दो साल में कंपनियों में धोखाधड़ी के मामले 45 प्रतिशत बढ़े : एसोचैम

By: | Last Updated: Wednesday, 14 January 2015 2:52 PM
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नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम-ग्रांट थोर्टन के संयुक्त सर्वे में दावा किया गया है कि पिछले दो साल के दौरान भारतीय कंपनियों में भ्रष्टाचार, मनी लांड्रिंग, कर अपवंचना, वित्तीय गड़बड़ी और रिश्वत जैसे धोखाधड़ी से जुड़े विभिन्न मामलों में 45 प्रतिशत वृद्धि हुई है.

 

सर्वे के अनुसार कंपनियों में आंतरिक नियंत्रण की कमजोरी, संसाधनों की तंगी और वरिष्ठ प्रबंधन के हाथ में ज्यादा अधिकार होने की वजह से इस तरह की धोखाधड़ी बढ़ी है.

 

एसोचैम और ग्रांट थोर्टन के इस सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि रीयल एस्टेट और ढांचागत क्षेत्र की कंपनियों में धोखाधड़ी की संभावना ज्यादा रहती है. 52 प्रतिशत ने इस तरह की संभावना व्यक्त की.

 

इसके बाद वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों में 34 प्रतिशत, दूरसंचार क्षेत्र में पांच, विनिर्माण क्षेत्र में तीन, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी में दो प्रतिशत तथा पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र की कंपनी में दो प्रतिशत धोखाधड़ी की संभावना व्यक्त की गई.

 

सर्वे में भाग लेने वाले 65 प्रतिशत इस बात से सहमत थे कि जान बूझकर चूक करने अथवा धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि हुई है. सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि धोखाधड़ी के बढ़ते जोखिम की वजह से ही वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश करने से कतरा रही हैं.

 

एसोचैम महासचिव डी.एस. रावत ने सर्वे दस्तावेज जारी करते हुये कहा कि धोखाधड़ी की शिकार कंपनियों को वित्तीय नुकसान के साथ साथ लंबे समय तक अपने ब्रांड के प्रति नकारात्मक प्रभाव भी सहना पड़ता है.

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