घर पर खाना मंगाने वालों को लगा झटका, देना होगा सर्विस टैक्स

By: | Last Updated: Friday, 18 September 2015 10:50 AM
service tax on take away food

नई दिल्लीः मैकडोनल्ड या पिज्जा हट जैसे फूड ज्वायंट्स से खाने-पीने का सामान घर मंगवाने वालों के लिए अच्छी खबर नहीं है. आप ऐसे किसी भी एयरकंडिशंड रेस्त्रां या फूड ज्वायंट पर जा कर कुछ खाते हैं या फिर ऑडर्र करते हैं, दोनों ही स्थिति में आपको सर्विस टैक्स देना ही होगा.

 

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने साफ किया है कि एयरकंडिशंड रेस्त्रां के मामले में सर्विस टैक्स को लेकर कोई भ्रम नहीं होनी चाहिए. सर्विस टैक्स विभाग वहां बैठ कर खाने-पीने या पैक करवा कर घर ले जाने या फिर घर डिलिवरी कराने में कोई अंतर नहीं समझता. तकनीकी भाषा में ऑडर्र देकर घर मंगवाने या खूद ही रेस्त्रां या फूड ज्वांयट्स से सामान पैक करा कर ले जाने को टेक अवे कहतै हैं.

 

दरअसल, इस पूरे मामले में भ्रम की स्थिति चंडीगढ़ स्थित सर्विस टैक्स अधिकारी की ओर से जारी एक सर्कुलर की वजह से हुआ जिसमें कहा गया कि टेक अवे पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा. इसके पीछे दलील यह थी कि सर्विस टैक्स, सेवा लिए जाने पर ही देना चाहिए. चूंकि टेक अवे के मामले में रेस्त्रां से सिर्फ खाना लिया जा रहा है, वहां उपलब्ध सेवाएं नहीं ली जा रही, ऐसे में सर्विस टैक्स नहीं लगना चाहिए. लेकिन बाद में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने ऐसी किसी दलील को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि हर स्थिति में सर्विस टैक्स लगेगा.

 

एयर कंडिशंड रेस्त्रां या फूड ज्वायंट में बैठकर खाने या टेक अवे पर सर्विस टैक्स की प्रभावी दर में कोई अंतर नहीं होगा. वैसे तो सर्विस टैक्स की दर 14 फीसदी है, लेकिन एयर कंडिशंड रेस्त्रां के मामले में प्रभावी दर 5.6 फीसदी होती है. दूसरे शब्दों में कहे तो कुल बिल में से वैट और लग्जरी टैक्स (यदि लगता है) घटाने के बाद बची रकम के 5.6 फीसदी हिस्से के बराबर ही सर्विस टैक्स देना होगा. प्रभावी दर कम होने की वजह यह है कि कुल बिल में सामान और सेवा दोनों की ही कीमत शामिल होती है. चूंकि सामान की कीमत पर एक्साइज ड्यूटी और वैट अदा की जा चुकी है, इसीलिए कुल बिल में इनकी कीमत को बिल की रकम का 60 फीसदी के बराबर मानते हुए घटा दिया जाता है और बाकी बचे 40 फीसदी पर ही सर्विस टैक्स देना होता है. नतीजतन बिल में आप पाएंगे कि सर्विस टैक्स की दर 14 फीसदी के बजाए 5.6 फीसदी लिखी गयी है.

 

एक और बात गौर करना जरूरी होगा कि कई रेस्त्रां, बिल में जो सर्विस चार्ज जोड़ते है, वह सर्विस टैक्स से अलग होता है. सर्विस चार्ज से मिली रकम रेस्त्रां के खाते में जाती है जबकि सर्विस टैक्स से जुटायी रकम सरकार के खाते में. आम तौर पर यह बिल की कुल रकम के 10 फीसदी के बराबर होता है और महंगे रेस्त्रां में वसूला जाता है.

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Web Title: service tax on take away food
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