ब्लॉग: आप से खतरा कांग्रेस को, बीजेपी को नहीं

By: | Last Updated: Thursday, 9 January 2014 3:39 PM

बीते कुछ हफ्ते नई नवेली आम आदमी पार्टी के लिए खुशियों भरे रहे हैं. जहां एक तरफ दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद दिल्ली में सरकार बन गई तो दूसरी तरफ सरकार के कामकाज से प्रभावित होकर जनता का आम आदमी पर विश्वास भी बढ़ता गया. पार्टी से जुड़ने के लिए आम आदमी से लेकर खास आदमी तक की लंबी लाइन लग गई. जिसके बाद पार्टी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साफ़ करना पड़ा कि वो आखिर कैसे जनता को पार्टी से जोड़ेगी.

 

अब अग्रेजी अख़बार टाइम्स आफ इंडिया ने एक सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित किया है जिसमें कहा गया है कि देश के आठ बड़े महानगरों के 44 फीसदी लोगों का कहना है कि वो लोकसभा में आम आदमी पार्टी को वोट करेंगे. जबकि 27 फीसदी का कहना है कि वो आम आदमी पार्टी को वोट करेंगे या नहीं यह उम्मीदवार पर निर्भर करेगा. यानि की देश के बड़े महानगरों में कुल 71 फीसदी लोग आम आदमी पार्टी के बारे में सोच रहे हैं. यानि की कुल मिलाकर फिलहाल आम आदमी पार्टी के पास खुश होने की कई वजहें हैं.

 

वैसे यह सर्वे मात्र 2015 लोगों पर किया गया है, जिनकी उम्र 18 से 45 साल तक है. ये सर्वे देश की राजधानी दिल्ली, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, देश के आईटी हब बैंगलोर, हैदराबाद, पूणे और अहमदाबाद में किया गया है.

 

खैर अगर इस सर्वे को शुरुआती रूझान मान भी लें तो सवाल यह उठता है कि आम आदमी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से नुकसान किसे हो रहा है ? बीजेपी को, कांग्रेस को, क्षेत्रिय पार्टीयों को, नरेंद्र मोदी को या राहुल गांधी को?

 

युवराज पिछड़ रहे हैं

 

इस सर्वे में 58 फीसदी लोगों का अभी भी कहना है कि नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार और उनकी पहली पसंद हैं. जबकि 25 फीसदी लोगों का कहना है कि नहीं अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे योग्य हैं. जबकि सिर्फ 14 फीसदी लोगों का कहना है कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी पीएम पद के लिए योग्य उम्मीदवार हैं. यानि की इस सर्वे के हिसाब तो कांग्रेस के युवराज पिछड़ते नजर आ रहे हैं.

 

आश्चर्य की बात यह है कि इन 8 शहरों की कुल 27 लोकसभा क्षेत्रों में से 17 पर अभी भी कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों का कब्जा है. जबकि सिर्फ 6 लोकसभा की सीटें बीजेपी के पास है. जबकि 5 सीटें अन्य के पास हैं. यानी की जो सीटें यूपीए के पास हैं उन क्षेत्रों में भी मोदी नम्बर 1 पर हैं. लेकिन यहां आश्चर्यजनक रूप से राहुल से आगे अरविंद केजरीवाल हो गए हैं. यानी की यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है.

 

हलांकि इस रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी अब भी प्रधानमंत्री पद के लिए पहले नंबर 1 पर है लेकिन बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा जो चिंता वाली बात है वो यह है कि बीजेपी के गढ़ और गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में भी आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ रही है.

 

बीजेपी के गढ़ में आप की सेंध

 

अहमदाबाद में 31 फीसदी लोगों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल को देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए. यानी की आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के गढ़ में सेंध लगा दी है.

 

अब सवाल यह उठता है कि आम आदमी पार्टी के उदय से सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा ? बीजेपी को या कांग्रेस को ?

 

नुकसान किसे हो रहा है ?

 

अगर हम पिछले कुछ दिनों के बदलते घटनाक्रम को देंखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि आम आदमी पार्टी में दो तरह के लोग शामिल हो रहे हैं. एक वो जो अबतक राजनीति को गंदा समझते थे, जो कांग्रेस और बीजेपी से तंग आ चुके थे. दूसरे वो जिन्हें लगने लगा था कि वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व नरेंद्र मोदी को नहीं रोक सकती है. इसलिए उन्हें आम आदमी पार्टी एक विकल्प के रूप में नज़र आई.

