मैं फरार नहीं हूं, न्यायालय के आदेश का पालन करने को तैयार हूं: सहारा प्रमुख

By: | Last Updated: Friday, 28 February 2014 5:40 AM

लखनऊ: सहारा प्रमुख सुब्रत राय ने आज कहा कि वह गिरफ्तारी से भाग नहीं रहे हैं और उच्चतम न्यायालय आज उन्हें जो भी निर्देश देगा वह उसका ‘‘बिना किसी शर्त पालन करने’’ को तैयार हैं.

 

राय ने कहा कि वह अब भी लखनउ में हैं और ‘‘चिकित्सकों के एक पैनल’’ से विचार विमर्श करने के लिए कुछ देर के लिए बाहर गए थे. राय ने कहा कि उन्होंने ‘‘पुलिस को पहले ही अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए कहा है.’’ इससे एक ही दिन पहले पुलिस उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें गिरफ्तार करने उनके घर गई थी लेकिन उसे वहां सहारा प्रमुख नहीं मिले थे.

 

राय ने बयान जारी करके उच्चतम न्यायालय से अपील की है कि वह उन्हें ‘‘तीन मार्च 2014 तक घर में नजरबंद रहकर अपनी बीमार मां के पास रहने की अनुमति दे.’’ उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय चाहता है तो वह आज भी दिल्ली पहुंचने को तैयार है.

 

उच्चतम न्यायालय ने राय के खिलाफ 26 फरवरी को गैर जमानती वारंट जारी करके पुलिस से उन्हें गिरफ्तार करने और चार मार्च को अपने समक्ष पेश करने को कहा था.

 

राय ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि वह ‘‘कानून का पालन करने वाले नागरिक’’ हैं, न कि ऐसे व्यक्ति हैं जो फरार होगा. उन्होंने कहा, ‘‘ मैं कल शाम चिकित्सकों के एक दल से अपनी मां की कुछ चिकित्सकीय रिपोटरें के संबंध में सलाह लेने सहारा शहर लखनउ से बाहर गया था और फिर मैं एक वकील के घर भी गया था.’’ लखनउ पुलिस के एक दल ने उच्चतम न्यायालय का गैर-जमानती वारंट तामील कराने के लिये कल राय के घर छापा मारा था लेकिन उसे वह वहां नहीं मिले थे.

 

गोमतीनगर पुलिस का एक दल वारंट लेकर सहारा प्रमुख को गिरफ्तार करने पहुंचा था और उसने उनके घर के भीतर तलाशी भी ली थी.

 

इसके बाद गोमतीनगर के थानाध्यक्ष अजीत सिंह चौहान ने बताया कि राय सहारा शहर परिसर के अंदर नहीं मिले जबकि एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि राय सहारा अस्पताल में भी नहीं मिले.

 

राय ने अदालत की अवमानना के एक मामले में पेश नहीं होने के लिए कल स्वयं उच्चतम न्यायालय से ‘‘बिना शर्त माफी’’ मांगी थी और अपने खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट रद्द किए जाने की अपील की थी.

 

राय ने स्वीकार किया था कि उनसे यह आकलन करने में चूक हुई कि न्यायालय उन्हें एक दिन के लिए निजी पेशी से छूट प्रदान कर देगी.

 

राय ने आज जारी बयान में दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के 31 अगस्त 2012 और पांच दिसंबर 2012 को दिए आदेश में उनके खिलाफ : दो सहारा फमोर्ं के बॉन्डधारकों को धन देने के लिए सेबी के पास 24 हजार करोड़ रपए से अधिक राशि जमा कराने के संबंध में : कोई निर्देश नहीं थे और इसके बावजूद वह ‘‘इन सब का सामना’’ कर रहे हैं. राय का समूह 68000 करोड़ रपए से अधिक की राशि होने का दावा करता है और उनका समूह निवेशकों का धन लौटाने को लेकर नियामक सेबी के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ रहा है.

 

राय ने कहा कि वह मीडिया के साथ साथ न्यायाधीशों को भी अपना पत्र भेज रहे हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे कई लोगों ने किसी अस्पताल में भर्ती हो जाने और वहां रहने की सलाह दी क्योंकि चिकित्सीय आधार पर अदालतों में पेशी से छूट पाना सामान्य बात है. लेकिन मुझे इस तरह का नाटक पसंद नहीं है.’’ राय ने कहा, ‘‘ मैंने पुलिस से पहले ही उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार अपना कर्तव्य निभाने को कह दिया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं लखनउ में हूं और हाथ जोड़कर एवं अत्यंत नम्रता से न्यायाधीशों से अपील करता हूं कि क्या न्यायालय मुझे तीन मार्च 2014 तक घर में नजरबंद रहकर अपनी बीमार मां के पास रहने की अनुमति दे सकता है.’’

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Web Title: मैं फरार नहीं हूं, न्यायालय के आदेश का पालन करने को तैयार हूं: सहारा प्रमुख
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