नरम मौद्रिक नीति दवा नहीं, बीमारी की वजह है: राजन

By: | Last Updated: Friday, 11 April 2014 2:23 AM

वाशिंगटन: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने विकसित अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंकों की नरम मौद्रिक नीति की आलोचना करते हुए कहा कि यह दवा से ज्यादा बीमारी की वजह बनेगी.

 

उन्होंने कहा कि वैश्विक नियमों को नया रूप देने की जरूरत है ताकि स्थिर और सतत आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित हो सके.

 

वर्ष 2008 के वित्तीय संकट का सही-सही अनुमान लगाने वाले शख्स के रूप में चर्चित रहे राजन ने चेतावनी दी कि यदि विकसित और उभरती अर्थव्यस्थाएं नयी जरूरतों को स्वीकार नहीं करती हैं तो यह इस उबाऊ दौर को और आगे ले जाएगा.

 

राजन ने वाशिंगटन में अमेरिकी थिंक टैंक ब्रुकिंग इंस्टीट्यूशन को दिए अपने भाषण में अपरंपरागत मौद्रिक नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया.

 

उन्होंने कहा, ‘‘सही दवा बताने के लिए पहले बीमारी की वजह जानना होता है. मौद्रिक नीति में बहुत ज्यादा नरमी मेरे विचार में दवा के बदले बीमारी की वजह अधिक बनेगी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जितनी जल्द हम इस बात को मान लेंगे, उतनी सतत वैश्विक आर्थिक वृद्धि हम हासिल करेंगे.’’ उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के वैश्विक नियमों पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है ताकि स्थिर और सतत वृद्धि विकसित एवं विकासशील दोनों ही तरह के देशों में सुनिश्चित हो सके. विकसित और विकासशील दोनों ही तरह के देशों को इसे स्वीकार करने की जरूरत है अन्यथा मुझे डर है कि हम उबाऊ चक्र के अगले दौर में प्रवेश करने वाले हैं.

 

गौरतलब है कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के मद्देनजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसे केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए करीब शून्य प्रतिशत ब्याज की नीति को अपनाया था. फेडरल रिजर्व ने बड़े पैमाने पर बांड की खरीद शुरू कर दी ताकि बाजार में मुद्रा का प्रवाह बढ़ सके. इससे भारत जैसे विकासशील देशों में पूंजी का प्रवाह बढ़ा. वहीं, फेडरल रिजर्व ने जब पिछले साल बांड खरीद कार्यक्रम से पीछे हटने की घोषणा की तो विकासशील देशों से पूंजी का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया जिससे उनकी मुद्रा के मूल्य में तेजी से गिरावट हुई. भारतीय रूपया पिछले साल अगस्त में अब तक के अपने सबसे निचले स्तर 68 रूपया तक लुढ़क गया.

 

राजन ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक नीति में कोई प्रणाली नहीं होने को जोखिम का स्रोत बताया.

 

राजन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक नीति में मौजूदा गैर प्रणाली सतत वृद्धि और वित्तीय क्षेत्र, दोनों के लिए एक बड़े जोखिम का स्रोत है. यह औद्योगिक देश की समस्या नहीं है ना ही उभरते बाजार की समस्या है, बल्कि यह सामूहिक कार्रवाई की समस्या है.

 

उन्होंने कहा कि हम लगातार प्रतिस्पर्धी मौद्रिक नरमी की ओर बढ़ रहे हैं.

 

राजन ने कहा कि दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक तरलता बहुत जल्द सूख जाती है, ऐसे में जरूरत है कि तरलता के लिए द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय समझौते किए जाएं.

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Web Title: नरम मौद्रिक नीति दवा नहीं, बीमारी की वजह है: राजन
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