GST बिल को पर कम हो सकता है कांग्रेस और सरकार के बीच गतिरोध

By: | Last Updated: Friday, 4 December 2015 4:15 PM

नई दिल्ली : वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी (Goods & Service Tax) पर कांग्रेस को मनाने में कुछ हद तक सरकार को आसानी हो सकती है. मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यिन की अगुवाई वाली एक कमेटी की रपट से यह मदद मिलेगी, ये रिपोर्ट वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंपी गयी है.

 

रिपोर्ट में क्या है?

1. पहली दर रेवेन्यू न्यूट्रल रेट है. वैसे तो कमेटी ने 15-15.5 फीसदी का रेंज दिया, लेकिन वो चाहती है कि ये दर 15 फीसदी हो. ये वो दर है जिस पर केंद्र और राज्य की आमदनी में किसी तरह का नुकसान नहीं होगा.

 

2. दूसरी दर, निचली दर है. इसकी रेंज 12 फीसदी होगी. इस दर से टैक्स रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजों और दूसरे जरुरी सामान पर लगेगा.

 

3. तीसरी दर, ऊंची दर है. 40 फीसदी की इस दर से जीएसटी सिगरेट व गुटखा समेत तम्बाकू उत्पाद और मंहगी गाड़ियों और लग्जरी के सामान पर लगाया जाना चाहिए.

 

4. चौथी दर दरअसल रेंज (16.9-17.7 फीसदी) के रूप में है. ये दूसरी और तीसरी दर वाले सामान को छोड़ बाकी सामान और सभी तरह की सेवाओं पर लगाने का सुझाव है. तकनीकी भाषा में इसे स्टैंटर्ड रेट कहते हैं.

 

5. पांचवी दर सोने-चांदी जैसे बहुमूल्य धातुओं के लिए है और ये 2 से 6 फीसदी के बीच हो सकती है.

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रिपोर्ट मे आम जरूरत के सामान पर 18 फीसदी से कम दर रखने का सुझाव दिया गया है. कांग्रेस के उस मांग से बल निकाल सकता है जिसमें आम लोगों पर बोझ नहीं पड़ने की दलील देते हुए दर की ऊपरी सीमा 18 फीसदी रखने की बात कही गयी थी. लेकिन रिपोर्ट, कांग्रेस की उस मांग से इत्तेफाक नहीं रखती कि टैक्स की दर को संविधान में बांधा जाए. दूसरी ओर कांग्रेस की तीन में से दूसरी मांग मैन्युफैक्चरिंग राज्यों के लिए 1 फीसदी के अतिरिक्त टैक्स हटाने को लेकर है. रिपोर्ट भी कुछ ऐसा ही चाहती है.

 

कमेटी की मानें तो एक फीसदी के अतिरिक्त टैक्स को हटाने से देश को एक बजार बनाकर ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया जा सकेगा. ध्यान रहे कि महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य चाहते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग का गढ़ होने की वजह से उन्हें 1 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स का फायदा मिलना चाहिए. इस तरह के टैक्स से करीब 4,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है, लेकिन इससे सामान की कीमत बढ़ने की आशंका हो सकती है.

 

कांग्रेस की तीसरी मांग जीएसटी पर विवादों को सुलझाने की नयी व्यवस्था बनाने को लेकर है. लेकिन इस बारे में कमेटी ने कोई सुझाव नहीं दिया है, क्योंकि ये उसके कार्यक्षेत्र से बाहर है.

 

कमेटी ने इन दरों का आकलन, पेट्रोलियम और शराब के साथ उन सभी सामान को बाहर रखकर किया है जिन्हें जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है. लेकिन कमेटी चाहती है कि पेट्रोलियम, रियल स्टेट, और बिजली जैसे सामान और सेवाओं को जल्द से जल्द जीएसटी के दायरे में लाया जाए. इससे आधार बढ़ेगा और जीएसटी की दर को कम करने में मदद मिलेगी.

 

जीएसटी पूरे देश को एक बाजार बनाने का माध्यम है. इस नयी कर व्यवस्था में केंद्र और राज्य की 16 तरह की करों को मिला दिया जाएगा. केंद्र सरकार की करें मिलकर बनेंगी सीजीएसटी और राज्य सरकार की दरें मिलकर कहलाएंगी एसजीएसटी. नयी व्यवस्था में जहां राज्यों को सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार मिलेगा, वहीं केद्र सरकार सामान की खरीद-फरोख्त यानी ट्रेडिंग पर कर वसूल सकेंगी.

 

इसी मकसद से 122 वां संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है. संसद से ये बिल पारित होने के बाद कम से कम 15 राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी चाहिए होगी. इस विधेयक के कानून में तब्दील होने के बाद तीन और विधेयक, सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी), स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) और राज्यों के बीच व्यापार पर कर यानी इंटिग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) लाए जाएंगे. इन सब के कानून बनने के बाद ही देश में जीएसटी लागू किया जा सकेगा.  वैसे तो सरकार ने 1 अप्रैल 2016 से जीएसटी लागू करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन लम्बी-चौड़ी विधायी प्रक्रिया पूरी करने में लगने वाले समय की वजह से एक बार फिर नयी तारीख तय करनी पड़ सकती है. मूल रुप से यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2010 से लागू करने का प्रस्ताव था.

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Web Title: CONGRESS WANTS CHANGES IN GST BILL
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