देश की विकास दर में भारी गिरावट, अप्रैल-जून तिमाही में 5.7 फीसदी रही

अप्रैल से जून यानी चालू कारोबारी साल (2017-18) की पहली तिमाही के दौरान आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी रही जबकि बीते साल की समान अवधि में ये दर 7.9 फीसदी थी. बीते कारोबारी साल की चौथी तिमाही के दौरान विकास दर 6.1 फीसदी थी. विकास दर का ताजा स्तर पिछले तीन सालों में सबसे कम है.

GDP slips to 5.7 percent in April-June quarter as compare to last year

नई दिल्लीः वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी की पूर्व संध्या पर आर्थिक विकास का पहिया पटरी से उतर गया. कम से कम केंद्रीय सांख्यिकी संगठन यानी सीएसओ के ताजा आंकड़े तो यही बताते है.

अप्रैल से जून यानी चालू कारोबारी साल (2017-18) की पहली तिमाही के दौरान आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी रही जबकि बीते साल की समान अवधि में ये दर 7.9 फीसदी थी. बीते कारोबारी साल (2016-17) की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान विकास दर 6.1 फीसदी थी. विकास दर का ताजा स्तर पिछले तीन सालों में सबसे कम है.

आर्थिक विकास दर में गिरावट के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार मैन्युफैक्चरिंग यानी विनिर्माण क्षेत्र रहा जहां विकास दर घटकर 1.2 फीसदी पर आ गयी जबकि बीते साल की समान अवधि में ये दर 10.7 फीसदी थी. मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में गिरावट की एक वजह जीएसटी की तैयारियां रही है. खुद सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव और देश के मुख्य सांख्यविद टी सी ए अनंत ने माना की नयी कर व्यवस्था लागू होने के पहले कारोबारियों ने स्टॉक रखना कम शुरु कर दिया. तकनीकी भाषा में इसे ‘डी-स्टॉकिंग’ कहते हैं. इसकी वजह नयी कर व्यवस्था पर अमल को लेकर आशंकाएं थी. ध्यान रहे कि जीएसटी पहली जुलाई से लागू हुआ जबकि यहां पर विकास दर की बात जुलाई से ठीक पहले के तीन महीनों की हो रही है.

जब कारोबारी स्टॉक कम रखेंगे तो कंपनियां माल कम बनाएंगी. इससे फैक्ट्री की रफ्तार कम होगी और अंत में असर पूरे औद्योगिक विकास दर पर पड़ेगी. ताजा माहौल में यही हुआ. ज्यादा परेशानी की बात ये है कि मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार धीमी पड़ती है तो उससे रोजगार के मौकों में भी कमी आती है. जाहिर है कि बीते कुछ समय से रोजगार के मौकों में आ रही कमी के आरोपों को विकास दर के ताजा आंकड़ों से बल मिला है.

फिलहाल, अनंत ने विकास दर में गिरावट को नोटबंदी से जोड़ने की बात को गलत बताया है. अनंत की राय है कि नोटबंदी के पहले से ही विकास दर में गिरावट का सिलसिला बीते कारोबारी साल शुरु हो गया था. हालांकि जानकारों का कहना है कि नोटबंदी की वजह से असंगठित ही नहीं, संगठित क्षेत्रो के कामकाज पर असर पडा, फैक्ट्रियों में तालाबंदी हुई जिसकी वजह से मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार धीमी पड़ी.

अब अनुमान है कि पहली अक्टूबर से शुरु होने वाली दूसरी छमाही (अक्टूबर,2017-मार्च 2018) के बीच हालात बेहतर होंगे. इसकी एक वजह जहां समान्य मानसून है जिससे ग्रामीण इलाको में मांग बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर जीएसटी काफी हद तक स्थिर हो चुका होगा जिसका फायदा उद्योग को मिलेगा. ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि 2017-18 में विकास दर सात फीसदी के करीब या उससे कुछ कम रहेगी. 2016-17 में विकास दर 7.1 फीसदी दर्ज की गयी थी जबकि 2015-16 में 7.6 फीसदी.

विकास दर में बड़ी गिरावटः अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी गिरकर 5.7% हुई

खुशखबरीः आधार को पैन से लिंक करने की मियाद 4 महीने बढ़ाई गई

बाजार में दिखी बढ़तः सेंसेक्स 84 अंक ऊपर 31,730 पर, निफ्टी 9917 पर बंद

सरकार रिजर्व बैंक से ज्यादा पैसे लेने की जुगत में जुटी

Business News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: GDP slips to 5.7 percent in April-June quarter as compare to last year
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017