शेयर बाजार, जिंसों के वायदा बाजार का नियमन अब एक छत तले

By: | Last Updated: Monday, 28 September 2015 8:33 AM
FMC merges with Sebi

नई दिल्ली: शेयर बाजार के साथ-साथ जिंसों के वायदा बाजार का नियमन अब सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनमय बोर्ड के जिम्मे आ गया है. वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सोमवार को जिंसों के वायदा बाजार के नियामक (रेग्युलेटर), वायदा बाजार आयोग यानी एफएमसी को सेबी में मिलाये जाने की औपचारिकता पूरी कर दी.

 

यह पहला मौका है जब दो नियामकों को मिलाया गया है. उम्मीद की जा रही है कि इस विलय से जहां जिंसों के वायदा बाजार में ज्यादा खुलापन आएगा, वहीं नए-नए किस्म के निवेश के माध्यम शुरू किए जा सकेंगे. साथ ही बैंक और वित्तीय संस्थाओं के लिए इस बाजार में पैसा लगाने का रास्ता भी खुल जाएगा. यह भी उम्मीद की जा रही है कि इस विलय के बाद 5,600 करोड़ रुपये वाले नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड यानी एनएसईएल जैसा घोटाला दोबारा नहीं होगा.

 

अभी तक जिंसों के वायदा बाजार के ब्रोकर पर कमोडिटी एक्सचेंज का नियंत्रण होता था, लेकिन नयी व्यवस्था में इन्हें शेयर ब्रोकर की तरह सेबी के पास पंजीकरण कराना होगा. इसका असर यह होगा कि किसी ने जरा भी गड़बड़ी की, उसके खिलाफ सेबी सख्त से सख्त कार्रवाई करेगा. यही नहीं अगर कोई कारोबारी जिंसों के वायदा बाजार मे गलत तरीके से मुनाफा कमाता है तो सेबी उसे जब्त कर प्रभावित निवेशकों में बौंट सकेगा. तकनीकी तौर पर इस प्रक्रिया को ‘डिस्गॉर्जमेंट’ कहते हैं और शेयर बाजार में पहली बार यह प्रक्रिया 2005 में हुए डीमैट घोटाले के आरोपी रुपलबेन पांचाल और उऩके साथियों से अवैध मुनाफा जब्त कर अपनाया गया था.

 

विलय का दूसरा बड़ा फायदा ऑप्शन जैसे निवेश के माध्यम को जिंसों के बाजार में लागू किया जाना होगा. ऑप्शन यानी विकल्प एक ऐसा सौदा है जिसमें भविष्य की तय तारीख को जिंस खऱीदने का करार किया जाता है. यह करार निवेशक को जिंस खऱीदने या बेचने का अधिकार तो देता है लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह खऱीद या बिक्री की प्रक्रिया को पूरी करे ही. इससे निवेशक को सुरक्षित करने का एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा. अभी शेयरों में ऑप्शन का सुविधा है. लेकिन जिसों में इसे लागू करने में कुछ वक्त लगेगा.

 

वैसे तो पिछले वर्ष एनएसईएल घोटाले के बाद ही इस विलय की रूपरेखा तैयार होने लगी जब एफएमसी को उपभोक्ता मामलात मंत्रालय से हटाकर वित्त मंत्रालय के अधीन लाया गया. दरअसल, इस घोटाले के बाद अंतररराष्ट्रीय स्तर पर पूरे भारतीय पूंजी बाजार की साख को लेकर सवाल उठने लगे. दूसरी ओर वित्तीय क्षेत्र के नियमन को लेकर बनी एक समिति यानी एएएसएलआरसी ने भी रिजर्व बैंक को छोड़ बाकी सभी वित्तिय नियामकों को मिलाकर एक नियामक बनाने की वकालत की. ध्यान रहे कि वित्तीय बाजार में अभी तक पांच नियामक, भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी, एफएमसी, इरडा (बीमा बाजार के लिए) और पीएफआरडीए (पेंशन बाजार के लिए) है और यह सभी वित्त मंत्रालय के अधीन है. सोमवार से यह संख्या घटकर चार रह जाएगी.

 

विलय की पहली औपचारिक घोषणा इस वर्ष बजट में हुई जब वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा: “मैं वायदा बाजार आयोग को सेबी में विलय करने का भी प्रस्ताव करता हूं ताकि वस्तु वायदा बाजारों का विनियमन मजबूत किया जा सकें और अंधाधुंध सट्टेबाजी कम की जा सके.” विलय के लिए कानून में जरूरी फेरबदल किया जा चुका है.

 

वैसे तो जिंसों के वायदा बाजार के लिए राष्ट्रीय स्तर के छह एक्सचेंज, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज यानी एनसीडीईएक्स, नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एनएमसीई, इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज यानी आईसीईएक्स, एश डेरिवेटिव्स एंड कमोटिडी एक्सचेंज यानी एश और यूनिवर्सल कमोडिटी एक्सचेंज यानी यूसीएक्स हैं. इन सभी पर 113 जिसों में वायदा सौद किए जा सकते हैं जिसमें सोना से लेकर कच्चे तेल और गेहू से लेकर आलू (अभी कारोबार स्थगित) तक शामिल है. इसके अलावा जिंस विशेष के लिए 11 क्षेत्रीय एक्सचेंज भी हैं. लेकिन वास्तव में इस समय सिर्फ तीन राष्ट्रीय एक्सचेंज यानी एमसीएक्स, एनसीडीईएक्स और एनएमसीई और क्षेत्रीय स्तर के छह पर ही कारोबार हो रहा है.

 

कारोबार की बात करें तो इस कारोबारी साल में 1 अप्रैल से 15 सितम्बर के बीच 31.77 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का कारोबार हुआ. यह बीते वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले करीब 18 फीसदी ज्यादा है.

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