क्रेडिट पॉलिसी में RBI ने नहीं घटाई ब्याज दरें, कम नहीं होगी आपकी EMI

By: | Last Updated: Tuesday, 2 December 2014 6:42 AM

मुंबई/नई दिल्ली: आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने आज नीतिगत ब्याज दरों को यह कहते हुए अपरिवर्तित रखा कि रख में बदलाव करना अभी जल्दी होगा. पर उन्होंने संकेत दिया है कि यदि मुद्रास्फीति के दबव में कमी का रझान बना रहा और राजकोषीय स्थिति काबू में रखने के लिए सरकार अपनी ओर से पहल करती रही तो अगले साल की शुरूआत में दरों में कटौती की जा सकती है.

 

उन्होंने कहा ‘‘ मौद्रिक नीति के रख में अभी कोई बदलाव करना जल्दबाजी होगा. हालांकि यदि मुद्रास्फीति का मौजूदा रझान और मुद्रास्फीतिक प्रत्याशाओं में बदलाव बरकरार रहता है और राजकोषीय घटनाक्रम उत्साहजनक रहता है तो अगले साल मौद्रिक नीति में बदलाव का रख अपनाया जा सकता है और यह नियमित नीतिगत समीक्षा चक्र से अलग से भी किया जा सकता है.’’

 

आरबीआई के निर्णय के अनुसार अभी रेपो दर 8 प्रतिशत पर जबकि नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) भी चार प्रतिशत पर बना रहेगा. रेपो दर वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनकी फौरी जरूरत के लिए धन उधार देता है तथा सीआरआर बैंकों की जमा का वह हिस्सा है जिसे उन्हें रिजर्व बैंक के नियंत्रण में रखना होता है और इस पर उन्हें रिजर्व बैंक से कोई ब्याज नहीं मिलता.

 

मुद्रास्फीतिक की उड़ान के संबंध में राजन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह और घटेगी तथा औसतन छह प्रतिशत रहेगी.

 

उन्होंने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक समीक्षा जारी करने के मौके पर कहा, ‘‘ अगले 12 महीने तक मुद्रास्फीति में कुछ आवेग बना रहेगा और मौसमी उतार चढाव को छोड़ कर छह प्रतिशत के आसपास बनी रहेगी तथा मुद्रास्फीति में कमी का सिलसिला भी प्रभावी रहेगा.’’ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति लगातार पांचवें महीने गिरकर अक्तूबर में 5.52 प्रतिशत पर आ गयी थी. यह मुख्य रूप से पिछले साल के तुलनात्मक आधार के उंचा होने के कारण है.

 

आरबीआई ने खुदरा मुद्रास्फीति को जनवरी 2015 तक आठ प्रतिशत और जनवरी 2016 तक छह प्रतिशत सीमित रखने का लक्ष्य रखा है. राजन ने पिछली नीतिगत घोषणा के समय कहा था कि 2015 का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है 2016 के लक्ष्य को लेकर जोखिम बना हुआ है.

 

आरबीआई ने खुदरा मुद्रास्फीति के संबंध में मार्च 2015 के लिए अनुमान को आठ प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है.

 

मौद्रिक नीति की समीक्षा की तारीख नजदीक आने के साथ पिछले कुछ समय से ब्याज दरों में कटौती की मांग तेज हो गयी थी. वित्त मंत्री अरण जेटली ने भी वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए पूंजी की लागम कम करने का समर्थन किया था.

 

मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा के बाद शेयर बाजार थोड़ा सुधरा लेकिन दोपहर तक सूचकांक कल के बंद के स्तर से नीचे चल रहे थे.

 

शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद :जीडीपी: की वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत रही जो पहली तिमाही के 5.7 प्रतिशत की तुलना में कम है इसके मद्देनजर ब्याज दरों में कटौती की मांग की जा रही थी.

 

बुनियादी ढांचा उद्योग के कल जारी आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर में इस क्षेत्र के उत्पादन सूचकांक में 6.3 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गयी. इससे उत्पादन में तेजी लौटने का संकेत मिलता है.

 

इसके अलावा वाहनों की बिक्री में अक्तूबर में गिरावट के बाद नवंबर के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की. इसे भी विनिर्माण क्षेत्र में सुधार का संकेत माना जा रहा है.

 

ब्याज दरों में कटौती की मांग करने वाले लोग कच्चे तेल की वैश्विक कीमत में लगातार गिरावट जारी रहने की ओर भी इशारा कर रहे हैं. कच्चे तेल की कीमत पांच साल के न्यूनतम स्तर करीब 68 डालर प्रति बैरल पर आ गई है जिसके कारण भारत जैसे तेल आयातक देश में मुद्रास्फीति में नरमी की संभावना बढी है.

 

हालांकि कुछ विशेषज्ञ तेल मूल्य में अनिश्चितता बरकरार रहने के प्रति आगाह करते हुए कहा है कि ये कीमतें भू-राजनैतिक तनाव के कारण फिर चढ सकती हैं.

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