साप्ताहिक समीक्षा: सेंसेक्स, निफ्टी में 3 फीसदी तेजी

By: | Last Updated: Saturday, 18 July 2015 4:51 AM

मुंबई: देश के शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब तीन फीसदी तेजी रही. बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सप्ताह 2.90 फीसदी या 801.91 अंकों की तेजी के साथ शुक्रवार को 28,463.31 पर बंद हुआ. इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 2.98 फीसदी या 249.3 अंकों की तेजी के साथ 8,609.85 पर बंद हुआ.

 

पिछले सप्ताह सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 में तेजी रही, जिनमें प्रमुख रहे इंफोसिस (6.94 फीसदी), मारुति (6.56 फीसदी), भेल (6.16 फीसदी), सिप्ला (5.54 फीसदी) और ल्युपिन (5.51 फीसदी). सेंसेक्स के चार शेयरों टाटा मोटर्स (0.80 फीसदी), ओएनजीसी (0.46 फीसदी), वेदांता (0.34 फीसदी) और लार्सन एंड टुब्रो (0.02 फीसदी) में गिरावट रही.

 

गत सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तीन फीसदी से अधिक तेजी रही. मिडकैप 3.22 फीसदी या 349.73 अंकों की तेजी के साथ 11,220.18 पर और स्मॉलकैप 3.36 फीसदी या 380.43 अंकों की तेजी के साथ 11,716.37 पर बंद हुआ.

 

सोमवार 13 जुलाई को जारी आंकड़े में कहा गया कि देश की उपभोक्ता महंगाई दर जून महीने में 5.4 फीसदी रही, जो मई में 5.01 फीसदी थी.

 

मंगलवार 14 जुलाई को जारी एक अन्य आंकड़े के मुताबिक, देश की थोक महंगाई दर जून महीने में नकारात्मक 2.4 फीसदी रही, जो मई में नकारात्मक 2.36 फीसदी थी. साथ ही अप्रैल-जून 2015 अवधि की महंगाई दर 1.42 फीसदी रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 1.5 फीसदी थी.

 

बुधवार 15 जुलाई को जारी एक अन्य सरकारी आंकड़े के मुताबिक, देश का निर्यात जून महीने में 15.82 फीसदी घटकर 22.29 अरब डॉलर रहा. आयात इस दौरान 13.4 फीसदी घटकर 33.11 अरब डॉलर रहा. इसी दौरान तेल आयात 34.97 फीसदी घटकर 8.67 अरब डॉलर रहा. गैर-तेल आयात 1.85 फीसदी घटकर 24.44 अरब डॉलर रहा. देश का व्यापार घाटा इस दौरान 10.82 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 11.76 अरब डॉलर था.

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बुधवार को चीन ने कहा कि दूसरी तिमाही में उसकी विकास दर सात फीसदी रही. चीन ने सालाना विकास दर लक्ष्य भी सात फीसदी के करीब तय किया है.

 

गुरुवार 16 जुलाई को ग्रीस की संसद ने अंतर्राष्ट्रीय कर्जदाताओं को पेश किए गए बेलआउट शर्तो को मंजूरी दे दी. इसके तहत ग्रीस सरकार खर्च में भारी कटौती करेगी, आर्थिक सुधार अपनाएगी और कर बढ़ाएगी. यूरो जोन और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से अगले तीन साल की अवधि के लिए 95 अरब डॉलर कर्ज हासिल करने के लिए इन शर्तो को मानना ग्रीस के लिए जरूरी था.

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