भारत की आर्थिक वृद्धि 2016 तक 6.3 प्रतिशत पर पहुंच सकती है: यूएन

By: | Last Updated: Thursday, 11 December 2014 9:34 AM

संयुक्तराष्ट्र: संयुक्तराष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थिक वृद्धि 2016 तक बढ़कर 6.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है और यह दक्षिण एशिया में आर्थिक स्थिति में सुधार में प्रमुख भूमिका निभाएगा. कल जारी रिपोर्ट ‘संयुक्तराष्ट्र वैश्विक आर्थिक स्थिति और अनुमान’ 2015 (वेस्प रिपोर्ट) में कहा गया है कि भारत आर्थिक नीति में सुधार लागू करने और कारोबार और उपभोक्ता विश्वास को समर्थन प्रदान करने की दिशा में प्रगति कर सकता है.

 

इसमें अनुमान लगाया गया है कि वैकश्विक आर्थिक संकट के प्रभावों का असर अभी बने रहने और यूक्रेन और इबोला जैसे नये संकटों के बावजूद वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेजी का सिलसिला दो साल से अधिक समय तक बना रहेगा. वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2015 में 3.1 प्रतिशत और 2016 में 3.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. 2014 में यह 2.6 प्रतिशत रह सकती है.

 

रिपोर्ट में कहा गया कि 2014 में भारत की वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है कि जो अगले साल बढ़कर 5.9 प्रतिशत और 2016 में 6.3 प्रतिशत रहेगी. दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि में भी धीरे-धीरे तेजी आने की उम्मीद है जो 2014 में 4.9 प्रतिशत, 2015 में 5.4 प्रतिशत और 2016 में 5.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में, ‘‘सुधार का नेतृत्व भारत करेगा जिसका क्षेत्रीय उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत योगदान है जबकि बांग्लादेश और ईरान जैसी अर्थव्यवस्थाओं में भी अनुमान की अवधि के दौरान अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है.’’

 

भारत के लिए 2016 में करीब छह प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया गया है जो 2008-2011 की अवधि के बाद वृद्धि का उच्चतम स्तर है जबकि वृद्धि दर करीब 7.3 प्रतिशत थी. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई.

 

रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में चीन समेत पूर्वी एशिया ने तुलनात्मक रूप से मजबूत वृद्धि दर्ज की है जबकि भारत के नेतृत्व में दक्षिण एशिया की वृद्धि मध्यम दर्जे की रही है. विकासशील देशों के समूह की वृद्धि दर 2015 में 4.8 प्रतिशत और 2016 में 5.1 प्रतिशत रहेगी जो 2014 के लिए अनुमानित 4.3 प्रतिशत अनुमानित है.

 

रिपोर्ट में कहा गया कि जोरदार बाहरी मांग के साथ-साथ घरेलू खपत में मजबूती और निवेश से वृद्धि को मदद मिलेगी क्योंकि इन देशों को को वृहत्-आर्थिक हालात में सुधार से फायदा होगा.

 

इसमें कहा गया, ‘‘कई देश विशेष तौर पर भारत आर्थिक नीति में सुधार लागू कर प्रगति कर सकते हैं जिससे कारोबार और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा मिलेगा.’’ इस रिपोर्ट में हालांकि दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय जोखिम के प्रति भी आगाह किया गया है. इन जोखिमों में नरमी और देश विशेष की कमजोरी के साथ साथ राजनीतिक अस्थिरता तथा कृषि की मानसून पर निर्भरता शामिल है.

 

समीक्षाधीन अवधि में विकासशील देशों की औसत मुद्रास्फीति में भी धीरे-धीरे गिरावट होगी. समीक्षाधीन अवधि में पूर्वी एशिया में मंहगाई दर 2-3 प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर रहेगी लेकिन दक्षिण एशिया में भारत और ईरान समेत सभी देशों में मंहगाई दर घटने का अनुमान है.

 

दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय औसत मुद्रास्फीति 2016 में बढ़कर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2013 में 14.7 प्रतिशत थी. भारत के अलावा ब्राजील, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की समेत सभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 2015 और 2016 के दौरान वृद्धि में थोड़े सुधार की अनुमान है.

 

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 2015 और 2016 के दौरान सुधार की उम्मीद है. इस दौरान वहां सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में क्रमश: 2.8 और 3.1 प्रतिशत के विस्तार की उम्मीद है. पश्चिमी यूरोप में आर्थिक वृद्धि में सुधार का अनुमान है जो 2015 में 1.7 प्रतिशत और 2016 में दो प्रतिशत रहने का अनुमान है.

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