मुखौटा कंपनियों के 3 लाख निदेशकों पर गिरेगी गाज

मुखौटा कंपनियों के 3 लाख निदेशकों पर गिरेगी गाज

जिन मुखौटा कंपनियों ने तीन या उससे ज्यादा साल तक रिटर्न दाखिल नहीं किया, उनके निदेशक को किसी दूसरी कंपनी में निदेशक बनने या उसी कंपनी में दोबारा निदेशक नियुक्त करने पर रोक रहेगी. इस तरह उन्हे मजबूरन अपना पद छोडना पड़ेगा.

By: | Updated: 06 Sep 2017 08:49 PM

नई दिल्लीः मुखौटा यानी शेल कंपनियो के करीब तीन लाख निदेशकों पर किसी भी कंपनी मे निदेशक बनने पर रोक लगेगी. साथ ही सरकार ने तय किया है कि जिन कंपनियों के नाम कंपनियों के सरकारी रजिस्टर से हटा दिया गया है, उनके निदेशक यदि गलत तरीके से बैंक खाते से पैसे निकालने की कोशिश करेंगे तो उन्हे जेल और जुर्माना दोनों को ही भुगतना पड़ सकता है.


वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को दो लाख से भी ज्यादा मुखौटा कंपनियों के नाम कंपनियों के रजिस्टर से काटने और उनके बैंक खाते का परिचालन रोकने का ऐलान किया था. बुधवार को इसी मुद्दे पर कॉरपोरेट मामलों के नए राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने समीक्षा बैठक की. बैठक में तय हुआ कि नाम काटी गई कंपनियों के निदेशक या अद्धोहस्ताक्षरी यदि गलत तरीके से बैंक खाते से पैसा निकालने तो उन्हे छह महीने से लेकर दस साल तक की सजा हो सकती है. यही नहीं यदि आम जनता के साथ धोखाधड़ी का आरोप साबित हुआ तो कम से कम तीन साल की सजा हो सकती है, साथ ही धोखाधड़ी मे शामिल रकम का तीन गुना तक जुर्माना लग सकता है.


बैंकिंग विभाग 5 सितम्बर को सभी बैंकों को काटी गयी कंपनियों के बैंक खातों का परिचालन रोकने की हिदायत दे चुका है. यहां ये साफ तौर पर गया है कि ऐसी कंपनियों के निदेशक और अद्धोहस्ताक्षरी किसी भी सूरत में खातों का परिचालन नहीं कर सकते. फिर भी यदि पाया गया कि आदेश जारी होने के पहले ही गलत तरीके से पैसा निकाला गया या खाता खाली कर दिया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.


बैठक में तय हुआ कि जिन मुखौटा कंपनियों ने तीन या उससे ज्यादा साल तक रिटर्न दाखिल नहीं किया, उनके निदेशक को किसी दूसरी कंपनी में निदेशक बनने या उसी कंपनी में दोबारा निदेशक नियुक्त करने पर रोक रहेगी. इस तरह उन्हे मजबूरन अपना पद छोडना पड़ेगा. सरकार का अनुमान है कि ऐसी कवायद के बाद दो से तीन लाख अयोग्य निदेशक पर पूरी तरह से पाबंदी लग जाएगी.


खातों पर पाबंदी लगाने के बाद अब सरकार उन लोगों को पहचानने में लगी है जो लोग इन मुखौटा कंपनियों के पीछे हैं और वास्तव रुप में उन्हे ही फायदा हुआ. ऐसी सारी कंपनियों के निदेशकों के बारे में पूरी जानकारी जांच एजेंसियो को मुहैया करायी जा रही है. कुछ मामलों में इन कंपनियो की कारगुजारियों में मदद करने वाले जुड़े चाटर्ड अकाउंटेट, कंपनी सेक्रेटरी और कॉस्ट अकाउंटेट की पहचान कर ली गयी है. अब ये देखा जा रहा है कि ऐसे पेशेवरों के खिलाफ चार्टर्ड अकाउंटेंट इंस्टीट्यूट या कंपनी सेक्रेटरी इंस्टीट्यूट क्या कार्रवाई कर रही है.


कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री पी पी चौधरी का मानना है कि मुखौटा कंपनियों पर कार्रवाई से ना केवल काले धन के खिलाफ मुहिम में ही नहीं, कारोबारी माहौल सुगम बनाने में भी मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति की सही तस्वीर सामने आएगी जिससे धोखाधड़ी और कर की चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. दूसरी ओर गैर कानूनी गतिविधियों के लिए पैसे की उपलब्धता खत्म होगी.

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