RBI बाजार का चीयरलीडर नहीं है: राजन

By: | Last Updated: Tuesday, 2 June 2015 1:12 PM

मुंबई: गवर्नर रघुराम राजन ने खरी-खरी सुनाते हुए आज कहा कि आरबीआई प्रशस्ति पाठ करने वाला कोई संगठन नहीं है और हो सकता है कि उन्होंने निवेश बढ़ाने की मंशा से नीतिगत दर में कटौती कर ‘थोड़ी गलती’ कर दी हो क्योंकि जमीनी स्तर पर वृद्धि नहीं हो रही है.

 

राजन ने कहा कि प्रकाशित आंकड़ों में जो संकेत हैं उसके मुकाबले सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर कम रह सकती है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज कर रही है तो उसे नीतिगत दर में कटौती की जरूरत क्यों है. उन्होंने कहा कि वृद्धि दर के उंचे आंकड़े और कंपनियों के लाभ में कमी का होना परस्पर विरोधाभासी है. उपभोक्ता मांग में भी कोई स्पष्ट तेजी नहीं आई है.

 

राजन ने कहा ‘‘एक लिहाज से यह गोल्डीलॉक्स नीति है, मौजूदा परिस्थिति के अनुसार बस एक ठीक नीति है.’’ उन्होंने यह बात सामान्य से कम बारिश के आसार और लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमत तथा इसके मुद्रास्फीति पर असर के बावजूद इस साल नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की तीसरी कटौती के संबंध में कही.

 

जनवरी से अब तक नीतिगत घोषणाओं के अलावा नीतिगत दर में पहले 0.25-0.25 प्रतिशत की दो कटौतियों के बाद राजन ने आज रेपो दर और 0.25 प्रतिशत घटाकर 7.25 प्रतिशत कर दिया. राजन ने कहा ‘‘आरबीआई चीयरलीडर (प्रसस्ति पाठ करने वाला) नहीं है. हमारा काम है लोगों को मुद्रास्फीति के संदर्भ में रपए के मूल्य में भरोसा दिलाना और यह भरोसा कायम करने के बाद अच्छे फैसले करने के लिए दीर्घकालिक ढांचा तैयार करना है.’’

 

उन्होंने मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा के बाद पारंपरिक तौर पर होने वाले संवददाता सम्मेलन में कहा ‘‘हर बार निर्यातक मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि फैसला करने के लिहाजा से स्थिति हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रही . इससे मेरा यह विचार दृढ़ होता है कि हमारी मुख्य भूमिका चीयरलीडर की तरह काम करने की नहीं है.’’ वह इस प्रश्न का जवाब दे रहे थे कि आरबीआई ने मुख्य दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती का विकल्प क्यों चुना, 0.50 प्रतिशत की जोरदार कटौती क्यों नहीं की.

 

उन्होंने हालांकि कहा कि हो सकता है कि उच्च वृद्धि के मुख्य आंकड़ों के बावजूद निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत दर में कटौती कर के उसने हो सकता है कोई गलती की हो क्योंकि निवेश कई तिमाहियों से अटके पड़े हैं.

 

राजन ने कहा ‘‘ दरअसल हमने निवेश प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित कर थोड़ी गलती की है क्योंकि मध्यम अवधि में आपूर्ति की दिक्कतें दूर करने की जरूरत है.’’ हालांकि मौजूदा कापरेरेट नतीजों से इस बात की पुष्टि होती है कि जमीनी स्तर पर वृद्धि नहीं हो रही है और न ही उपभोक्ताओं की मांग में कोई वृद्धि नजर आ रही है.

 

उन्होंने कहा कि आज का निर्णय न तो बहुत साहसिक है और न ही सतर्क, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है. साथ उन्होंने कहा ‘‘आने वाले दिनों में भी पहले की ही तरह हमारी नीतिगत पहले आंकड़ों पर आधारित होगी.’’ उन्होंने नीतिगत दर में कटौती के लिए सरकार के दबाव से भी इनकार किया और कहा कि यह फैसला पूरी तरह से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है.

