सहारा ने सेबी के पास जमा कराई 11,500 करोड़ रुपये

By: | Last Updated: Friday, 9 January 2015 4:02 PM
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नई दिल्ली: निवेशकों को पैसा लौटाने के मुद्दे पर बाजार नियामक सेबी के साथ जारी अपनी कानूनी लड़ाई के बीच सहारा समूह ने आज कहा कि सेबी के पास जमा कराई गई राशि अब ब्याज सहित बढ़कर लगभग 11,500 करोड़ रुपये हो गई है.

 

सहारा समूह ने इस बारे में जारी बयान में कहा है, ‘जमानत की पूरी राशि चुकाए जाने पर जब हमारे चेयरमैन (सुब्रत राय) बाहर आएंगे तब तक सेबी के पास जमा राशि 18,000 करोड़ रपये (नकदी में) हो जाएगी.’ समूह ने अपनी कुछ विदेशी संपत्तियों के संबंध में कर्ज अंतरण व्यवस्था के संबंध में अतिरिक्त प्रस्तावों का ज्रिक करते हुए यह जानकारी दी.

 

समूह ने कहा है, ‘चूंकि कोई भी बैंक 100 प्रतिशत नकद मार्जिन के बिना हमें बैंक गारंटी देने को तयार नहीं है, सेबी के पास नकदी 18,000 करोड़ रुपये होने जा रही है.’ समूह ने यह भी कहा है कि दूसरी तरफ सेबी ने पिछले 26 महीने में निवेशकों को रिफंड के रूप में केवल दो करोड़ रुपये का भुगतान किया है.

 

निवेशकों से रिफंड दावों के लिए आवेदन करने के बारे में सेबी के दो विज्ञापनों का हवाला देते हुए समूह ने दावा किया है कि नियामक को अब तक केवल 20 करोड़ रुपये की मांग के आवेदन मिले हैं. पीठ ने कहा कि सहारा समूह अमेरिका में रकम की व्यवस्था करने के बाद इसे भारत लाने की मंजूरी के लिए उचित स्तर पर रिजर्व बैंक या सक्षम प्राधिकरण के पास अर्जी देगा और इस राशि को अंबे वैली लिमिटेड, मॉरीशस के खाते में जमा करेगा.

 

अंबे वैली मारीशस, सहारा इंडिया की अंबे वैली लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है.

 

पीठ ने आगे कहा कि अमेरिकी बाजार से ली गई ऋण की संपूर्ण रकम अंबे वैली लिमिटेड, मॉरीशस के पास जमा की जाएगी और इसका इस्तेमाल या हस्तांतरण भारतीय अनुषंगी द्वारा सेबी के पास सेबी. सहारा रिफंड खाते में जमा करने के अलावा कहीं दूसरी जगह नहीं किया जाएगा.

 

पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राय को जेल से रिहा करने के उद्देश्य से सहारा समूह द्वारा ऋण के रूप में विदेशों से जुटाई गई और अंबे वैली लिमिटेड, मॉरीशस के पास जमा की गई रकम पर समूह किसी प्रकार के हक का दावा नहीं करेगा.

 

सहारा को जो 105 करोड़ डॉलर जुटाने की अनुमति दी गयी है उसमें से 65 करोड़ डॉलर एक कनिष्ठ ऋण के रूप में और 40 करोड़ डॉलर मिराज कैपिटल एलएससी कंपनी से निवेश निकाल कर जुटाने की अनुमति है.

 

इस संबंध में सहारा के वकील एस. गणेश, राजीव धवन और केशव मोहन द्वारा अनुरोध किया गया था. उन्होंने कहा था कि सहारा को अनुमति दी जाय कि वह विदेश स्थित होटलों के लिए बैंक आफ चाइना से लिए गए ऋणों को दूसरे ऋणदाता के जरिए अधिग्रहित कर सके. राय को दो अन्य निदेशकों अशोक राय चौधरी व रविशंकर दूबे के साथ पिछले साल 4 मार्च को जेल भेजा गया था.

 

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया था कि विदेशी बैंक एजेंट के एसक्रो खाते से धन के हस्तांतरण में आ रही कानूनी अड़चन का जिक्र किया था जिसके लिए फेमा के तहत सक्षम अधिकारी से विशेष मंजूरी लेनी होती है.

 

गौरतलब है कि सहारा समूह ने न्यूयार्क में ड्रीम डाउनटाउन और दि प्लाजा व लंदन में ग्रॉसवेनोर हाउस होटलों को खरीदने के लिए बैंक ऑफ चाइना से ऋण लिया था और बैंक आफ चाइना की देनदारी से उबरने के लिए उसने 65 करोड़ डॉलर (करीब 3,600 करोड़ रुपये) का ‘जूनियर लोन’ जुटाने की मंजूरी मांगी थी.

 

सहारा ने गत 17 दिसंबर को घरेलू परिसंपत्तियों की बिक्री से जुटाए गए 1,900 करोड़ रुपये की रकम के चेक सेबी को सौंपे थे. उच्चतम न्यायालय ने दो दिसंबर को सहारा समूह को और चार घरेलू संपत्तियों की बिक्री के मामले में आगे बढ़ने की अनुमति दे दी जिससे 2,710 करोड़ रुपये एकत्र होने की संभावना है.

 

अदालत ने समूह को जोधपुर, पुणे, गुड़गांव के चौमा और मुंबई के वसई में संपत्तियों की बिक्री की अनुमति दी थी. पीठ को बताया गया था कि पुणे संपत्ति बेचने में कुछ समस्या है. इस संपत्ति की बिक्री से 550 करोड़ रूपये की प्राप्ति हो सकती है.

 

, इससे पहले सेबी ने न्यायालय में अर्जी देकर मांग की थी कि सहारा समूह को 47,000 करोड़ रूपये के भुगतान का कार्यक्रम प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएं.

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