वैश्विक स्तर पर अगस्त में आई रपये में सबसे बड़ी गिरावट

वैश्विक स्तर पर अगस्त में आई रपये में सबसे बड़ी गिरावट

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

<p style="text-align: justify;">
<span style="line-height: 1.3em;"><b>नई दिल्ली:</b>
वैश्विक स्तर पर अगस्त में
रपया सबसे खराब प्रदर्शन
करने वाली मुद्राओं में रहा.
अर्थव्यवस्था में सुस्ती
तथा निवेशकों के भरोसे में
गिरावट से अगस्त में रपया 8.7
प्रतिशत कमजोर हुआ.</span>
</p>
<p style="text-align: justify;">
<span style="line-height: 1.3em;"></span><span style="line-height: 1.3em;">वर्ल्ड
फेडेरशन आफ एक्सचेंजेज
(डब्ल्यूएफई) द्वारा एकत्र
किए गए आंकड़ांे के अनुसार
एशिया, अमेरिकी क्षेत्र,
अफ्रीका, यूरोप तथा पश्चिम
एशिया के देशांो की मुद्राओं
की तुलना में अगस्त माह में
डालर के मुकाबले रपये का
प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा.</span>
</p>
<p style="text-align: justify;">
<span style="line-height: 1.3em;"></span><span style="line-height: 1.3em;">अगस्त
में रपया गिरकर 66.07 प्रति डालर
तक नीचे आ गया. जुलाई में यह 60.80
प्रति डालर पर था. इस तरह
अगस्त में रपया 8.7 प्रतिशत
गिरा. हालांकि, चालू माह में
इसमें कुछ सुधार देखने को
मिला है. 28 अगस्त को रपया अपने
सर्वकालिक निचले स्तर 68.85
प्रति डालर पर आ गया.</span>
</p>
<p style="text-align: justify;">
<span style="line-height: 1.3em;"></span><span style="line-height: 1.3em;">अगस्त
में जिन अन्य देशांे की
मुद्राओं में गिरावट आई
उनमें इंडोनेशियाई रपैया 6.3
प्रतिशत, तुर्की की लीरा 4.9
प्रतिशत, ब्राजील की रीयल (4.1
प्रतिशत) तथा मेक्सिको की
पीसो (4 प्रतिशत) शामिल हैं.</span>
</p>
<p style="text-align: justify;">
<span style="line-height: 1.3em;"></span><span style="line-height: 1.3em;">डेलायट
हास्किंस एंड सेल्स के
भागीदार अतुल धवन ने कहा,
‘‘वैश्विक निवेश कोष प्रवाह
में बदलाव के अलावा भारतीय
मुद्रा में गिरावट की प्रमुख
वजह उंचा चालू खाते का घाटा
(कैड) तथा कर अनिश्चितता के
बीच निवेशकांे के भरोसे का
डगमगाना है.’’ विदेशी
निवेशकांे द्वारा जून-जुलाई
में भारतीय बाजार से 62,000 करोड़
रपये (10.5 अरब डालर) की निकासी
की गई जिससे भी रपये पर दबाव
बना.</span>
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