चार साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के दोषी मौत की सजा के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Thursday, 5 June 2014 12:00 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट 2012 में श्रीगंगानगर में चार वर्षीय बच्ची के अपहरण, बलात्कार और फिर उसकी हत्या के जुर्म मे मौत की सजा पाने वाले व्यक्ति की अपील पर मंगलवार को सुनवाई के लिये आज तैयार हो गया. इस मामले में 48 वर्षीय व्यक्ति के साथ उसका नाबालिग बेटा भी बलात्कार और उसकी हत्या के अपराध में शामिल था.

 

न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ और न्यायमूर्ति सी नागप्पन की खंडपीठ के समक्ष दोषी कालू खान के वकील ने यथाशीघ्र सुनवाई के लिये इस मामले का उल्लेख किया. इस पर न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘इसे मंगलवार को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया जाये.’’ कालू खान ने राजस्थान उच्च न्यायालय के चार अप्रैल के फैसले के खिलाफ यह अपील दायर की है. उच्च न्यायालय ने अपहरण, बलात्कार और हत्या के जुर्म में उसकी मौत की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी थी.

 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मौत की सजा की पुष्टि कर दी थी.

 

अभियोजन के अनुसार इस मामले में चार वर्षीय बच्ची के माता पिता बाहर गये हुये थे और दोषी ने तीन मई, 2012 की सुबह उसे बेरी देने का प्रलोभन दिया था. खान और उसके नाबालिग बेटे ने बच्ची से बलात्कार किया और उसकी हालत बिगड़ने पर उसे आंगन में ही एक गड्ढे में दफनाने से पहले उसकी हत्या कर दी.

 

कुछ गवाहों का कहना था कि खोज के दौरान उन्होंने आरोपी के नाबालिग बेटे को एक गड्ढे में कुछ दबाते देखा था और इसी आधार पर बच्ची का शव बरामद हुआ था.

 

वकील आशा जैन मदान के जरिये दायर अपील में कालू खान ने दलील दी है कि नीचे की अदालतें इस तथ्य को महसूस करने में असफल रही हैं कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है जो उसे दोषी ठहराने के लिये अपर्याप्त है.

 

याचिका में कहा गया है कि 48 वर्ष की आयु में दोषी को मौत की सजा नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि उसके सुधरने की पूरी संभावना है.

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Web Title: चार साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के दोषी मौत की सजा के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
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