धान खरीद में सरकार को 434 करोड़ रुपये का घाटा : सीएजी

By: | Last Updated: Wednesday, 16 July 2014 4:42 PM
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पटना: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने वित्तीय वर्ष 2012-13 की अपनी रिपोर्ट में विभिन्न विभागों में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का उजागर किया है।

खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के बारे में कहा गया है कि धान खरीद मामले में 434 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हुआ है बिहार विधानसभा में सीएजी की पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2़ 14 करोड़ क्विंटल धान के खिलाफ 25़ 58 लाख कस्टम्ड मिलिंग चावल की आपूर्ति की गई।

 इसके कारण सरकार को करीब 433़ 94 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

 

रिपोर्ट में माना गया है कि नियमों का पालन नहीं करने के कारण यह हानि सरकार को उठानी पड़ी है।

 नियमानुसार मिल मालिकों को भारतीय खाद्य निगम को 67 क्विंटल चावल उपलब्ध कराना था जिसके बदले में राज्य सरकार को 100 क्विंटल धान देना था।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामले ऐसे भी आए हैं जिसमें मिल मालिकों को बिना चावल लिए धान दे दिया गया है जिसके कारण हानि हुई।

सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहतास के चेनारी प्रखंड में 1़ 75 करोड़ और कैमूर के कुदरा में 62़ 45 लाख रुपये की धान की अधिप्राप्ति जमीनों की जाली रसीद से की गई है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2008-09 में बिहार में गेहूं की उपलब्धता जहां 98 प्रतिशत थी वह वर्ष 2012-13 में घटकर 35 प्रतिशत हो गई परंतु धान के संबंध में वर्ष 2008 से 2012 में धान की उपलब्धता 100 से 267 प्रतिशत थी।

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