शेयर बाजार में पंख फैलाने को तैयार इंडिगो

By: | Last Updated: Wednesday, 21 October 2015 12:21 PM

नई दिल्ली: बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो शेयर बाजार के दरवाजें पर खड़ी है. 10 रुपये की मूल कीमत वाले शेयर के लिए निवेशक 27 अक्टूबर से 29 अक्टूबर के बीच बोली लगा सकते है. कंपनी ने बोली लगाने के लिए निचली कीमत 700 रुपये और ऊपरी कीमत 765 रुपये रखी गयी है.

 

इस हिसाब से एक छोटा निवेशक निचली कीमत पर ज्यादा से ज्यादा 285 शेयर और ऊपरी कीमत पर ज्यादा से ज्यादा 261 शेयरों के लिए बोली लगा सकता है. ध्यान रहे कि एक छोटा या खुदरा निवेशक वो है जो ज्यादा पब्लिक इश्यू में ज्यादा से ज्यादा दो लाख रुपये तक की कीमत के लिए शेयरों के लिए आवेदन कर सकता है.

 

पब्लिक इश्यू मे बेचे जाने वाले शेयरों में कम से कम 35 फीसदी ऐसे निवेशकों के लिए सुरक्षित रखा जाता है कारोबारी साल 2008-09 से लगातार मुनाफे में चल रही इंडिगो शेयर बाजार में जेट एयरवेज और स्पाइस जेट के बाद आने वाली तीसरी कम्नपी है. हालांकि जेट एयरवेज और स्पाइस जेट में निवेशको को ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ, ऐसे में इंडिगो क्या उनकी निराशा दूर करेगी?

 

इस सवाल के जवाब में इंडिगो के अध्यक्ष आदित्य घोष कहते हैं कि कंपनी का काम काज शुरु से ही बेहतर रहा है और आगे भी उम्मीद कुछ ऐसी ही उम्मीद है. और यह सब बाजार की संभावनाओं को समय से पूर्व भांपने, उस हिसाब से रणनीति बनाने और उन पर अमल करने से सम्भव है. ऐसे में निवेशकों के लिए एक बेहतर विकल्प मौजूद है. इंडिगो ने घरेलू विमानन बाजार में पंख फैलाने के पहले ही 2005 में एक बार में सौ एयरबस ए 320 किस्म के विमानों का ऑडर्र देकर सनसनी मचा दी. लेकिन बात यही खत्म नहीं हुई. 2011 में 180 और फिर इस वर्ष 250 विमानों का ऑडर्र को अंतिम रूप दे दिया गया.

 

इनमें से ज्यादा एयरबस ए 320 निओ किस्म के विमान है जिसमें 10 फीसदी कम इंधन की खपत होती है. कंपनी एक तरफ जहां बड़ा बड़ा ऑडर्र देकर बड़ा डिस्काउंट पाने में कामयाब होती है, वहीं दूसरी ओर वह डिलिवरी लेने के बाद विमानों को बेच देती है और फिर उन्हे पट्टे पर ले लेती है. बाजार कीमत पर बेचने से भी मुनाफा होता है जिससे पट्टे के किराये के एक हिस्से को चुकाने में सहूलियत होती है.

 

तकनीकी भाषा में इस मॉडल को सेल एंड लीज बैक कहते हैं और इंडिगो इसे शुरु करने वाली देश में पहली एयरलाइन थी. इंडिगो को इस व्यवस्था से काफी फायदा हुआ और आज देश के कई एय़रलाइन इस मॉडल को अपना रहे हैं. इस समय कंपनी ने 430 विमान का ऑडर्र दे रखा है और इसकी डिलिवरी इस साल के अंत से लेकर 2026 तक चलेगी. आज की तारीख में कंपनी के बेड़े में 97 विमान है और उसका अनुमान है कि बेड़े में विमानों की अधिकत्त्म संख्या 330 तक हो सकती है. कंपनी नए विमान बेचने के बाद छह साल के लिए पट्टे पर लेती है. यानी छह साल बाद उसे हटा कर नया विमान लाया जाता है.

 

इसके कई फायदे हैं. पहला तो यह कि बेड़े में विमान की औसत उम्र काफी कम होती है. आज की तारीख में इंडिगो के विमानों की औसत उम्र तीन वर्ष से कुछ ज्यादा ही है. दूसरी बात ये कि नए विमान की वजह से ईधन की खपत कम होती है. तीसरी बात ये कि विमान के नए होने की वजह से रखरखाव का खर्च कम होता है. साथ ही वारंटी पीरियड का भी फायदा मिलता है. इन सब के अलावा लागत घटाने के लिए कंपनी का जोर कुछ बातों जैसे बेड़े में सिर्फ एक किस्म का विमान और हर तरह के अनावश्यक खर्चों को कम करना है.

 

 अब देखिए 180 सीटों वाले विमान के लिए सरकारी नियम कम से कम से कम चार एय़र होस्टेस या फ्लाइट पर्सर रखने की बात कहता है. दूसरी एय़रलाइन छह तक रखते हैं जबकि इंडिगो के विमान में ये संख्या चार से ज्यादा नहीं होती. इसी तरह खाने पीने के लिए दो ही सर्विस ट्रे रखी जाती है. एक अतिरिक्त क्रू मेंबर या ट्रे का मतलब अतिरिक्त यात्री का भार जिससे इंधन की खपत पर असर प़ड़ेगा.

 

ये भले ही छोटी-छोटी बाते हों, लेकिन औसतन दिन भर में एक विमान अगर 6-7 उड़ान भरे और बेड़े में 97 विमान हो तो अंदाजा लगा सकते हैं कि उड़ान की लागत पर किस तरह से असर पड़ेगा. इन्ही सब की बदौलत लागत में कमी सम्भव हो पाती है.  देश में विमानन कम्पनियों की सबसे बड़ी परेशानी महंगा हवाई इंधन है.

 

दूसरे देशों में जहां इंधऩ की हवाई विमान चलाने की कुल लागत में 30 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं होती, वहीं यहां ये 50 फीसदी तक पहुंच जाती है. अब राज्य सरकारें सेल्स टैक्स जब कम करेंगी, तब फायदे का आकलन होगा, लेकिन आदित्य को लगता है कि नए विमानों के जरिए वो इंधन पर खर्च में कमी करने में कामयाब हो जांएंगे.

 

वो कहते हैं कि एयरबस ए 320 निओ में 10 फीसदी कम इंधन की खपत से कुल लागत में 4-4.5 फीसदी तक की कमी कर सकेंगे. इसका फायदा वो हवाई किराये में कमी कर यात्रियों को देने का भरोसा दे रहे हैं.

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Web Title: indigo to enter in share market
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