ऑनर किलिंग : उच्च न्यायालय ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

ऑनर किलिंग : उच्च न्यायालय ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में झूठी शान के लिए हत्या (ऑनर किलिंग) के एक मामले में एक ही परिवार के तीन सदस्यों को सुनायी गयी मौत की सजा को आज यह कहते हुए उम्रकैद में बदल दी कि उनमें सुधार की संभावना है.

 

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की विशेष पीठ ने दो अन्य अभियुक्तों पीड़ित लड़की की मां और चाची को बरी कर दिया. सुनवाई अदालत ने उन्हें भी मौत की सजा सुनायी थी. पीठ ने कहा कि वे दोनों अपराध में सिर्फ ‘‘दर्शक’’ थे और किशोर दंपति की हत्या के साझा इरादे में शामिल नहीं थे.

 

पीठ ने कहा कि अदालत की राय है कि दोषसिद्ध अपीलकर्ता ओम प्रकाश और सूरज को उम्रकैद की सजा दी जाती है तो न्याय का उद्देश्य पूरा होगा. यह सजा वास्तविकता में 20 साल से कम नहीं होगी. पीठ ने कहा कि संजीव युवा है और विवाहित नहीं है, ऐसे में अदालत का मानना है कि उसे उम्रकैद की सजा उचित है.

 

पीठ ने अपीलकर्ता माया :मां: और खूशबू :चाची: को आरोपों से मुक्त कर दिया.

 

अदालत ने लड़की के पिता सूरज, चाचा ओमप्रकाश और चचेरे भाई संजीव की सजा कम करते हुए कहा कि यह दर्शाने के लिए कोई सामग्री पेश नहीं की गयी कि वे सुधर नहीं सकते या वे समाज के लिए खतरा हैं.

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