बैंक पुराने फंसे कर्ज की समस्या से सक्रियता से निपटें : रिजर्व बैंक

By: | Last Updated: Thursday, 27 February 2014 4:24 AM

मुंबई: बैंकों की पुराने फंसे कर्ज की राशि में अचानक तेजी आने से चिंतित रिजर्व बैंक ने आज बैंकों से कहा है कि वह इस समस्या से आगे बढ़कर निपटें और अपनी रिण जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनायें.

 

रिजर्व बैंक ने बैंकों को यह भी अनुमति दी है कि जिन कंपनियों में उनका कर्ज फंसा है उन्हें अधिग्रहण कर उनकी स्थिति में सुधार लाने वाली विशिष्ट कंपनी को वह कर्ज दे सकते हैं.

 

रिजर्व बैंक ने इस संबंध में जारी अधिसूचना में कहा है, ‘‘यह तय किया गया है कि बैंक संकट में फंसी कंपनियों के अधिग्रहण के लिये स्थापित की गई विशिष्ट कंपनी को कर्ज सुविधायें प्रदान कर सकते हैं लेकिन यह सब सामान्य दिशानिर्देशों के तहत करना होगा.’’ इसमें कहा गया है कि बैंकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस तरह के वित्तपोषण के साथ जुड़े जोखिम का भी आकलन ठीक से कर लें. इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिये कि इस प्रकार की कंपनी उपयुक्त तरीके से पूंजीसंपन्न हो और उसका रिण इक्विटी अनुपात 3:1 से अधिक नहीं होना चाहिये.

 

रिजर्व बैंक की अधिसूचना में कहा गया है कि बैंकों के निदेशक मंडल को बैंकों की लगातार बिगड़ती संपत्ति गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिये हर जरूरी कदम उठाना चाहिये और इसके साथ ही रिण जोखिम प्रबंधन प्रणाली में सुधार पर ध्यान देना चाहिये.

 

संपत्ति गुणवत्ता की समस्या की जल्द से जल्द पहचान कर उसके शीघ्र समाधान के लिये बैंकों को अधिक सक्रिय होने की जरूरत है. इसमें कहा गया है कि बैंकों को बड़े कर्ज पर सूचनाओं की प्राप्ति के लिये प्रस्तावित केन्द्रीय रिपॉजिटरी का भी इस्तेमाल करना चाहिये.

 

रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकों के निदेशक मंडल को फंसे कर्ज के मामले में जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाले कर्जदारों को डिफाल्टर घोषित करने अथवा सहयोग नहीं करने वाले कर्जदारों की श्रेणी में डालने के लिये उपयुक्त प्रणाली बनानी चाहिये. निदेशक मंडल को इस तरह की श्रेणी में डाले गये खातों की निश्चित समयावधि में समीक्षा करनी चाहिये. यह समीक्षा छमाही अवधि में की जा सकती है.

 

रिजर्व बैंक ने बैंकों के रिण पुनर्गठन के मामले में बैंकों को कुछ राहत भी दी है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि ढांचागत क्षेत्र के कर्ज के पुनर्वित मामले में बैंकों को राहत होगी और इससे उनके फंसे कर्ज की राशि यानी एनपीए को कम करने में मदद मिलेगी. बैंकों एनपीए कम करने के लिये केन्द्रीय बैंक ने कुछ प्रोत्साहन भी दिये हैं.

 

रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंक संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों को छोड़कर अपने एनपीए को दूसरे बैंकों अथवा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी बेच सकेंगे. बैंक शुरआती होल्डिंग अवधि के बिना भी ऐसा कर सकेंगे.

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Web Title: बैंक पुराने फंसे कर्ज की समस्या से सक्रियता से निपटें : रिजर्व बैंक
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