विदेशों में जमा 4,000 करोड़ से ज्यादा की काले धन का मिला पता

By: | Last Updated: Monday, 5 October 2015 2:33 PM

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि 3,770 करोड़ रुपये नहीं बल्कि 4,147 करोड़ रुपये के अघोषित विदेशी बैंक खाते और संपत्ति की जानकारी लोगों ने जमा करायी है.

 

कागज पर दी गयी जानकारी की पड़ताल के बाद मंत्रालय ने कीमत में फेरबदल किया. हालांकि जानकारी देने वालों की तादाद पहले के ही तरह 638 है. मंत्रालय ने जानकारी नहीं देने वालों को फिर से चेताया तो जरूर, लेकिन उन पर कार्रवाई को लेकर कुछ दुविधा में दिखी.

 

वित्त मंत्रालय के तीन सचिव, वित्त व व्यय सचिव रतन वतल, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास और राजस्व सचिव हसमुख अधिया, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यिन के साथ जब मीडिया के सामने आए तो फिर यह दोहराने से नहीं चुके जिन लोगों ने काले धन के कानून के तहत जानकारी नहीं दी, उन्होंने जोखिम उठाया है. लेकिन जब यह पूछा गया कि क्या विदेशों में अषोषित संपत्ति पर कार्रवाई को लेकर सरकार की अपनी कोई सीमा है तो राजस्व सचिव अधिया ने माना कि इस मामले में सरकार की अपनी कुछ मर्यादाएं हैं.

 

सरकार ने 96 देशो के साथ डबल टैक्सेशन अवायडेंस एग्रीमेंट (Double Taxation Avoidance Agreement) कर रखा है जिससे निवेशकोें पर दोनों देशों में कर नहीं लगे और कर चोरी पर नजर रखी जा सके. इसके साथ ही 14 देशों के साथ कर सम्बंधी सूचनाओं के लेन-देन साझा करने का करार कर रखा है. लेकिन इन करार के तहत सूचनाओं का लेन-देन कई शर्तें पूरी करने मसलन कर चोरी का पुख्ता सबूत मिलने पर ही सम्भव है. यही नहीं, सामने वाले देश के रूख पर भी निर्भर करता है कि वो कितनी जानकारी साझा करता है.

 

इसीलिए वित्त मंत्रालय अब ये संकेत दे रहा है कि काले धन कानून के तहत जानकारी नहीं देने वालों के खिलाफ दूसरे देशों से सबूत जुटाने में खासी मशक्कत करनी होगी. वैसे मंत्रालय को उम्मीद है कि जब 2017 में दुनिया के विभिन्न देश कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड के तहत सूचनाओं का स्वत लेन-देन शुरु करेंगे तो काला धन ऱखने वालों पर कार्रवाई में सहूलियत होगी.

 

इसके साथ ही अमेरिका के साथ हुए Foreign Account Tax Compliance Act यानी फैटका के तहत हुए समझौते से भी काले धन के बारे में जानकारी जुटाने और फिर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी. ध्यान रहे कि इस करार के तहत 30 सितंबर से दोनों देशों के बीच कर सूचना साझा करने की अनुमति है.

 

विदेशों में अघोषित बैंक खाता और संपत्ति की जानकारी देने के लिए विशेष अनुपालन खिड़की की मियाद 30 सितम्बर को समाप्त हो गयी. इस सुविधा में जानकारी देने वालों को 31 दिसम्बर तक 30 फीसदी की दर से टैक्सा और उतना ही जुर्माना यानी कुल घोषित संपत्ति की कीमत के 60 फीसदी के बराबर चुकाना होगा, लेकिन उसके बाद वो चैन की सांस ले सकते हैं, क्योंकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी.

 

बहरहाल, जिन लोगों ने जानकारी नहीं दी और सरकार अपने स्तर पर अघोषित बैंक खाते और संपत्ति का पता लगा लेती है तो सम्बंधित व्यक्ति को 30 फीसदी की दर से टैक्स और उसका तीन गुना जुर्माना यानी 100 रुपये के अघोषित बैंक खाते या संपत्ति पर 120 रुपये चुकाने होंगे. इसके अलावा कानूनी कार्रवाई शुरु होगी जिसके बाद 10 साल तक सजा हो सकती है.

 

तय रकम से ज्यादा के लेन-देन पर जल्द ही जरुरी होगी पैन की जानकारी देना

 

इस बीच मंत्रालय ने संकेत दिए कि एक निश्चित रकम से ज्यादा के नकद में लेन-देन पर परमानेंट अकाउंट नम्बर यानी पैन जल्द ही जरूरी हो जाएगा. यह कदम घरेलू मोर्च पर काले धन के खिलाफ कार्रवाई का अहम हिस्सा है.

 

मंत्रालय ने आज साफ किया कि एक निश्चित रकम से अधिक के लेन-देन के मामले में पैन की जानकारी सुनिश्चित करने के प्रस्ताव पर फैसला लेने की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है. ध्यान रहे कि बजट में यह ऐलान किया गया था कि एक लाख रुपये कीमत या उससे ज्यादा कीमत की खरीद-फरोख्त पर पैन जरूरी होगा. हालांकि सर्राफा व्यवसायी इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, क्योकि उनका कहना है कि ज्यादतर खरीदारों का पास पैन नहीं होता. वैसे सरकार पहले ही सर्राफा व्यवसायियों की इस मांग को खारिज करने का इशारा कर चुकी है. ध्यान रहे कि देश भर में 22.94 करोड़ पैन नम्बर जारी किए जा चुके हैं.

 

घरेलू काले धन के मोर्च पर सरकार की एक औऱ पहल, बेनामी लेन देन पर लगाम के लिए बिल को संसद की मंजूरी का इंतजार है. इस कानून के बनने के बाद बेनामी संपत्ति को सरकार न केवल अपने कब्जे में लेगी, बल्कि संपत्ति के मूल मालिक को जुर्माना देना होगा और जेल भी जाना पड़ सकता है. ध्यान रहे कि इस तरह का एक कानून 1988 में बना था, लेकिन उसके लिए कभी अधिसूचना ही जारी नहीं हुई जिससे वो कानून अमल में नहीं आ पाया.. पिछली सरकार ने इस कानून में फेरबदल के लिए बिल भी लेकर आयी, लेकिन लोकसभा भंग होने तक बिल पारित नहीं हो पाया.

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