साप्ताहिक समीक्षा: सेंसेक्स, निफ्टी में मामूली बदलाव

By: | Last Updated: Saturday, 20 September 2014 2:56 AM

मुंबई: देश के शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में नगण्य बदलाव हुआ. बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सप्ताह 0.11 फीसदी या 29.38 अंकों की तेजी के साथ शुक्रवार को 27,090.42 पर बंद हुआ.

 

इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.20 फीसदी या 15.95 अंकों की तेजी के साथ 8,121.45 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से पिछले सप्ताह 16 में तेजी रही.

 

डॉ. रेड्डीज लैब (8.69 फीसदी), हीरो मोटोकॉर्प (7.04 फीसदी), टीसीएस (3.92 फीसदी), मारुति सुजुकी (3.83 फीसदी) और भेल (2.86 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही.

 

सेंसेक्स में गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे ओएनजीसी (5.63 फीसदी), कोल इंडिया (3.38 फीसदी), एलएंडटी (2.76 फीसदी), गेल (2.63 फीसदी) और हिंदुस्तान यूनिलीवर (2.57 फीसदी). गत सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में हालांकि उतार-चढ़ाव का रुख रहा.

 

मिडकैप 1.18 फीसदी या 117.82 अंकों की गिरावट के साथ 9,865.26 पर बंद हुआ. स्मॉलकैप 0.22 फीसदी या 24.39 अंकों की तेजी के साथ 11,191.18 पर बंद हुआ.

पिछले सप्ताह के प्रमुख घटनाक्रमों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान चीन ने अगले पांच साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया.

 

शी ने भारतीय कृषि और फार्मा कंपनियों तथा भारतीय उत्पादों के निर्यात के लिए चीन के बाजार को खोलने की प्रक्रिया में तेजी लाने की बात कही. भारत और चीन ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए.

 

सोमवार को 15 सितंबर को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य पर आधारित महंगाई दर अगस्त 2014 में 3.74 फीसदी रही, जो जुलाई में 5.19 फीसदी थी.

 

सोमवार को ही जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक, अगस्त 2014 में देश का निर्यात साल-दर-साल आधार पर 2.35 फीसदी बढ़कर 26.95 अरब डॉलर रहा. इस दौरान आयात 2.08 फीसदी बढ़कर 37.79 अरब डॉलर दर्ज किया गया.

 

व्यापार घाटा 10.83 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 10.68 अरब डॉलर था. अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरेल रिजर्व की नीति निर्मात्री समिति फेडरल ओपेन मार्केट कमिटी की 16 और 17 सितंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में ब्याज दर को लंबे समय के लिए शून्य फीसदी के आसपास बनाए रखने का फैसला किया गया.

 

बांड खरीदारी का मासिक कार्यक्रम बंद करने के बाद भी लंबे समय तक दरों में वृद्धि नहीं की जाएगी. फेड ने इस बैठक में बांड खरीदारी के मासिक आकार को 10 अरब डॉलर और घटा दिया और इसे अगले महीने पूरी तरह बंद करने के रास्ते पर टिका रहा.

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