आपराधिक मामले में आरोपी के बरी होने पर पुलिस अधिकारियों को दंडित किया जाये: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Tuesday, 7 January 2014 2:21 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि आपराधिक मामले में आरोपी के बरी होने को न्याय प्रदान करने वाली व्यवस्था की विफलता समझा जाना चाहिए. न्यायालय ने ऐसे मामलों में सरकार को जांच अधिकारियों को दंडित करने का निर्देश दिया है.

 

न्यायमूर्ति सी के प्रसाद और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने त्रुटिपूर्ण जांच के कारण आरोपियों के बरी होने की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की और सभी राज्य सरकारों को अपने अधिकारियों को समुचित तरीके से प्रशिक्षित करने के लिये छह महीने के भीतर एक व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपराधिक मामलों में आरोपियों को दंडित किया जा सके और इनमें निर्दोष व्यक्तियों को फंसाया नहीं जाये.

 

न्यायाधीशों ने कहा कि आरोपी को बरी करने के प्रत्येक मामले को न्याय प्रदान करने की व्यवस्था की विफलता समझा जाना चाहिए और इसी तरह इससे सामान्यतया यह निष्कर्ष भी निकलना चाहिए कि निर्दोष व्यक्ति पर गलत तरीके से मुकदमा चलाया गया.

 

न्यायालय ने कहा कि इसलिए जरूरी है कि प्रत्येक राज्य ऐसी व्यवस्था करें जिससे न्याय का उद्देश्य पूरा हो सके और साथ ही निर्दोष व्यक्तियों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सके.

 

न्यायालय ने प्रत्येक राज्य के गृह विभाग को आपराधिक मामलों में आरोपियों के बरी करने संबंधी सभी आदेशों की विवेचना करने और जांच एवं अभियोजन की खामियों का पता लगाते हुये अदालत में अभियोजन का मामला विफल होने के कारणों को दर्ज करने का आदेश दिया.

 

शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों को ऐसे प्रत्येक मामले के विश्लेषण से निकले सार को जांच और अभियोजन के कनिष्ठ अधिकारियों के मौजूदा प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दिया है. न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘हम यह निर्देश भी देते हैं कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छह महीने के भीतर शुरू किया जाये. इससे संवेदनशील मामलों की जांच और अभियोजन से जुड़े व्यक्तियों को इसे बेहतर तरीके से समझने के लिये प्रशिक्षित किया जा सकेगा. इसके बाद उन्होंने यदि किसी प्रकार की चूक दिखाई तो ऐसी चूक के लिये विभागीय कार्रवाई का सामना करते समय वे अनभिज्ञ होने का बहाना नहीं कर सकेंगे.’’ न्यायाधीशों ने कहा कि हम प्रत्येक राज्य सरकार के गृह विभाग को निर्देश देते हैं कि चूक करने वाले जांच और अभियोजन से जुड़े सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही का स्वरूप तैयार किया जाये. महज लापरवाही या चूक के कारण अभियोजन का मामला अदालत में विफल होने के लिये जिम्मेदार ऐसे सभी अधिकारियों की पहचान की जाये ताकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सके.

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Web Title: आपराधिक मामले में आरोपी के बरी होने पर पुलिस अधिकारियों को दंडित किया जाये: सुप्रीम कोर्ट
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