जीएसटी में मुनाफाखोरी पर लगाम के लिए नई संस्था के तुरंत गठन का रास्ता साफ | Cabinet clears anti-profiteering authority under GST

जीएसटी में मुनाफाखोरी पर लगाम के लिए नई संस्था के तुरंत गठन का रास्ता साफ

यदि किसी ग्राहक को लगता है कि जीएसटी की दरों में की गयी कमी का फायदा उसे नहीं मिल रहा है तो वो वो इसकी शिकायत संबंधित राज्य के स्क्रीनिंग कमेटी में कर सकता है.

By: | Updated: 16 Nov 2017 09:58 PM
Cabinet clears anti-profiteering authority under GST

नई दिल्ली: वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी की दरें कम होने का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाने पर कारोबारियों को ज्रुर्माना देना पड़ सकता है औऱ विशेष परिस्थितियो में जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो सकता है. क्योंकि सरकार ने मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने की संस्था नेशनल एंटी-प्रॉफिटयरिंग अथॉरिटी (एनएए) को तुरंत बनाने का रास्ता साफ कर दिया है.


केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एनएए के लिए अध्यक्ष और तकनीकी सदस्यों से जुड़े पदों की नियुक्ति पर मंजूरी दी गयी. अध्यक्ष सचिव स्तर का अधिकारी होगा जबकि केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी तकनीकी सदस्य के लिए योग्य माने जाएंगे. मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने की व्यवस्था में इस संस्था के अलावा एक हर राज्य में एक स्क्रीनिंग कमेटी, केंद्रीय स्तर पर एक स्थायी समिति, और सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम यानी सीबीईसी के डायरेक्टर जनरल (सेफगार्ड्स) शामिल होंगे. ध्यान रहे कि जीएसटी से जुड़े कानून में मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने के लिए व्यवस्था विकसित करने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है.


कैसे लगेगा मुनाफे पर लगाम 


यदि किसी ग्राहक को लगता है कि जीएसटी की दरों में की गयी कमी का फायदा उसे नहीं मिल रहा है तो वो वो इसकी शिकायत संबंधित राज्य के स्क्रीनिंग कमेटी में कर सकता है. दूसरी ओऱ यदि राष्ट्रीय स्तर पर मुनाफाखोरी की आशंका होती है तो आवेदन सीधे-सीधे स्थायी समिति के पास भेजा जा सकता है. प्राथमिक दृष्टया में यदि आरोप सही लगे तो मामले की पड़ताल का काम सीबीईसी के डायरेक्टर जनरल (सेफगार्ड्स) को सौंपा जाएगा. डायरेक्टर जनरल अपनी रिपोर्ट सीधे-सीधे एनएए को देगा.


एनएए यदि मुनाफाखोरी की बात को सही मान ले तो ऐसी सूरत में संबंधित कारोबारी को गैर वाजिब तरीके से कमाया गया मुनाफा ब्याज के साध ग्राहक को लौटाना होगा. यदि ग्राहक को लौंटाना संभव नहीं हो तो पूरा पैसा कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराना होगा. यदि शिकायत बेहद गंभीर हो तो एनएए काराबोरी पर जुर्माना लगता सकता है और जीएसटीएन रजिस्ट्रेशन रद्द करने का आदेश भी दे सकता है. मुनाफाखोरी पर लगाम की व्यवस्था दो साल के लिए बनायी गयी है.


कैसे होती है मुनाफाखोरी 


जीएसटी की व्यवस्था में उपभोग के समय ही कर चुकाना होता है. कारोबारियों, व्यावसायियों या उद्यमियों पर जितनी कर की देनदारी बनती है, उसमे से वो कच्चे माल पर चुकाये कर को घटा देते हैं और बाकी बची रकम ही सरकारी खजाने में जमा कराते हैं. तकनीकी तौर पर इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट कहा जाता है. इसकी बदौलत ग्राहकों पर कर का बोझ कम हो जाता है. अब हो ये रहा है कुछ वस्तुओं और सेवाओं के मामले में इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा ग्राहकों को नहीं दिया जा रहा है और इनपुट टैक्स क्रेडिट को मुनाफे में शामिल कर लिया जा रहा है. इसके अलावा पुराने स्टॉक की आड़े में या फिरसॉफ्टवेयर अपटेड ना होने का भी बहाना कर मुनाफाखोरी की जाती है.


अब रेस्त्रां को ही ले लीजिए. 15 नवंबर के पहले एसी रेस्त्रां में खाने पर 18 फीसदी के हिसाब से जीएसटी लगता था और रेस्त्रां मालिकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा भी मिलता था. लेकिन सरकार का आरोप है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट की वजह से खाने के सामान के दाम में जो कमी होनी चाहिए थी, वो रेस्त्रां मालिक ग्राहकों को नहीं पहुंचा रहे थे. इसी वजह से 10 नवंबर को गुवाहाटी में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में तय हुआ कि होटलों में स्थित रेस्त्रां को छोड़ बाकी सभी पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा, लेकिन उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं मिलेगा.


अब रेस्त्रां व्यापारियों का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था खत्म होने से उनकी लागत बढ़ गयी है जिसकी वजह से उन्हें सामान के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं. नतीजा ये हुआ है कि कर की दर भले ही कम हो जाए, लेकिन सामान के दाम बढ़ गए हैं, नतीजा ग्राहकों को घटे हुए दर का कई जगहों पर फायदा नहीं मिल रहा है. वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अब रेस्त्रां मालिकों के खिलाफ शिकायत करने की मुकम्मल व्यवस्था तैयार हो रही है.


गुवाहाटी की बैठक में 211 किस्म के सामान पर जीएसटी की दर घटाने का फैसला किया गया. इसमें सबसे ज्यादा 178 किस्म के सामान पर ड्यूटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की गयी. दरों में कमी 15 नवंबर से प्रभावी हुईं. कई कंपनियों ने तो दाम में कमी का फायदा तुरंत देने का ऐलान कर दिया, लेकिन अभी इसका फायदा बड़े शहरों तक ही सीमित हैं. छोटे शहरों, कस्बो, गांवों वगैरह में नयी एमआरपी के स्टॉक आने पर ही कर में कमी का फायदा लोगों को देने की बात कही जा रही है. फिलहाल सरकार का मानना है कि एनएए की व्यवस्था विकसित होने के बाद किसी ना किसी बहाने मुनाफा कमाने के चलन पर रोक लगेगी और इसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा.

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