 

राजन ने मजाकिया लहजे में कहा ‘‘यदि मैं नीतिगत दर में कटौती करता हूं तो आप कहेंगे कि मैं सरकार को खुश करना चाहता हूं और यदि नहीं करता तो आप कहेंगे आप सरकार से उलझना चाहते हैं.’’ वृद्धि प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत दर में कटौती की वजह बताते हुए राजन ने कहा कि मौजूदा वृद्धि दर क्षमता से कम है जो करीब 8.5 प्रतिशत है. आरबीआई ने हालांकि चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर का अनुमान 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है.

 

उन्होंने कहा कि उच्चतर वृद्धि के आंकड़े और रझान से कमतर वृद्धि और कापरेरेट नतीजे में नरमी तथा उपभोक्ता मांग में कमी के बीच विरोधाभास है. राजन ने कहा ‘‘यह विश्व की निगाह में एक तरह की विसंगति है इसीलिए हमें अभी भी लगता है कि अर्थव्यवस्था में नीतिगत दर में कटौती की जरूरत है जबकि यह 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज कर रही है.’’ राजन ने कहा ‘‘ 7-7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज करने वाली ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं सफल हैं और असली मुद्दा है वृद्धि को बढ़ाने के बजाय नियंत्रित रखना. हमारे यहां निवेश अभी भी कम है . यह बहुत कम है और हमें इसमें बहुत बड़ी तेजी नहीं दिखी है.’’

 

राजन ने 7.5 प्रतिशत की उच्चतर वृद्धि का श्रेय पिछले साल के आखिरी महीनों में उत्पाद शुल्क संग्रह जैसे विशेष कारकों को दिया और कहा कि ‘‘इस पर कुछ चर्चा हो रही है कि चौथी तिमाही की वृद्धि में उत्पाद शुल्क एवं सब्सिडी जैसे विशिष्ट कारकों का हिस्सा कितना है.’’ उन्होंने कहा ‘‘इसलिए जब आप आखिरी तिमाही की वृद्धि में से इसे घटाते हैं तो यह पहले जितना मजबूत नहीं दिखता . इसलिए आप कह सकते हैं कि वृद्धि दर घोषित आंकड़ों से कम है.’’ इस बीच डिप्टी गवर्नर ने कहा कि नए आधार वर्ष के मुताबिक अर्थव्यवस्था की संभावित वृद्धि दर 8-8.5 प्रतिशत है और इस तरह फिलहाल हम उससे कमतर स्तर पर हैं.

 

कंपनियों के खराब नतीजों के संबंध में राजन ने कहा ‘‘यदि आप कापरेरेट नतीजों पर निगाह डालें तो आपको निश्चित तौर पर कापरेरेट नतीजों का समायोजन करना होगा क्योंकि कुछ क्षेत्रों में इसमें काफी कमी आई है. लेकिन आम तौर पर भी कापरेरेट नतीजों कमजोर रहे हैं जिससे संकत मिलता है कि उपभोक्ता मांग अभी बहुत तेजी से नहीं बढ़ी है.’’

 

राजन ने कहा ‘‘इसलिए यही वजहंे हैं जिनके कारण हमें लगता है कि अर्थव्यवस्था अभी भी संभावना से कमतर स्तर पर है. उत्पादन का अंतर अभी भी नकारात्मक है. ये चीजें बदलेंगी तो हालात बदलेंगे.’’ उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति तुलनात्मक आधार के कारण अगस्त तक घटेगी लेकिन उसके बाद जनवरी 2016 तक बढ़कर करीब छह प्रतिशत रहेगी जो अप्रैल के में किए गए अनुमान से थोड़ा अधिक है.

 

उन्होंने कहा ‘‘सामान्य से कम बारिश, कच्चे तेल की कीमत में तेजी और उतार-चढ़ाव वाली वाह्य स्थिति मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के लिए जोखिम है.’’ राजन ने कहा ‘‘फिलहाल सबसे बड़ी अनिश्चितता मानसून और इसके संबंध में की जाने वाली नीतिगत पहल को लेकर है.’’ उन्होंने कहा कि जैसे भी हालात होंगे उसके हिसाब से आने वाले दिनों नीतिगत दर में बढ़ोतरी या कटौती की जाएगी.

 

गवर्नर ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार 352 अरब डालर से अधिक है जो वृहद आर्थिक नीतियों को वाह्य बाजारों से असर से बचाने के लिए पर्याप्त है.

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Web Title: Raghuram Rajan
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