साप्ताहिक समीक्षा: प्रमुख सूचकांकों में 42 महीनों की तीव्र गिरावट

By: | Last Updated: Saturday, 6 June 2015 3:32 PM

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ब्याज दरों में कटौती और मानसून से जुड़ी चिंताओं की वजह से शुक्रवार को समाप्त सप्ताह के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जो दिसंबर 2011 के बाद सबसे तीव्र गिरावट रही.

 

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचंकाक बीएसई में लगातार चार दिन गिरावट दर्ज हुई. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में पांचों कारोबारी दिन गिरावट रही.

 

जियोजित बीएनपी पारिबा के फंडामेंडल रिसर्च के प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में कटौती से बाजार को बड़ी उम्मीदें थीं. वह उम्मीदों के मुताबिक ही था. ये कारक बाजार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं.”

 

इस सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 27,959.43 के ऊपरी स्तर और 26,551.97 के निचले स्तर पर रहा. इस सप्ताह के दौरान 1,407.46 अंकों का उतार-चढ़ाव रहा. सेंसेक्स 1059.95 अंकों यानी 3.8 प्रतिशत की तेज गिरावट के साथ 26,768.49 पर बंद हुआ.

 

कोटक सिक्युरिटीज के निजी ग्राहक समूह अनुसंधान के प्रमुख दीपेन शाह ने कहा, “मानसून और ग्रीस से जुड़ी चिंताओं की वजह से बाजार का रुझान कमजोर था. कंपनियों के तिमाही नतीजों ेसे भी बाजार को लाभ नहीं हुआ. बाजार को अमेरिका के गैरकृषि पेरोल आंकड़ों का इंतजार है.”

 

इस सप्ताह अपने लोकप्रिय ब्रांड मैगी की वजह से नेस्ले इंडिया का शेयर दबाव में रहा. इस दौरान नेस्ले के शेयर में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. जो मई 2006 के बाद सबसे बड़ी गिरावट रही. टाटा मोटर्स और सिप्ला भी अगस्त 2011 के बाद से सबसे निचले स्तर पर रहे, जबकि सिप्ला पांच महीने के निचले स्तर पर रहा.

 

बीएनपी पारिबा म्यूचुअल फंड के प्रमुख निवेश अधिकारी आनंद शाह ने कहा, “हालांकि, आरबीआई ने रेपो दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की है. बाजार मानसून और तेल कीमतों से जुड़ी अनिश्चितताओं की वजह से आरबीआई की नीतियों को भांप रहा है.”

 

हेम सिक्युरिटीज के निदेशक गौरव जैन ने कहा, “कड़े संघर्ष के बाद बाजार कमजोरी से बाहर निकलने में असमर्थ है.” सबसे बड़ी चिंता यह है कि सेंसेक्स अबतक इस साल 2.7 प्रतिशत तक लुढ़क चुका है.

 

शाह के मुताबिक, “मानसून की प्रगति पर नजर रखी जाएगी. सरकार द्वारा उठाए गए सुधारवादी कदमों के अलावा वस्तु एवं सेवा कर विधेयक को पारित कराना बाजार के लिए जरूरी है.”

 

जैन ने कहा, “निवेशक ग्रीस, मानसून, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों की वजह से चिंतित रहेंगे. कुछ व्यापक आर्थिक आंकड़े, मानसून की प्रगति, रुपये-डॉलर की चाल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के हित बाजार की दिशा तय करेंगे.”

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