महाराष्ट्र में आम बजट के दिन तीन किसानों ने की आत्महत्या

By: | Last Updated: Friday, 11 July 2014 11:24 AM

नागपुर: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को संसद में आम बजट प्रस्ततु किया और इसी दिन कर्ज के बोझ तले दबे तीन किसानों ने यहां आत्महत्या कर ली. यह जानकारी शुक्रवार को एक गैर सरकारी संगठन ने दी.

 

पूर्वी महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में बारिश न होने से परेशान होकर किसानों ने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाया.

 

विदर्भ जन आंदोलन समिति (वीजेएएस) के प्रमुख किशोर तिवारी के अनुसार, क्षेत्र में बारिश न होने या कम बारिश से 8,00,000 से ज्यादा किसान परेशान हैं क्योंकि कपास की बुवाई का मौसम चरम पर है.

 

 

तिवारी ने बताया, “उन्होंने जून के प्रारंभ में कर्ज लेकर बीज बोए. लेकिन बारिश के बिना फसल सूख जाने के करण उन्होंने जून के अंत में फिर कर्ज लेकर दोबारा बीज बोए, और फिर बारिश नहीं हुई. जुलाई में बारिश होने की उम्मीद में कुछ किसान तीसरी बार बुवाई करने जा रहे हैं, लेकिन अभी भी आसमान में बादल नहीं हैं.”

 

तिवारी ने बताया कि बारिश न होने के कारण विदर्भ के खेतों में 20 लाख हेक्टेयर खेती में बोए गए कपास और सोयाबीन के बीज बर्बाद हो गए.

 

आत्महत्या करने वाले तीन किसानों में यवतमाल के जयंतराव मिसाल (40) और डी.एन. मोरे (40) तथा भंडारा-गोंदिया के एस.एस. मेश्राम (42) शामिल हैं.

 

तिवारी कहा, “राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का पहला बजट किसानों को खुश करने में असफल रहा है, क्योंकि इसमें कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं किया गया है. अब तो खबरें आ रही हैं कि भारत में बड़ी मात्रा में घटिया कपास का आयात किया जाने वाला है. इससे अगले चार-पांच सालों में खेती की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.”

 

वीजेएएस ने कपास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने, सभी तरह के कृषि कजोर्ं की माफी और बुवाई के मौसम का लाभ लेने के लिए नए ऋण देने मांग की है.

 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नए आंकड़ों के मुताबिक, किसानों की आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र देश में सबसे ऊपर है. 2013 में महाराष्ट्र में 3,146 किसानों ने आत्महत्या की थी.

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Web Title: maharashtra_budgut_3_farmer_suicede
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