निजी क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं बैंकिंग लोकपाल को

By: | Last Updated: Saturday, 12 October 2013 8:51 AM
निजी क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं बैंकिंग लोकपाल को

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<b>नई
दिल्ली: </b>बैंकिंग लोकपाल के
दिल्ली कार्यालय को 2012-13 में
लेनदेन संबंधी सबसे ज्यादा
शिकायतें निजी क्षेत्र के
बैंकों के खिलाफ मिलीं हैं.
दूसरा नंबर राष्ट्रीयकृत
बैंकों का रहा. स्टेट बैंक
तथा उसके समूह के बैंक इस
मामले में तीसरे नंबर पर रहे.<br />
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दिल्ली क्षेत्र की बैंकिंग
लोकपाल रश्मि फौजदार ने
‘भाषा’ को बताया कि वर्ष 2012-13
के दौरान दिल्ली लोकपाल
कार्यालय को कुल 9,444 शिकायतें
मिलीं, जो कि पूरे देश में
स्थित 15 लोकपाल कार्यालयों
में सर्वाधिक रहीं. दिल्ली
कार्यालय के दायरे में
दिल्ली, हरियाणा, जम्मू
कश्मीर और उत्तर प्रदेश के दो
जिले नोएडा और गाजियाबाद
शामिल हैं.<br />
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उन्होंने बताया कि इनमें से
सबसे ज्यादा, 32 प्रतिशत,
शिकायतें निजी क्षेत्र के
बैंकों के खिलाफ थीं. इसके
बाद 26 प्रतिशत राष्ट्रीयकृत
बैंकों के खिलाफ और 19 प्रतिशत
शिकायतें भारतीय स्टेट बैंक
तथा उसके अनुषंगी बैंकों के
विरद्ध थीं. 12 प्रतिशत
शिकायतें विदेशी बैंकों और 2
प्रतिशत अन्य बैंकों के
खिलाफ थीं.<br />
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फौजदार ने बताया कि पिछले
वर्ष की लंबित शिकायतों सहित
आलोच्य वर्ष के दौरान दिल्ली
कार्यालय द्वारा कुल 10,104
शिकायतों का निपटारा किया
गया. यह संख्या सभी
कार्यालयों में सबसे ज्यादा
है. उन्होंने बताया कि बैंक
ग्राहकों से सबसे ज्यादा
शिकायतें डेबिट और क्रेडिट
कार्ड के लेनदेन में हुई
गड़बड़ियों के बारे में
प्राप्त हुई.
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कुल शिकायतों में 38 प्रतिशत
शिकायतें डेबिट, क्रेडिट
कार्ड के बारे में थी. बैंकों
द्वारा किये जाने वाले वादे
का पालन नहीं करने, तथा
विभिन्न कोड का पालन नहीं
किये जाने के बारे में 11
प्रतिशत शिकायतें थीं. रश्मि
ने कहा कि बैंकों के खिलाफ
शिकायतों में कमी आई है. समय
के साथ लोगों में जागरकता बढ़
रही है, लेकिन दूरदराज
ग्रामीण क्षेत्रों में
जागरकता बढ़ाने की आवश्यकता
है.<br />
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बैंकों के खिलाफ डेबिट और
क्रेडिट कार्ड से जुड़े
लेनदेन के बारे में ज्यादा
शिकायतें होने के बारे में
पूछे जाने पर उन्होंने कहा
‘‘आमतौर पर देखा गया है कि
क्रेडिट कार्ड के बारे में जो
शिकायतें होतीं हैं उनमें
ग्राहकों को उसकी शर्तों की
सही जानकारी नहीं होती है.
ग्राहक को चाहिये कि क्रेडिट
कार्ड लेने से पहले उसकी
शर्तों को भली भांति समझ लें
और सही समय पर बकाये का
भुगतान करें.’’
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उन्होंने कहा कि मकान, दुकान,
वाहन अथवा उपभोक्ता वस्तुओं
के लिये दिये जाने वाले कर्ज
से जुड़े दस्तावेजों अथवा
क्रेडिट कार्ड लेते समय
बैंकों से कहा गया है कि उनकी
मुख्य शर्तों को मोटे
अक्षरों में प्रकाशित करें
ताकि ग्राहक इन्हें जान सकें.
‘‘अक्षर कितने बड़े होने
चाहिये उसका आकार भी तय किया
गया है.’’
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बैंकिंग लोकपाल वाणिज्यिक
बैंकों के खिलाफ ग्राहकों की
शिकायतों को सुनने और उनके
समुचित निपटारे के लिये गठित
एक स्वायत संस्था है. रिजर्व
बैंक ने इसकी स्थापना की है.
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