नोट वापसी का मकसद नकली मुद्रा पर रोक: आरबीआई

By: | Last Updated: Tuesday, 28 January 2014 1:53 PM

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक यानि आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि 2005 से पहले जारी हुए नोटों को वापस लेने का मकसद नकली नोटों को चलन से हटाना है. इसका काला धन या कर चोरी से कोई संबंध नहीं है.

 

मौजूदा कारोबारी साल की मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा जारी करने के बाद संवाददाता सम्मेलन में राजन ने कहा, “इसका संबंध कर चोरी या काले धन से नहीं है. यह एक तकनीकी कदम है.”

 

उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं समझा जाना चाहिए कि आरबीआई काले धन या कर चोरी को बढ़ावा देना चाहता है. उन्होंने कहा, “यह नहीं कहा जा रहा है कि हम काले धन को बढ़ावा देते हैं.”

 

उन्होंने कहा, “हमें सुरक्षात्मक पहलुओं में सुधार करते रहना होता है. इसी के लिए नोट की वापसी होगी.”

 

आरबीआई ने पिछले सप्ताह कहा था कि 2005 से पहले जारी नोटों को मौजूदा कारोबारी साल के आखिर तक चलन से पूरी तरह वापस ले लिया जाएगा.

 

एक अप्रैल के बाद ऐसे नोटों को बैंक में जमा करा कर 2005 के बाद जारी नोट लेने होंगे.

 

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया था कि 2005 से पहले जारी नोटों की वैधता बनी रहेगी. और उसे बैंक में बदला जा सकेगा.

 

एक जुलाई 2014 से जो बैंक के ग्राहक नहीं हैं, उन्हें 500 रुपये और 1000 रुपये के 10 से अधिक नोट बदलवाने के लिए बैंक की उस शाखा में पहचान और आवास का प्रमाणपत्र पेश करना होगा, जिसमें वे नोट बदलवाना चाहते हैं.

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Web Title: नोट वापसी का मकसद नकली मुद्रा पर रोक: आरबीआई
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