ओबामा ने आईएमएफ में भारत की भूमिका बढ़ाने का समर्थन दोहराया

By: | Last Updated: Sunday, 25 January 2015 4:03 PM

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों में भारत की ‘आवाज और मताधिकार’ बढ़ाने के अपने समर्थन को दोहराते हुए इन संस्थानों को मजबूत बनाये जाने की आवश्यकता पर आज सहमति जतायी. ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यहां बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने आईएमएफ समेत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को मजबूत बनाने की अहमियत पर जोर दिया.

 

बयान के अनुसार, ‘‘राष्ट्रपति ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में भारत की आवाज और इसके मताधिकार को बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी और यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि बहुपक्षीय विकास संस्थाओं से बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिये धन मिले और उसका रचानमक तरीके से इस्तेमाल हो.’’ उल्लेखनीय है कि भारत आईएमएफ में अपना मताधिकार बढ़ाने पर जोर देता रहा है ताकि विश्व अर्थव्यवस्था में उसका बढ़ता प्रभाव परिलक्षित हो सके.

 

आईमएफ की कोटा व्यवस्था में प्रस्तावित सुधार को लागू किये जाने के बाद भारत का मताधिकार मौजूदा 2.44 प्रतिशत से बढ़कर 2.75 प्रतिशत हो जाएगा. इसके साथ ही भारत इस संगठन में मताधिकार रखने वाला आठवां सबसे बड़ा देश हो जाएगा. इस समय यह 11वें नंबर पर है.

 

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘रिजोल्यूशन कॉर्पोरेशन’ पर कार्यबल के गठन में भारत के वित्त मंत्रालय को अमेरिका के वित्त विभाग से मिल रहे सहयोग की सराहना की. रिजोल्यूशन कार्पोरेशन कार्यबल का गठन भारत के वित्तीय क्षेत्र में विधायी सुधार के लिये गठित आयोग की सिफारिश पर किया गया है. इसकी भूमिका वित्तीय कंपनियों के दिवालिया होने से पहले उनके बारे में दावों को व्यवस्थित ढंग से सुलझाने की होगी.

 

ओबामा और मोदी इस बात पर सहमत हैं कि द्विपक्षीय सहयोग बने रहने से दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों में रोजगार और समृद्धि बढ़ेगी. दोनों नेता व्यापार, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संपर्कों के मजबूत विकास के जरिये भागीदारी को और व्यापक बनाने पर सहमत हुए. साथ ही वे अन्य देशों के साथ भी संयुक्त त्रिपक्षीय भागीदारी को भी मजबूत बनाने पर सहमत हुए हैं.

 

दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को उच्च स्तर के द्विपक्षीय निवेश समझौते की संभावना के आकलन के लिसे बातचीत आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है.

 

इसके अलावा दोनों देश सामाजिक सुरक्षा समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने पर भी सहमत हुए हैं जो खासकर अमेरिका में काम करने वाले उन लाखों पेशेवरों के लिये महत्वपूर्ण हैं जो वहां सामाजिक सुरक्षा कर चुकाते हैं पर वहा अनुबंध की अवधि कम होने से उसका फायदा नहीं मिल पाता.

 

 

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