चोर-डाकुओं से ही नही जादू-टोने से भी समाज को बचाएगा ये पुलिस वाला

By: | Last Updated: Thursday, 20 February 2014 2:34 PM

नई दिल्ली: असम के गांवों में चल रही सामाजिक कुप्रथा के विरोध में एक पुलिस अधिकारी के अथक प्रयासों से समाज को जादू-टोने के खिलाफ जागरुक  करनें में कुछ सफलता हासिल की है. इन जादू-टोने का इस्तेमाल गांव के लोग आपसी झगड़े और दुश्मनी में किया करते थे.

 

पिछले पांच साल में प्रहरी परियोजना के तहत करीब 100 मामले दर्ज किए गए हैं. इस परियोजना के एक प्रमुख कर्ताधर्ता ने कहा कि मामले तो दर्ज हुए हैं, लेकिन गवाहों की कमी के कारण कुछ ही गुनाहगारों को पकड़ा जा सका है.

 

परियोजना को 2001 में शुरू करने वाले कुलधर सैकिया ने कहा कि पूरे समाज के इसमें शामिल होने और समाज से बहिष्कृत कर दिए जाने के डर से दोषियों को पकड़ना काफी कठिन साबित हो रहा है. सैकिया अभी असम पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक हैं. परियोजना शुरू करते वक्त 2001 में वो पश्चिमी रेंज के उप महानिरीक्षक थे.

 

सैकिया ने यहां एक यात्रा के दौरान आईएएनएस से कहा, “गांव के लोगों में डर है कि उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाएगा. स्थिति इतनी खराब है कि प्रभावितों के परिजन भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने आगे नहीं आते हैं.”

 

सैकिया ने हालांकि बताया कि अब स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और मामले दर्ज किए जाने लगे हैं.

 

सैकिया ने पेंसिल्वेनिया स्टेट युनिवर्सिटी से नेतृत्व और प्रबंधन में शिक्षा हासिल की है तथा सामुदायिक विकास और प्रबंधन पर शोध कार्य किया है.

 

इस मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों को तो जागरूक किया ही जा रहा है साथ ही गैर सरकारी संगठनों तथा अन्य समूहों के माध्यम से भी काम किए जा रहे हैं.

 

सैकिया ने बताया कि राज्य के गांवों में ओझा-गुणी जादू-टोना के जरिए लोगों को बेवकूफ बनाते हैं और उनसे कमाई करते हैं. आम लोग शिक्षा और जागरूकता के अभाव के कारण उनके झांसे में आ जाते हैं.

 

उन्होंने कहा, “ऐसी गतिविधियों का उपयोग आपसी दुश्मनी निकालने और जमीन-जायदाद के विवादों में किया जाता है.”

 

पिछले साल आठ अक्टूबर को कोकराझार जिले के जराईगुरी गांव में ