सोवरिन गोल्ड बांड की बढती चमक

Sovereign gold bond scheme

नई दिल्ली: चाहे धातु के रूप में मिले या फिर सिर्फ कागज पर, सोने की चाह कम नहीं होती. यकीन ना हो तो सरकार के सोवरिन गोल्ड बांड को ले लीजिए. दो खेप में इस योजना के तहत करीब 1000 करोड़ रुपये का निवेश आया है जो 3700 किलो से भी ज्यादा के सोने के बराबर है.

सबसे पहले हम आपको बता दे कि सोवरिन गोल्ड बांड है क्या?

दरअसल, ये बांड निवेशकों को सोना खरीदे बगैर, उसके भाव में लम्बे समय में होने वाली बढ़ोतरी का फायदा देने का जरिया है, वहीं सरकार के लिए ये आम लोगों से कर्ज लेने का एक माध्यम है. एक बांड एक ग्राम सोने के बराबर है. योजना के तहत आप कम से कम दो ग्राम यानी दो बांड और ज्यादा से ज्यादा आधा किलो यानी 500 यूनिट मे पैसा लगा सकते हैं. योजना का ऐलान पिछले साल बजट में हुआ था, जिसे बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक तौर पर लांच किया.

बांड जारी करने के पीछे सरकार का मकसद सोने के आयात में कमी करना है. इस समय हर साल 1000 टन तक सोने का आय़ात होता है जिस पर भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है और इसका असर करंट अकांट के घाटे पर पड़ता है. अब सरकार को उम्मीद है कि आगे हालात बदलेंगे.

वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 22 जनवरी के बीच जारी योजना के दूसरे खेप में 3.16 लाख आवेदन के जरिए 726 करोड़ रुपये जमा हुए. इसके बदले में 2,790 किलो सोने के बराबर बांड दिए जाएंगे. आवेदकों को बांड 8 फरवरी को मिलेंगे. ध्यान रहे कि योजना की पहली खेप (नवम्बर, 2015) में कुल 62,169 लोगों ने 246.20 करोड़ रुपये जमा कर 915 किलोग्राम से भी ज्यादा सोने के बराबर का बांड हासिल किया था. पहली खेप में एक बांड यानी एक ग्राम सोने की कीमत 2,684 रुपये रखी गयी थी, जबकि दूसरी खेप में 2,600 रुपये ऱखी गयी. उम्मीद है कि जल्दी ही योजना की तीसरी खेप जारी की जाएगी.

बांड की कीमत, जारी की जाने वाली तारीख के ठीक पहले के सप्ताह मे सात दिनों के औसत बंद भाव के आधार पर तय की जाती है. बांड की मियाद 8 साल तय की गयी है. मियाद पूरी होने की तारीख के ठीक पहले के सप्ताह मे सात दिनों के औसत बंद भाव के आधार पर आपको अपना निवेश वापस मिलेगा. आप चाहें तो पांच साल के बाद पैसा निकाल सकते है, लेकिन वहां भी यही फॉर्मूला लागू होगा. एक बात और, भाव चाहे जो भी हो, हर साल आपको अपने निवेश पर पौने तीन फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा.

बांड खऱीदने के लिए बैंक या डाक घर जाना होता है. वहां सीधे या एजेंटें के जरिए आप पैसा लगा सकते हैं. निवेश के लिए केवाईसी के हर कायदे कानून को पूरा करना होगा. इसके लिए वोटर आईडी, आधार कार्ड, पैन या पासपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप चाहे तो इस बांड को गिरवी रखकर कर्ज भी ले सकते हैं. और हां, बांड पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी.

बांड से जुटायी रकम का इस्तेमाल सरकार अपनी उधारी को पूरा करने के लिए करेगी, जबकि अभी बैंकों से पैसा जुटाया जाता है. अब होगा ये कि बैकों के पास नकदी ज्यादा होगी जिसके जरिए वो ज्यादा कर्ज तो दे ही पाएंगे, साथ ही ब्याज दर में भी कमी आ सकती है.

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