औद्योगिक विकास दर दो सालों के निचले स्तर पर

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून के महीने में औद्योगिक विकास दर (-)0.1 फीसदी रही. मई के महीने में ये दर 2.8 फीसदी थी जबकि बीते साल जून के महीन में ये दर 8 फीसदी दर्ज की गयी थी. उद्योग की विकास दर शून्य से नीचे जाने की एक बड़ी वजह विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट रही.

IIP slips 2 years low level, big setback for Industrial Index of Production

नई दिल्लीः औद्योगिक विकास का पहिया थम सा गया है, क्योंकि जून के महीने में औद्योगिक विकास दर 2 सालो के सबसे निचले स्तर पर आ गयी है. उद्योग की ये हालत से ब्याज दरों में और कटौती का दवाब बढ़ गया है. आर्थिक समीक्षा के दूसरे भाग ने भी ब्याज दर घटाने की पूरजोर वकालत की है.

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून के महीने में औद्योगिक विकास दर (-)0.1 फीसदी रही. मई के महीने में ये दर 2.8 फीसदी थी जबकि बीते साल जून के महीन में ये दर 8 फीसदी दर्ज की गयी थी. उद्योग की विकास दर शून्य से नीचे जाने की एक बड़ी वजह विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट रही. इस क्षेत्र की विकास दर (-)0.4 फीसदी रही जबकि मई में ये दर 2.61 फीसदी दर्ज की गयी थी. बीते साल जून में विनिमार्ण क्षेत्र की विकास दर साढ़े सात फीसदी थी.

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वैसे परेशानी भारी मशीनो और कार, टीवी फ्रिज जैसे टिकाऊ उपभोक्ता सामान के मामले में भी देखने को मिली. भारी मशीनों के मामले में औद्योगिक विकास दर (-)6.8 फीसदी दर्ज की गयी. भारी उद्योग की विकास दर में गिरावट का मतलब ये हुआ कि कंपनियां नये कल-कारखाने नहीं लगा रही हैं या फिर पुरानी मशीनों को हटाकर नयी मशीनें नहीं ला रही है. कारोबार नहीं फैलाने की एक वजह मांग में कमी हो सकती है. इसका सबूत टिकाऊ उपभोक्ता सामान के मामले में देखने को मिला जहां विकास दर (-)2.1 फीसदी रहा.

औद्योगिक विकास दर में कमी की वैसे तो कई वजहें है, लेकिन उनमें सें एक वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी भी है. पहली जुलाई से जीएसटी लागू होने के पहले डीलर्स ने नया स्टॉक नहीं तैयार करना उचित समझा. वहीं बीते साल इन महीनो के दौरान औद्योगिक विकास दर काफी ऊंची रही थी. इन सब का असर ये हुआ है कि इस साल जून के महीने में औद्योगिक विकास दर बढ़ने के बजाए घट गयी.

अब सवाल ये है कि आगे क्या होगा? जानी मानी रिसर्च एजेंसी इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिती नायर कहती हैं कि जुलाई के महीने में विकास दर, बीते साल के 5.2 फीसदी की विकास दर का पीछा करते नजर आएगी. इसकी वजहें ये है कि जीएसटी लागू होने के बाद नए सिरे से स्टॉक तैयार करना शुरु हो गया है. गाड़ियों का उत्पादन बढ़ रहा है और बिजली का उत्पादन बढ़ रहा है.

खुदरा महंगाई दर के आंकड़े सोमवार को
बहरहाल, अब सबकी नजर सोमवार को जारी होने वाले खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों पर है. जून के महीने के लिए खुदरा महंगाई दर 1.54 फीसदी रही. ध्यान रहे कि सरकार और रिजर्व बैंक के बीच हुए समझौते के मुताबिक खुदरा महंगाई दर दो से छङ फीसदी (4% +2%) बीच रखने का लक्ष्य है. मतलब ये कि जून के महीने में खुदरा महंगाई दर लक्ष्य से भी नीचे आ गया. इसीके बाद रिजर्व बैंक गवर्नर की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में चौथाई फीसदी की कमी की. अब उम्मीद की जा रही है कि जुलाई में खुदरा महंगाई दर में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, फिर भी ये दो फीसदी से नीचे ही रहेगी.

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