GST: नए और पुराने बिल की क्या हैं खास बातें?

By: | Last Updated: Wednesday, 6 May 2015 1:49 PM

नई दिल्ली: देश भर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू करने के लिए पहली बार विधेयक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने 2011 में पेश किया था, जो अब बेकार हो गया है. उस पुराने विधेयक और बुधवार को लोकसभा में पारित नए विधेयक के बीच प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:

– 2011 में पेश किए गए पहले विधेयक में एक सर्वव्यापी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई का प्रावधान नहीं किया गया था. वर्तमान विधेयक में राज्यों को पांच साल तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है.

 

– संशोधित विधेयक में पांच साल तक एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाने का प्रावधान है. इसका उपयोग उस राज्य को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए होगा, जहां किसी वस्तु का उत्पादन होता है. मूल विधेयक में इसकी व्यवस्था नहीं थी.

 

– मूल विधेयक के प्रभाव क्षेत्र से पेट्रोलियम उत्पादों और शराब को बाहर रखा गया था, जबकि संशोधित विधेयक में पेट्रोलियम उत्पादों और शराब के साथ-साथ तंबाकू को भी प्रभाव क्षेत्र से बाहर रखा गया है.

 

– मूल विधेयक में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में गठित होने वाले जीएसटी परिषद की गणपूर्ति के लिए एक-तिहाई अनुपात रखा गया था, इस अनुपात को संशोधित विधेयक में बढ़ाकर सदस्यों का आधा कर दिया गया है.

 

– परिषद की बैठक में मतदान के विषय में संशोधित विधेयक में कहा गया है कि एक-चौथाई सदस्यों के समर्थन से भी फैसले हो सकते हैं, जबकि मूल विधेयक में आम सहमति से फैसला लिए जाने की व्यवस्था थी.

 

– मूल विधेयक में विवाद निपटारे के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने का प्रावधान था. संशोधित विधेयक में इस प्रावधान को हटा दिया गया है और विवाद निपटारा का काम परिषद के हवाले कर दिया गया है.

 

– मूल विधेयक को संविधान के 115वें संशोधन के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जबकि संशोधित विधेयक को संविधान के 122वें संशोधन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

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Web Title: GST BILL
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