ज्यादातर अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर चिंतित : सर्वे

By: | Last Updated: Thursday, 13 November 2014 12:50 PM
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नयी दिल्ली: देश में ई-कामर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है. वहीं ज्यादातर अभिभावक इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके बच्चे लालच में आकर ऑनलाइन शॉपिंग से कुछ गैरजरूरी उत्पाद खरीद सकते हैं. एक सर्वे में यह बात कही गई है.

 

दिलचस्प तथ्य यह है कि आईएनजी वैश्य बैंक के सालाना ‘आईएनजी जिंग’ सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि 84 प्रतिशत अभिभावक खुद ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं.

 

सर्वे में कहा गया है कि जहां ज्यादातर अभिभावक खुद ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, वहीं जब उनके बच्चों द्वारा ऑनलाइन शॉपिंग की बात आती है, तो 55 फीसद विभिन्न वजहों से इसको लेकर चिंतित रहते हैं. इनमें सबसे प्रमुख वजह यह है कि उनका बच्चा लालच में कुछ गैरजरूरी सामान न खरीद ले.

 

सर्वे में यह तथ्य भी सामने आया है कि 49 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को ऑनलाइन शॉपिंग के लिए प्रोत्साहित नहीं करते. वहीं एक-तिहाई अभिभावक ऑनलाइन शॉपिंग में उनकी मदद करते हैं.

 

सर्वे में 80 फीसद अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चे पैसे को लेकर उनकी आदत का ही अनुसरण करते हैं. चिंताजनक पहलू यह है कि बच्चे अभिभावकों की खर्च करने की आदत को बचत करने की आदत से अधिक सीखते हैं.

 

इसमें कहा गया है, ‘‘आमदनी का लेवल बढ़ने पर बच्चे अधिक खर्च करते हैं, वहीं दूसरी ओर अभिभावक अपनी बचत की आदत को बढ़ाते हैं.’’

 

जेबखर्च के बारे में दो-तिहाई अभिभावक 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों को इसे देने के पक्ष में हैं. पिछले साल के सर्वे में 50 फीसद से अधिक अभिभावक बच्चों को पॉकेट मनी देने के पक्ष में नहीं थे.

 

सर्वे के अनुसार औसतन 10 साल से कम की आयु के बच्चों को या तो कोई जेब खर्च नहीं मिलता या 500 रपये से कम की जेब खर्च मिलती है. वहीं 15 से 18 साल के बच्चों को 1,000 रुपये से कम की जेब खर्च मिलता है.

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