लगातार पांचवे महीने बढ़ी महंगाई दर, उद्योग पर लगा ब्रेक

Industrial output falls, retail inflation inches up

नई दिल्ली: मंगलवार को आर्थिक मोर्चे पर अमगंल ही हुआ. खुदरा महंगाई दर लगातार पांचवे महीने बढ़ गयी, वहीं उद्योग का पहिया तो पीछे ही घूम गया. ऐसे में रिजर्व बैंक के सामने नीतिगत ब्याज दर में बदलाव को लेकर भारी दुविधा है.

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि कि दिसंबर के महीने में खुदरा महंगाई दर 5.61 फीसदी पर पहुंच गयी, जबकि नवंबर के महीने में ये 5.41 फीसदी थी. इस बढ़ोतरी में अहम हिस्सेदारी खाने-पीने के सामान की रही जिनकी महंगाई दर दिसंबर में 6.4 फीसदी पर पहुंची जो नौ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. गौरतलब है कि पूरी महंगाई दर में खाने-पीने के सामान की हिस्सेदारी 46 फीसदी होती है.

खाने-पीने की महंगाई दर बढ़ाने में दालें आगे रहीं. अरहर की दाल पहले से ही महंगी है, अब उड़द में भी खासी तेजी देखने को मिल रही है. खाने-पीने के बाकी सामान में उछाल का सिलसिला बना हुआ है. नतीजा खाद्य महंगाई दर तो बढ़ी ही, पूरे खुदरा महंगाई दर पर असर पड़ा.

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देंवेंद्र पंत कहते हैं कि खुदरा मंहगाई दर भले ही लगातार बढ़ रही हो, लेकिन अभी भी ये रिजर्व बैंक के ‘कम्फर्ट जोन’ में है. आगे वो कहते हैं कि बजट के पहले रिजर्व बैंक की ओर मौद्रिक नीति में किसी तरह के फेरबदल के आसार नहीं. ध्यान रहे कि सरकार और रिजर्व बैंक के साथ हुए समझौते के मुताबिक जनवरी तक खुदरा महंगाई दर को छह फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य है.

उद्योग
दूसरी ओर अक्टूबर में फर्राटा भरने के बाद नवम्बर में उद्योग सुस्ती की गिरफ्त में आ गया. सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उद्योग की विकास दर नवम्बर के महीने में (-) 3.2 फीसदी रही. गौरतलब है कि 13 महीने के बाद उद्योग की विकास दर निगेटिव हुई है.

आम तौर पर अक्टूबर के महीने में त्यौहारी मांग के चलते उद्योग में खासी तेजी आती है. 2015 के अक्टूबर में भी यही हुआ जब उद्योग की विकास दर 9.8 फीसदी पर पहुंची थी. लेकिन इस मांग के खत्म होने और मानसून की बिगड़ी चाल की वजह से नयी ग्रामीण मांग नहीं आने से मैन्युफैक्चरिंग का पहिया थम गया और यहां विकास दर (-) 4.4 फीसदी रही.

पंत कहते हैं कि कुछ क्षेत्र जैसे उपभोक्ता टिकाऊ सामान के मामले में सुधार देखने को मिल रहा है, फिर भी पूरे उद्योग में सुधार असामान है. साथ ही निवेश का माहौल सुधरने में समय लगेगा.

रिजर्व बैंक की दुविधा
खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी से जहां रिजर्व बैंक पर नीतिगत ब्याज दर नहीं घटाने का दवाब है, वहीं उद्योग की परेशानी दूर करने का एक रास्ता ब्याज दर में कमी है. अब देखना होगा कि आऱबीआई गवर्नर रघुराम राजन 2 फरवरी को विकास को तवज्जो देते हैं या फिर महंगाई दर को.

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