स्विट्जरलैंड जानकारी नहीं देने में ‘चुराये आंकड़ों’ की आड़ ले रहा है: चिदंबरम

स्विट्जरलैंड जानकारी नहीं देने में ‘चुराये आंकड़ों’ की आड़ ले रहा है: चिदंबरम

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

नई दिल्ली: जी-20 समझौते के अनुसार बैंकिंग सूचनायें साझा नहीं करने पर स्विट्जरलैंड की आलोचना करते हुये वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि यदि चोरी के आंकड़ों के आधार पर स्विट्जरलैंड अमेरिका को जानकारी दे सकता है तो भारत को क्यों नहीं दे सकता.

 

चिदंबरम ने जोर देते हुये कहा कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों द्वारा रखे गये कथित कालेधन के बारे में जानकारी हासिल करने के लिये हरसंभव प्रयास किया. चिदंबरम ने कहा कि स्विट्जरलैंड के अधिकारी इस बात की आड़ ले रहे हैं कि चुराये गये आंकड़ों के आधार पर जानकारी साझा नहीं की जा सकती.

 

उन्होंने कहा, ‘‘वह कहते हैं कि चोरी के आंकड़ों पर हम जानकारी नहीं दे सकते जब तक कि हमारी संसद ऐसा कानून नहीं बना देती है. फिर हमने पूछा कि आपने अमेरिका के साथ कैसे आंकड़ों को साझा किया? अमेरिका का भारत के मुकाबले बड़ा प्रभाव है, आप अमेरिका के साथ जानकारी साझा करते हैं, आप भारत के साथ इसे नहीं बांट सकते?’’ वित्त मंत्री ने कहा कि भारत इस मुद्दे को हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठायेगा. जी-20 की बैठक में भी इसे उठाया जायेगा. विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अगले महीने वाशिंगटन में होने वाली सालाना बैठक में जी 20 नेताओं के समक्ष यह मुद्दा उठाया जायेगा.

 

चिदंबरम ने 13 मार्च को स्विट्जरलैंड की वित्त मंत्री को लिखे पत्र में इस संबंध में अपनी चिंतायें रखीं. इसमें कहा गया कि स्विट्जरलैंड उसके बैंकों में भारतीयों के कथित तौर पर रखे गए बिना हिसाब किताब वाले धन के बारे में जानकारी नहीं दे रहा है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपनी तरफ से अपने अधिकार क्षेत्र के तहत जानकारी हासिल करने के लिये हरसंभव प्रयास किया है. बजट भाषण में मैंने जो जानकारी मुझे मिली है उसके बारे में कहा है. कितने मामले हमें मिले हैं यह भी बताया है.’’ चिदंबरम ने कहा, ‘‘कुछ समय में, अगले कुछ सप्ताहों के दौरान शायद, हम कुछ इस बारे में कुछ जानकारी जारी करेंगे कि किसका आकलन किया गया और किस पर कर लगाया गया.’’ भारतीयों का स्विट्जरलैंड के बैंकों में कथित तौर पर रखे गये कालेधन का मुद्दा देश में गरम चर्चा का विषय बना हुआ है. 7 अप्रैल से शुरू होने वाले लोकसभा चुनावों में भी यह प्रमुख मुद्दा है.

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