जेपी के घर खरीदने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट चिंतितः दिया बड़ा आदेश

जेपी के घर खरीदने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट चिंतितः दिया बड़ा आदेश

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि वह घर खरीदारों की आंखों में आंसू देख कर चिंतित हैं. इन लोगों से बिल्डर दगाबाजी नहीं कर सकते हैं. उनके साथ सामान्य निवेशक जैसा बर्ताव नहीं किया जा सकता. उन्होंने सिर पर छत पाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई खर्च की है.

By: | Updated: 13 Sep 2017 10:17 PM

नई दिल्ली: जेपी ग्रुप जहां एक तरफ दिवालियेपन की कगार पर जा पहुंचा है वहीं सुप्रीम कोर्ट भी इसको किसी तरह की राहत देने के मूड में नहीं है. आज सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदने वाले लोगों की आंखों में आंसुओं पर दुख जाहिर करते हुए कहा है कि बिल्डर उनके साथ दगाबाजी नहीं कर सकते हैं. शीर्ष न्यायालय ने जेपी ग्रुप को अपने दस ग्राहकों को फ्लैट सौंपने में देर करने को लेकर 50 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया .


सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख/ घर खरीदारों से सामान्य निवेशकों जैसा बर्ताव न हो
न्यायालय ने यह भी कहा कि घर खरीदारों से सामान्य निवेशकों जैसा बर्ताव नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने अपने सिर पर छत के लिए अपनी गाढ़ी कमाई खर्च की है. इससे पहले, शीर्ष न्यायालय ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को अल्प अवधि की सावधि जमा के तौर पर बैंक में चार करोड़ रुपये जमा करने और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर इसकी कलिप्सो कोर्ट प्रोजेक्ट में घर खरीदारों को फ्लैट सौंपने का निर्देश दिया था.


दरअसल, रियल एस्टेट कंपनी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के दो मई 2016 के आदेश को चुनौती दी थी. आयोग ने घर खरीदारों को फ्लैट सौंपने में हो रही देर को लेकर 12 फीसदी सालाना की दर से जुर्माना लगाया था. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि वह घर खरीदारों की आंखों में आंसू देख कर चिंतित हैं. इन लोगों से बिल्डर दगाबाजी नहीं कर सकते हैं. उनके साथ सामान्य निवेशक जैसा बर्ताव नहीं किया जा सकता. उन्होंने सिर पर छत पाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई खर्च की है.


पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर भी शामिल थे. न्यायालय ने अंतरिम उपाय के तौर पर कंपनी को निर्देश दिया कि वह 10 फ्लैट खरीदारों को ब्याज के तौर पर 50 लाख रूपया दे. फ्लैट खरीदारों के वकील ने कहा कि उन्हें 2016 में फ्लैट सौंपे गए, जबकि ये 2011 में दिये जाने थे. साथ ही ब्याज पर न्यायिक निर्णय किए जाने की जरूरत है.


सीनियर वकील कृष्णन वेणुगोपाल ने कहा कि 12 फीसदी पैनल्टी लगाने का आयोग का आदेश अनुचित और मनमाना है. आयोग ने अपने आदेश में नोएडा स्थित बिल्डर को निर्देश दिया था कि वह खरीदारों को अपार्टमेंट 21 जुलाई 2016 तक सौंप दे, जिसमें नाकाम रहने पर उसे परियोजना पूरी होने तक प्रति दिन प्रति फ्लैट 5000 रूपए जुर्माना अदा करना होगा.


 जेपी कलिप्सो कोर्ट प्रोजेक्ट


गौरतलब है कि जेपी कलिप्सो कोर्ट प्रोजेक्ट कंपनी ने 2007 में शुरू की थी. साल 2016 तक कंपनी ने 16 टावर में से सिर्फ पांच टावर का निर्माण कार्य पूरा किया, जबकि दूसरे टावर का निर्माण कार्य अधूरा रहा.


जेपी इंफ्रा को झटका: कंपनी, बंगाल की खाड़ी में डूबे या अरब सागर में, ग्राहकों के हित सुरक्षित रहने चाहिए-सुप्रीम कोर्ट

बाजार में मामूली तेजीः सेंसेक्स 28 अंक चढ़कर 32,186 पर, निफ्टी 10079 पर बंद

सरकार को पेट्रोल-डीजल के भाव जल्द ही कम होने की उम्मीद, नहीं घटाएगी टैक्स

अब 100 रुपये का सिक्का जारी करेगी सरकार, जानें क्या होगा खास?

जुलाई के मुकाबले अगस्त में बढ़ी खुदरा महंगाई दर, औद्योगिक विकास दर में सुधार

नेशनल पेंशन स्कीम में शामिल होने की उम्र 65 साल तक बढ़ी

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest Business News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story महज 312 रुपये में करें हवाई सफर, GoAir दे रहा है भारी छूट