विवादों के विश्वास: पुरानी टिप्पणी से नई मुसीबत! 2008 के वीडियो पर हुआ बवाल, वीडियो में नर्सों पर अभद्र टिप्पणी

By: | Last Updated: Thursday, 23 January 2014 4:13 AM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास अपनी पुरानी टिप्पणियों को लेकर नई-नई मुसीबत में फंसते जा रहे हैं. कुमार विश्वास के खिलाफ अब दक्षिण भारत की नर्सों पर अभद्र टिप्पणी करने का मोर्चा खुल गया है.

 

बैंगलोर में नर्सों के विरोध प्रदर्शन के निशाने पर हैं आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास. दक्षिण भारत की नर्सों पर उनकी टिप्पणी का एक वीडियो पिछले दिनों सोशल वेबसाइट आया…तो हंगामा हो गया.

 

आपको बता दें ये वीडियो साल 2008 में रांची में हुए कवि सम्मेलन का है, जिस पर केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी से लेकर दक्षिण भारतीय नर्सों के संगठन तक…कुमार विश्वास से माफी की मांग कर रहे हैं.

 

इसी टिप्पणी को लेकर कोच्चि में मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की. हंगामा मचता देख कुमार विश्वास ने माफी तो मांग ली…लेकिन ये कहने से नहीं चूके कि ये टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया न होकर कवि सम्मेलन की तात्कालिक जरूरत थी.

 

कुमार विश्वास का तर्क- राजबब्बर जी ने ‘इन्साफ का तराज़ू’ में अस्मत लूटने का एक दृश्य किया था, शत्रुघ्न सिन्हा जी ने ‘शैतान’ फ़िल्म में ऐसा ही एक दृश्य किया था, अमिताभ बच्चन जी ने कई फिल्मों में ईश्वर तक को बुरा-भला कहा है. तो क्या अभिनय के दौरान उनके व्यवसायिक जीवन में निभाए गए स्क्रिप्टेड किरदारों की वजह से उन पर इल्ज़ाम लगाया जा सकता है? क्या खलनायक का किरदार निभाते समय किये गए अपराधों के लिए कांग्रेस (राज बब्बर) और भाजपा (शत्रुघ्न सिन्हा) को कटघरे में खड़ा कर देना चाहिए? क्या कवि-सम्मेलनीय मंच पर बोले गए स्क्रिप्टेड जुमलों की वजह से हिन्दू, मुस्लमान, सिख, ईसाई, जैन, पठान, जाट, ब्राह्मण, राजपूत, महिला, नर्स, टीचर, संत, कवि, बंगाली, बिहारी, केरलवासी, मारवाड़ी इत्यादि हर गुट को मेरे खिलाफ हो जाना चाहिए? जिस तरह से सात-आठ-दस साल पहले बोले गए जुमलों की वजह से आज अचानक भावनाएँ आहत होने लगी हैं, मुझे तो लगता है कि इसमें कोई पेंच ज़रूर है. फिर भी, यदि किसी भी वर्ग, दल, उम्र, क्षेत्र, धर्म, समुदाय, संगठन के किसी मित्र की भावना सच में आहत हुई है, उनसे हाथ जोड़ कर फिर से क्षमा माँगता हूँ. और यदि आप राजनीति से प्रेरित हो कर मुझे डराना या परेशान करना चाह रहे हैं, तो डेढ़ सौ रिपोर्टों के बाद एक रिपोर्ट और सही. पंद्रह हमलों के बाद सोलहवां और सही. सच की लड़ाई लड़ने वालों के साथ यही सुलूक करती आई है सियासत. लेकिन भ्रष्टाचार और राजनीतिक दम्भ के आगे अब घुटने नहीं टेकेंगा यह देश.

 

लेकिन कांग्रेस-बीजेपी से लेकर महिला आयोग तक कुमार विश्वास के इस तर्क से संतुष्ट नहीं है.

 

आपको बता दें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में कुमार विश्वास पर पहले ही यूपी में दो मामले दर्ज हो चुके हैं. जाहिर है कुमार विश्वास की पुरानी टिप्पणियां उनके लिए मुफ्त की मुसीबत साबित हो ही रही हैं…उनकी पार्टी का भी सिरदर्द बढ़ा रही हैं.