बीमा क्षेत्र में सुधारों के लिये पूरी तरह से प्रतिबद्ध है सरकार: अरूण जेटली

By: | Last Updated: Saturday, 20 December 2014 10:28 AM
Insurance Bill-Arun Jaitley

नई दिल्ली: लोकसभा में जीएसटी विधेयक पेश करने के एक दिन बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आज कहा कि सरकार बीमा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसमें राजनीतिक अवरोध को आड़े नहीं आने दिया जायेगा.

 

उद्योग मंडल फिक्की की 87वीं वाषिर्क आम बैठक को संबोधित करते हुये जेटली ने कहा, ‘‘सरकार इन (बीमा क्षेत्र) सुधारों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस तरह के सुधारों को रोकने अथवा इनमें देरी के लिये संसद की कार्यवाही बाधित करने की नति को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.’’ तृणमूल कांग्रेस का नाम लिये बिना जेटली ने कहा, राजनीतिक दल जिसके सदस्य कथित तौर पर चिट फंड घोटाले में शामिल रहे हैं, वह राज्यसभा, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बहुमत में नहीं है, के कामकाज में बाधा खड़ी कर ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहा है.

 

वित्त मंत्री ने खेद जताते हुये कहा कि बीमा विधेयक को संसद की स्थायी समिति और राज्यसभा की प्रवर समिति मंजूरी दे चुकी है लेकिन ‘‘संसद के एजेंडा में यह विधेयक नहीं आ पाये इसके लिये राजनीतिक गतिरोध की नति अपनाई जा रही है.’’ बीमा संशोधन विधेयक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है.

 

जेटली ने कहा के इस तरह का व्यवहार ऐसे सुधारों को नहीं रोक सकता है जिन्हें भारी समर्थन प्राप्त है. उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के राजनीतिक अवरोध की नीति को प्रभावी ढंग से हराने के लिये कई तरह के सुरक्षा उपाय और संवैधानिक प्रणाली मौजूद हैं.’’ वित्त मंत्री ने कहा कि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, इन चुनावों के साथ ही राज्यसभा में सदस्यों की गतिरोध खड़ा करने की क्षमता भी कम होती जायेगी.

 

उन्होंने कहा कि कोयला विधेयक एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक है जो कि राजनीतिक अड़गेबाजी की वजह से राज्यसभा में अटका पड़ा है. यह विधेयक ऐसा है जिसे लोकसभा ने एकमत से पारित किया है. सभी आशंकाओं को दूर किया गया है, लेकिन उच्च सदन में इस विधेयक को एजेंडा में नहीं आने दिया जा रहा है.

 

लंबी प्रतीक्षा के बाद वित्त मंत्री ने कल लोकसभा में वस्तु एवं सेवाकर :जीएसटी: को पेश कर दिया. इस विधेयक के पारित होने पर देश में वस्तुओं और सेवाओं के मामले में एक कर की व्यवस्था शुरू हो जायेगी. यह व्यवस्था अप्रैल 2016 से अमल में आने की उम्मीद है.

 

जेटली ने कहा कोयला क्षेत्र एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार है जिसे नई सरकार आगे बढ़ा रही है, लेकिन यह भी राजनीतिक गतिरोध की नति की वजह से रका पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘‘केवल एक उद्देश्य लगता है कि इन विधेयकों को चर्चा के लिये नहीं आने दिया जाये .. और इस राजनीतिक गतिरोध की वजह है कि एक राजनीतिक दल को पता चलता है कि उसके सदस्य कुछ ऐसे मामले में लिप्त पाये गये हैं जो कि अनैतिक है और इसीलिये इससे ध्यान बंटाने के लिये गतिरोध को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.’’ जेटली ने वामदलों को भी आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि राज्यसभा ही उनका अब आखिरी गढ़ रह गया है.

 

धर्मांतरण मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बने रहने की वजह से पिछले कुछ दिनों से राज्यसभा में कामकाज नहीं हो पा रहा है. विपक्ष इस मामले में प्रधानमंत्री से जवाब चाहता है जबकि सरकार को यह मंजूर नहीं है.

 

वित्त मंत्री अगले साल फरवरी में अपना पहला पूर्ण बजट पेश करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि 9 से 10 प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि की राह पर पहुंचने के लिये देश को साझा राष्ट्रीय दृष्टि की आवश्यकता है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सामने जो विकल्प हैं उनमें या तो हम सुधारों पर आगे बढ़ें अन्यथा एक बार फिर पीछे छूट जायें. नई सरकार एक बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है कि जो रास्ता हमने अपनाया है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा और यही वजह है कि हमारे रास्ते में आने वाले कई चुनौतियों के बावजूद हम अपनी आगे बढ़ने की दिशा को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं.’

 

कराधान के बारे में जेटली ने कहा कि नई सरकार ने पिछली तिथि से कर लगाने के डर को पूरी तरह समाप्त कर दिया है. इस तरह के कर से देश का नाम खराब हुआ है.

 

जेटली ने कहा, ‘‘दुनिया का काफी बड़ा हिस्सा आर्थिक सुस्ती से जूझ रहा है, ऐसे में निवेशक भारत में आने के बारे में सोच रहे हैं. अभी कई क्षेत्र हैं जिनमें हमें सुधारों को आगे बढ़ाना है. इसलिये अगले एक दशक के लिये हमारे सामने काफी काम पड़ा है.’’ वित्त मंत्री ने आगे कहा कि देश उच्च आर्थिक वृद्धि की दिशा में प्रयासरत है ऐसे में अगला वित्त वर्ष भी काफी चुनौतीपूर्ण होगा.

 

उन्होंने कहा, ‘‘यह साल होगा, जब हमें पहले 6 प्रतिशत वृद्धि के आंकड़े को पार करना है, राजस्व बढ़ाना है और अपने नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर देना है. उत्साह के इसी परिवेश में, जो कि बन चुका है, और ज्यादा बदलाव किये जाने हैं जो कि हमें दहाई अंक के लक्ष्य की तरफ ले जायेंगे.’’ जेटली ने कहा कि रकी पड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने का काम प्रधानमंत्री ने स्वयं अपने हाथ में लिया है.

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