भारतीय मूल के 13 साल के लड़के ने ब्रेल प्रिंटर बनाया, शुरू की अपनी कंपनी

By: | Last Updated: Tuesday, 20 January 2015 4:00 PM
printer for blind

सांता क्लारा: सिलिकल वैली में उद्यमी बनने के लिए छोटी उम्र बाधक नहीं है. जैसा की भारतीय मूल के 13 वर्षीय शबनम बनर्जी ने किया.

 

कैलिफोर्निया में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बनर्जी ने ब्रेल के प्रिंट निकालने के लिए कम लागत की मशीनें विकसित की है. यह नेत्रहीनों के लिए एक टैक्टाइन लिखने की प्रणाली है. प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इन्टेल कार्प ने हाल में इस स्टार्टअप ब्रायगो लैब्स में निवेश किया है.

 

शबनम ने लेगो रोबोटिक्स किट के साथ पिछले साल स्कूल की विज्ञान प्रदर्शनी में ब्रेल प्रिंटर तैयार किया था. उसने अपने अभिभावकों से पूछा था कि नेत्रहीन कैसे पढ़ते हैं. जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह गूगल पर देखे.

 

शबनम ने इसके बाद कुछ ऑनलाइन शोध किया. उसे पता चला कि ब्रेल प्रिंटर जिन्हें एमबासर्स कहा जाता है, वह काफी महंगा है. उसकी लागत 2,000 डॉलर बैठती है.

 

शबनम ऐसा ब्रेल पिंट्रर विकसित करना चाहता है जिसकी लागत 350 डॉलर के आसपास बैठे तथा उसका वजन कुछ ही पौंड हो. मौजूदा माडल नौ किलोग्राम का होता है.

 

इस मशीन का इस्तेमाल ब्रेल के रीडिंग मैटिरियल का प्रिंट निकालने में किया जाता है. इसमें इंक के बजाय रेज्ड डाट का इस्तेमाल होता है. इसे पीसी या इलेट्रानिक उपकरण से निकाला जा सकता है.

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