असंभव को आजमाने की जिद ठाने केजरीवाल से एक सवाल, 'आप'की राजनीति क्या है?

By: | Last Updated: Friday, 7 February 2014 9:21 AM
असंभव को आजमाने की जिद ठाने केजरीवाल से एक सवाल, ‘आप’की राजनीति क्या है?

असंभव को आजमाने की जिद ने अरविंद केजरीवाल को ‘नायक’ बना दिया. अरविंद सियासत का नया व्याकरण रच रहे हैं. जो पुराने सियासतदानों को भी समझ नहीं आ रहा है और व्यवस्था के ग्रामर में गड़बड़ी के संकेत दे रहा है.

 

राजनेताओं के उलट आम आदमी केजरीवाल की कामयाबी में अपनी कामयाबी देख रहा है. आप की सियासत राजनीतिक पंडितों से लेकर सियासतदानों को लगातार चौका रही है. रटी-रटाई लीक को तोड़ती जा रही है.

 

ताजा मामला जनलोकपाल बिल को लेकर है. जिस जनलोकपाल बिल को असंवैधानिक कहा जा रहा है उस पर केजरीवाल अड़ गए हैं. केंद्र की मंजूरी के बिना विधेयक पारित करने के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव की संवैधानिकता पर उपराज्यपाल नजीब जंग ने सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरण की राय मांगी थी. समझा जाता है कि परासरण ने उपराज्यपाल से कहा है कि बिना मंजूरी के विधेयक पारित करना गैरकानूनी होगा. उधर केजरीवाल कह रहे हैं कि केंद्र से मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है. विधानसभा बिल पास कर सकती है लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही बिल अमल में आ सकता है. लेकिन बिल पर पहले से गृह मंत्रालय की राय लेने की जरूरत नहीं है.

 

सवाल अब यह पैदा हो रहा है कि अरविंद को इतनी जल्दबाजी क्यों है? विश्वास मत से पहले ही पानी मुफ्त ..बिजली पर फैसला..फिर दिल्ली पुलिस..अब जनलोकपाल पर तकरार? लोकसभा की लड़ाई के लिए पार्टी ने पूरे देश में लोगों को जोड़ने से लेकर चुनाव लड़ने तक का फैसला कर लिया. अरविंद अपने समर्थकों की आकांक्षाओं और उम्मीदों से तालमेल बैठाने के बजाए हर वह फैसला कर रहे हैं जो लोकसभा चुनाव में सरकार का संकेत दे.

 

लोक लुभावने वादों फैसला कर दिल्ली वालों के दिल में अपनी जगह भी बना ली. आम आदमी पार्टी के मुखिया एक के बाद एक फैसले कर लोगों के बीच अपनी साख को मजबूत करते जा रहे हैं तो कांग्रेस इस भीड़ में गुम होती जा रही है. चाहे 1984 के सिख विरोधी दंगों पर एसआइटी गठित करने की बात हो या फिर शीला दीक्षित के खिलाफ अनधिकृत कालोनी मामले और राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में हुए भ्रष्टाचार पर मुकदमा दर्ज करवाने की बात या फिर डीम्स के खातों की सीएजी जांच की घोषणा.

 

अगर हम अरविंद केजरीवाल की यात्रा को देखें तो एक बात साफ तौर पर रेखांकित की जा सकती है कि ये शख्स बेहद जल्दी में हैं. वैसे भी पानी और इच्छा की तासीर एक ही है आगे बढ़ते रहना. सियासत की तो फितरत ही ऐसी है कि बस पहले काटो फिर सींचो फिर काटो. कुछ ऐसे ही वोटो की फसल काटते रहते हैं हमारे सियासत दा. लेकिन केजरीवाल यहीं चूक रहे हैं. आगामी लोकसभा पर नजर गड़ाए ऐसे बैठे हैं कि सींचने की जहमत उठाना नहीं चाहते हैं. जब ठंड में दिल्ली के गरीब मर रहे थे उस वक्त केजरीवाल अपने मंत्री को बचाने के साथ जनता को यह संदेश देने में जुटे थे कि क्राइम पर हमारा कंट्रोल नहीं है. क्योंकि दिल्ली पुलिस हमारी नहीं है. इसमें वह सफल भी हुए.

 

अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीति की शुरुआत से ही बड़े लोगों के खिलाफ शक पैदा कर आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई. खुलासा दर खुलासा किया. बड़े उद्योगपति से लेकर राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के दामाद तक पर सनसनीखेज आरोप लगाए. एक से एक संगीन इल्जाम. उन आरोपों को अंजाम तक पहुंचाने की मंशा नहीं थी. एक बार फिर लोकसभा चुनाव से पहले  तर्क ये कि जाचं का काम तो एजेंसियों का है. तात्कालिक फायदा यह हुआ कि अरविंद केजरीवाल देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ योद्धा के तौर पर स्थापित होते चले गए. लोगों के मन में एक उम्मीद जगी कि ये शख्स अलग है. कुछ कर दिखाना चाहता है. लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यवस्था बनाने के बजाए स्टिंग करने का उपाय सुझा रहे हैं. जब स्टिंग सरकारी कर्मचारी के खिलाफ तो फैसला तुरंत जब पार्टी के खिलाफ तो क्लीन चिट. इससे जनमानस में भ्रम पैदा होने लगा है.

 

माना जा रहा था कि ‘आप’ ने राजनीति में युवा, आदर्शवाद, विश्वसनीयता, कल्पना और ऊर्जा का प्रवाह किया है. अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ लेने के दो दिन बाद भगवान दास रोड पर सरकारी बंगले के लिए अनुरोध किया था. इस बात का खुलासा मुख्यमंत्री कार्यालय से उपराज्यपाल को लिखे पत्र में हुआ है. इसके बाद सादगी का भ्रम अब टूट रहा है. आम आदमी अब केजरीवाल की खांसी और उनके मफलर को भी शक की निगाहों से देखने लगा है. और बस अब यह पूछ रहा है कि ‘आप’की राजनीति क्या है?

Crime News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: असंभव को आजमाने की जिद ठाने केजरीवाल से एक सवाल, ‘आप’की राजनीति क्या है?
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017