हाई कोर्ट ने मैगी एक्सपोर्ट को दिखाई हरी झंडी, भारत में लगा रहेगा बैन

By: | Last Updated: Tuesday, 30 June 2015 10:58 AM
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मुम्बई: बंबई हाई कोर्ट ने मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले को मैगी के निर्यात की इजाजत दे दी है. लेकिन उसकी नौ किस्मों को जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताते हुए उन पर बैन लगाने के अपने फैसले पर वह कायम है.

 

एफएसएसएआई के वकील महमूद प्राचा ने जस्टिस वी एम कनाडे और जस्टिस बी पी कोलाबावाला की पीठ से कहा, ‘‘हमें क्यों जिम्मेदार ठहराया जाए… यदि कंपनी दावा करती है कि उसके उत्पाद सुरक्षित हैं और सुरक्षा मानकों का पालन करती है तो उसे इन उत्पादों को नष्ट करने के बजाय निर्यात करने दिया जाए. ’’ अदालत नेस्ले इंडिया की याचिका पर सुनवाई कर रही है. नेस्ले इंडिया ने उसके लोकप्रिय खाद्य स्नैक की नौ किस्मों पर एफएसएसएआई के रोक संबंधी पांच जून के आदेश को चुनौती दी है. उसने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाया है. महाराष्ट्र सरकार ने इसी आधार पर इन उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी थी कि वे मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित एवं खतरनाक हैं.

 

एफएसएसएएआई के यह कहने के बाद कि उसे कंपनी द्वारा मैगी का दूसरे देशों में निर्यात पर कोई आपत्ति नहीं है, हाई कोर्ट ने नेस्ले इंडिया को अपने उत्पाद भारत के बाहर बेचने की छूट दे दी, बशर्ते कि नियमों एवं खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करे.

 

नेस्ले के वकील इकबाल छागला ने कहा कि महीने के आखिर तक कंपनी 17000 करोड़ पैकेट मैगी नष्ट करेगी. इसमें से 11000 करोड़ पैकेट बाजार से वापस मंगाये जा रहे हैं. महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि उसकी ओर से डेरियस खम्बाटा पेश होंगे और उसने संक्षिप्त स्थगन का अनुरोध किया. इसके बाद अदालत ने इस मामले की सुनवाई 14 जुलाई के लिये स्थगित कर दी. वकील सुमेधा राव ने यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप किया कि नेस्ले इंडिया को उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए पर्याप्त कोष की स्थापना करनी चाहिए. लेकिन अदालत ने उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया और कहा कि वह नेस्ले इंडिया की याचिका में हस्तक्षेप करने के बजाए पृथक याचिका दे सकती हैं.

 

इस बीच, एफएसएसएआई और अन्य प्रतिवादियों ने मैगी उत्पादों पर पाबंदी से राहत की मांग संबंधी नेस्ले इंडिया की याचिका का विरोध करने के लिए हलफनामा दाखिल किया.

 

हाई कोर्ट ने इससे पहले मैगी नूडल्स की नौ किस्मों पर बैन संबंधी नियमों के आदेश पर स्टे लगाने की नेस्ले इंडिया की मांग अस्वीकार करते हुए कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था.

 

एफएसएसएआई ने 60 पन्नों के अपने हलफनामे में मैगी नूडल्स पर पाबंदी लगाने के पांच जून के अपने फैसले को सही ठहराया और कंपनी के सुरक्षा दावे पर सवाल खड़ा किये.

 

उसने कहा कि मौजूदा स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि कंपनी अपनी ही घोषित नीति एवं सिद्धांतों पर कायम नहीं रह पायी.

 

एफएसएसएआई ने कहा कि भले ही नेस्ले 30 सालों से मैगी बना रही है और बेच रही है, लेकिन इसके बावजूद यह दावा सही नहीं है कि उसकी मैगी फैक्ट्रियों में खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता नियंत्रण की कड़ी व्यवस्था है.

 

उसने कहा, ‘‘यदि बहस की दृष्टि से यह मान भी लिया जाए कि उसकी विनिर्माण गतिविधियों एवं प्रक्रियाओं के सिलसिले में सुरक्षा दावे ठीक हैं तो भी जाना पहचाना विषाक्त पदार्थ सीसे की बड़े पैमाने पर मौजूदगी के बारे में यही माना जा सकता है कि ऐसा जानबूझकर किया गया. यह असंभव है कि सीसे की इतनी अधिक मात्रा उन्नत प्रयोगशालाओं की पकड़ में नहीं आता. ’’ नेस्ले ने कहा कि पाबंदी अनधिकृत, मनमानापूर्ण और असंवैधानिक है तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया क्योंकि उसे उचित सुनवाई का मौका नहीं दिया गया. एफएसएसएआई ने उसके इस दावे का भी खंडन किया.

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