मझौली, बड़ी गाड़ियों पर सेस की दर बढ़ी, खादी पर अब जीएसटी नहीं

मझौली, बड़ी गाड़ियों पर सेस की दर बढ़ी, खादी पर अब जीएसटी नहीं

जीएसटी काउंसिल ने खादी ग्रामोद्योग केद्रों से बिकने वाले खादी के कपड़े को जीएसटी से मुक्त कर दिया है जबकि मिट्टी की मूर्ति, धूप-अगरबत्ती, रबर बैंड, रेन कोट जैसे 30 सामान पर जीएसटी की दर कम कर दी गयी है. सरकार का दावा है कि दरों में की गयी बढ़ोतरी से आम आदमी का काफी फायदा होगा.

By: | Updated: 09 Sep 2017 11:41 PM

नई दिल्लीः केंद्र और राज्यों की संस्था जीएसटी काउंसिल ने महंगी गाड़ियों, स्पोटर्स यूटिलिटी व्हीकल यानी एसयूवी और मझौली कारों पर सेस की दर 2 से सात फीसदी के बीच बढ़ाने का फैसला किया है. हालांकि देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने संकेत दिए हैं कि इस बढ़ोतरी के वावजूद वो शायद दाम नहीं बढ़ाए.


दूसरी ओर काउंसिल ने खादी ग्रामोद्योग केद्रों से बिकने वाले खादी के कपड़े को जीएसटी से मुक्त कर दिया है जबकि मिट्टी की मूर्ति, धूप-अगरबत्ती, रबर बैंड, रेन कोट जैसे 30 सामान पर जीएसटी की दर कम कर दी गयी है. सरकार का दावा है कि दरों में की गयी बढ़ोतरी से आम आदमी का काफी फायदा होगा.


हैदराबाद में हुई जीएसटी काउंसिल की 21 वीं बैठक में सबकी नजर कारों पर सेस बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर था. काउंसिल की पिछली बैठक में सेस 10 फीसदी तक की दर से बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी थी. इसके बाद कानून में फेरबदल के लिए राष्ट्रपति ने अध्यादेश भी जारी कर दिया. इसके बाद अब जीएसटी काउंसिल ने तय किया कि




  • पेट्रोल और डीजल की छोटी कारों पर पहले की तरह जीएसटी और सेस को मिलाकर टैक्स की कुल दर 29 और 31 फीसदी होगी.

  • मझौली किस्म की कारों पर सेस मिलाकर जीएसटी की दर पहले के 43 फीसदी के बजाए 45 फीसदी होगी. यानी दो फीसदी की बढ़ोतरी.

  • बड़ी कार पर सेस मिलाकर जीएसटी की दर 43 फीसदी के बजाए 48 फीसदी होगी, यानी पांच फीसदी की बढ़ोतरी.

  • स्पोटर्स यूटिलिटी पर सेस मिलाकर जीएसटी की दर 43 फीसदी के बजाए 50 फीसदीएस होगी, यानी सात फीसदी की बढ़ोतरी

  • राहत की बात ये है हाइब्रिड कार पर पहले की तरह जीएसटी और सेस मिलाकर कुल 43 फीसदी टैक्स चुकाना होगा.


जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन और वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि सेस में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह जीएसटी लागू होने के पूर्व की दरों को काफी हद तक बहाल करना था. फिर भी इस बात पर ध्यान दिया गया कि इससे मैन्युफैक्चरिंग पर असर नहीं पड़े. क्योंकि कार कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग में खासा योगदान करती हैं और इससे रोजगार के ज्यादा मौके बनते हैं. जेटली का ये भी कहना था कि सेस बढ़ाने का एक मकसद आमदनी मे बढ़ोतरी करना तो है ही.


कार बाजार की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी का कहना है कि सेस की नई व्यवस्था से उसकी ज्यादातर कारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. केवल दो कार, सियाज पेट्रोल और आर्टिगा (पेट्रोल) पर कुल टैक्स बढ़ेगा. लेकिन कंपनी ने संकेत दिए हैं कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के फायदे की वजह से इनके दाम बढ़ाने की जरुरत शायद नहीं होगी. सियाज पेट्रोल की कीमत 7.65 लाख रुपये से 9.28 लाख रुपये के बीच है, जबकि आर्टिगा पेट्रोल की कीमत 6.15 लाख रुपये से 8.63 लाख रुपये के बीच है. ये दिल्ली में एक्स शो रुम कीमत है. बाकी कार कंपनियों से अभी तक प्रतिक्रिया नहीं मिली है.


gst table


रिटर्न भरने में परेशानी
जीएसटी काउंसिल की बैठक में रिटर्न भरने में आ रही दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा हुई. बीते कुछ दिनों से जीएसटी नेटवर्क पर भारी बोझ बढ़ने से व्यापारियों-कारोबारियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा. वित्त मंत्री ने कहा कि शुरुआती दिनों में इस तरह की दिक्कतें लाजिमी है. लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि ये स्थिति आगे नहीं रहेगी. फिलहाल, जीएसटीएन के कामकाज पर नजर रखने और उसमें सुधार के लिए जरुरी सुझाव देने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया है. इस मौके पर जेटली ने जुलाई महीने के लिए रिटर्न भरने की तारीख 10 अक्टूबर तक बढ़ाने का ऐलान किया.


जेटली ने ये भी जानकारी दी कि जुलाई के महीने मे जीएसटी से कुल कमाई 95 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गयी है.


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