुद्रास्फीति का प्रबंधन
सबसे मुश्किल चुनौती है.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
उन्होंने कहा कि थोकमूल्य
सूचकांक आधारित
मुद्रास्फीति जो 2009 में 1.9
प्रतिशत थी, बढ़कर सात
प्रतिशत हो गई. खुदरा मूल्य
सूचकांक आधारित
मुद्रास्फीति 10 प्रतिशत से
उपर और खाद्य मुद्रास्फीति 12
प्रतिशत से अधिक रही.<br />
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
चिदंबरम ने कहा ‘‘हाल में हुई
तेजी से पहले हम इस साल
ज्यादातर समय थोकमूल्य
सूचकांक को नियंत्रित करने
में कामयाब रहे .. हम खुदरा
मूल्य सूचकांक आधारित
मुद्रास्फीति को नियंत्रित
नहीं कर पाए क्योंकि इसमें
बढ़ोतरी खाद्य उत्पादों
विशेष तौर पर फल, सब्जी, मीट और
अन्य चीजों के कारण हुई.’’
चिदंबरम ने कहा कि मौद्रिक
नीति का खाद्य कीमत पर असर
नहीं हुआ.
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
उन्होंने कहा ‘‘खाद्य
मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने
का एक ही तरीका है आपूर्ति
बढ़ाना .. आपूर्ति बढ़ाने के
लिए ज्यादा निवेश, ज्यादा
उत्पादन, ज्यादा वितरण की
जरूरत है . बेहतर लाजिस्टिक्स
की जरूरत है और उत्पादों को
भंडार तक पहुंचाने की जरूरत
है.’’ उन्होंने कहा ‘‘हमारे
सामने चुनौती है, उस चुनौती
पर ध्यान देना होगा, उसे
स्वीकार करना होगा तथा :उसका
सामना करने के लिए: आवश्यक
पहल करनी होगी जिसे हम नीतिगत
पहल कहते हैं,इसमें मौद्रिक
नीति भी शामिल है.’’
</p>
<p style=”text-align: justify;”>
राजकोषीय घाटे का उल्लेख
करते हुए मंत्री ने कहा
‘‘चालू वित्त वर्ष में
राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू
उत्पाद को 4.8 प्रतिशत तक सीमित
रखने के लिए जो भी आवश्यक
होगा हम करेंगे. यदि हम इसका
उल्लंघन करते हैं तो उसमें
हमारे लिए बड़ा जोखिम है. हम
इसका अतिक्रमण नहीं
करेंगे,राजकोषीय घाटे को
नियंत्रित रखेंगे.’’ सरकार
पिछले साल हमारा चालू खाते का
घाटा अप्रत्याशित रूप से 88
अरब डालर था. यदि हम इसके लिए
पूरी तरह से धन की व्यवस्था
कर सके और साथ ही अपने
मुद्राभंडार में कुछ
अतिरिक्त राशि जोड़ सके . यह
छोटा सा चमत्कार ही था.’’<br />
</p>

Business News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत, 5 से 5.5 प्रतिशत वृद्धि की संभावना : चिदंबरम
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: ??????? ??????????? ???????????? balloon
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017