 

पिछले कुछ दिनों में आम आदमी पार्टी में जो खास लोग शामिल हुए हैं उनमें गुजरात की मल्लिका साराभाई हैं जो लाल कृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकी हैं. डेक्कन एयरलाइन के संस्थापक कैप्टन गोपीनाथ, इंफोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य वी बालाकृष्णन, रॉयल बैंक आफ स्कॉटलैंड इंडिया की पूर्व सीओ मीरा सान्याल, एनडीटीवी के पूर्व सीओ समीर नायर, पूर्व ओलंपिंक खिलाड़ी अजीत पाल सिंह, लाल बहादूर शास्त्री जी के नाती आदर्श शास्त्री, हीरो मोटर कार्प के सीओ पवन मुंजाल, सिरसा से दो बार सांसद रहे हेतराम, पूर्व बीजेपी विधायक कन्नु कलासरिया, अल्का लांबा पूर्व नेता कांग्रेस. और अब इसमें नाम जुड़ने वाला है आईबीएन 7 के पूर्व संपादक आशुतोष और नर्मदा बचाओं आंदोलन से जुड़ी मेधा पाटकर का.

 

ये वो कुछ नाम है जो पिछले कुछ दिनों में आम आदमी पार्टी से जुड़ें है. यानी की अगर आप उद्योगपति हैं, किसी पार्टी के पूर्व नेता रह चुके हैं. देश के वरिष्ठ पत्रकार रह चुके हैं तो आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर लीजिए आप भी आम आदमी हो जाएंगे.  जितने लोगों की राजनीतिक इच्छाएं हैं वे सब लोग आम आदमी पार्टी के माध्यम से अपनी इच्छाएं पूरी करना चाहते हैं.

 

जहां तक लगता है ये नतीजे बीजेपी और संघ परिवार को बेचैन जरूर कर सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता की ये बीजेपी का वोट बैंक काट पाएंगे. आम आदमी पार्टी से किसी को सबसे ज्यादा नुकसान होगा तो वो है कांग्रेस.

 

कांग्रेस विरोध का फायदा कौन उठाता है ?

 

यह साफ हो चुका है कि देश के अधिकांश हिस्सों में कांग्रेस विरोधी लहर है. अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस विरोध का फायदा कौन उठाता है ?

 

आम आदमी पार्टी के वोटर या फॉलोवर ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में है खास तौर पर मेट्रों शहरों में. उन जगहों पर जहां शिक्षा का स्तर ऊंचा हैं. इंटरनेट की पहुंच आसान है. सूचना और तकनीक है. वहां आम आदमी पार्टी सिर्फ दिल्ली में अच्छा काम करके पंहुच जाएगी. अगर इन 8 शहरों के 27 लोकसभा क्षेत्रों में से 6-8 सीटें भी आम आदमी पार्टी जीत लेती है तो ये सीटें वो सीटें होंगी जो कांग्रेस के पास थीं. बीजेपी की सीटें 6 से कम शायद ना हो क्योंकि उन्हीं शहरों में 58 फीसदी लोग मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं. और जो लोग आम आदमी पार्टी से प्रभावित हैं उनमें से सिर्फ 5 फीसदी ही मानते हैं कि आम आदमी पार्टी सरकार बनाएगी. तो ऐसे में कोई भी आम आदमी पार्टी को वोट देने से पहले फिर एक बार सोचेगा. क्योंकि कोई भी अस्थिर सरकार नहीं चाहेगा. यानी की बीजेपी को इन शहरों में आम आदमी पार्टी से कोई खास नुकसान नहीं होगा. आम आदमी पार्टी यूपीए गठबंधन को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी.

 

भारत के ग्रामीण हिस्से में लोकसभा की लगभग 400 सीटें है और इन क्षेत्रों के मतदाताओं के पास कोई वजह नहीं है जिससे वो आम आदमी पार्टी को वोट करें. अगर उन्हें केजरीवाल पर थोड़ा बहुत भरोसा होगा भी तो ज्यादातर लोग ये सोचेंगे की आखिर मैं अपना वोट आम आदमी पार्टी को क्यों दूं ? सरकार तो वो बना नहीं पाएंगे.

 

दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी लगातार दौरे कर रहे हैं. चुनाव दूसरे राज्यों में था उस समय भी मोदी ने एक के बाद एक उत्तर प्रदेश में 6 रैलियां की. बिहार, झारखंड में रैली की. तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव के समय लगातार रैलियां की. यानी की केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अभी मीडिया में, दिल्ली में और सोशल नेटवर्क पर है तो मोदी की बीजेपी इन सब जगहों पर तो है ही साथ में ग्रामीण भारत में भी है.

 

यानी की केजरीवाल अगर शहरों में कांग्रेस की सीटें छीन भी लें और बीजेपी के 2-4 फीसदी वोट काट भी लें तो ग्रामीण भारत में मोदी की चुनौती नहीं दे पाएंगे. यानी की केजरीवाल से खतरा कांग्रेस को है मोदी को नहीं.

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