दूरसंचार क्षेत्र की फर्म्स समेत निजी कंपनियां कैग के दायरे में आती हैं: हाईकोर्ट

दूरसंचार क्षेत्र की फर्म्स समेत निजी कंपनियां कैग के दायरे में आती हैं: हाईकोर्ट

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज सरकार के साथ आय-में भागीदारी की व्यवस्था के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने वाली लगभग सभी निजी कंपनियों को सरकारी आडिटर कैग के दायरे में ला दिया. न्यायालय ने आज व्यवस्था दी कि भारत का नियंत्रक और महालेखा परीक्षक :कैग: निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों के खाते का आडिट कर सकता है.

 

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसी निजी कंपनियों के लेखा जोखा का कैग द्वारा लेखा-परीक्षण जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार को गैरकानूनी तरीके से कोई नुकसान न हो क्योंकि ऐसे उदाहरण मिले हैं जिनमें सरकार ने कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘उनके साथ मिलीभगत’’ से काम किया.

 

न्यायालय ने कहा, ‘‘ संघ, राज्य सरकार या उसकी कोई संस्था अथवा यहां तक कि सेवा प्रदाताओं जैसी निजी पर्टिया भी यदि स्पेक्ट्रम जैसी देश की संपत्ति का कारोबार कर रही हो तों वे जनता और संसद के प्रति जवाबदेह हैं.’’ न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली न्यायायल की एक पीठ ने कैग आडिट के खिलाफ दूरसंचार कंपनियों की ओर से दायर अपीलों को खारिज करते हुए यह आदेश दिया. कंपनियों ने दलील दी थी कि कैग उनके खातों का लेखा-परीक्षण नहीं कर सकता.

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