वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें नंबर पर, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश से भी पीछे

भारत में भूख एक ‘‘गंभीर’’ समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर है.

INDIA at 100th place in world hunger index, a serious problem to country

नई दिल्ली: विश्व की महाशक्ति बनने का सपना देखने वाले भारत के लोग खाने जैसी बेसिक नेसेसिटी (बुनियादी जरूरत) से महरूम हैं ये एक बड़ी विडंबना ही कही जा सकती है. देश डिजिटल क्रांति के जरिए वर्ल्ड लीडर के तौर पर बढ़ता दिख रहा है और आने वाले सालों में सबको घर, सबको बिजली जैसे ‘न्यू इंडिया’ की उम्मीदें लगाए बैठा है, लेकिन दुनिया के सारे देशों में से जहां के लोग अपने पेट भरने की रोज की जरूरत को भी पूरा नहीं कर पाते ऐसे देशों में से सिर्फ 19 देशों से आगे है

वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर-
इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) के मुताबिक, भारत में भूख एक ‘‘गंभीर’’ समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर है. भारत उत्तर कोरिया और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे है लेकिन पाकिस्तान से आगे हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों में कुपोषण (मेल न्यूट्रीशन) की उच्च दर से देश में भूख का स्तर इतना गंभीर है कि पिछले साल भारत इस इंडेक्स में 97वें स्थान पर था और अब 100वें स्थान पर है. यानी इस साल वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में भारत और 3 स्थान पीछे चला गया है.

आईएफपीआरआई ने एक बयान में कहा, ‘‘119 देशों में भारत 100वें स्थान पर है और समूचे एशिया में सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान उससे पीछे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘31.4 के साथ भारत का 2017 का जीएचआई (वैश्विक भूख सूचकांक) अंक ऊंचाई की तरह है और ‘गंभीर’ श्रेणी में है.

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नेपाल, म्यामांर, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी पीछे भारत-
यह उन मुख्य कारकों में से एक है जिसकी वजह से दक्षिण एशिया इस साल जीएचआई में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में से एक है.’’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चीन (29), नेपाल (72), म्यामांर (77), श्रीलंका (84) और बांग्लादेश (88) से भी पीछे है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्रमश: 106वें और 107वें स्थान पर हैं.

राजनीतिक और सामाजिक दोनों लेवल पर जरूरत है सुधार की-
जाहिर तौर पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर इसे सुधारने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत है. हाल ही में फोर्ब्स की सबसे धनवान भारतीयों की लिस्ट में दिखा था कि देश के सबसे धनवानों की संपत्ति में पिछले साल के मुकाबले काफी इजाफा हो चुका है. वहीं कल ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत के और नीचे खिसकने से यही आकलन किया जा सकता है कि अमीर और अमीर हो रहे हैं और गरीब और गरीब और गरीब हो रहे हैं.

देश के टॉप 100 धनी व्यक्तियों की संपत्ति में 26 फीसदी का इजाफा हुआ है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी लगातार 10वें साल भारत के सबसे अमीर व्यक्ति रहे और उनकी प्रॉपर्टी बढ़कर 38 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच गई है. अमीरों की संपत्ति का आकलन करने वाली पत्रिका फोर्ब्स की वार्षिक सूची ‘इंडिया रिच लिस्ट 2017’ में यह जानकारी दी गयी थी.

क्या है ग्लोबल हंगर इंडेक्स?
दुनिया के देशों में लोगों को खाने की चीज़ें कैसी और कितनी मिलती हैं?, ग्लोबल हंगर इंडेक्स इसे दिखाने का माध्यम है. हर साल नए आंकड़ों, नए डेटा कलेक्शन के आधार पर ही ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ की लिस्ट निकाली जाती है. इस इंडेक्स में दिखाया जाता है कि दुनिया भर में भूख के खिलाफ चल रही देशों की लड़ाई में कौनसा देश कितना सफल और कितना असफल रहा है.

साल 2006 में सबसे पहले वेल्ट हंगरलाइफ नाम के जर्मनी के स्वयंसेवी ऑर्गेनाइजेशन ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी किया था, इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के तहत ये काम किया जाता है.

सरकारों, संगठनों को करने होंगे मैराथन प्रयास-
इसे सुधारने के लिए सभी राज्यों, सरकारों और सामाजिक संगठनों को मैराथन प्रयास करने होंगे वर्ना ‘इंडिया’ और ‘भारत’ के बीच की खाई को पाटना लगभग-लगभग असंभव हो जाएगा और अमीर-गरीब (वंचितों) के बीच बढ़ते फासले को मिटाने का सरकार का सपना, सपना ही रह जाएगा. एक न्यूक्लियर सुपरपावर देश की बड़ी जनसंख्या खाने जैसी फंडामेंटल जरूरत और हक से भी महरूम हैं जो बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति कही जा सकती है.

नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.

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Web Title: INDIA at 100th place in world hunger index, a serious problem to country
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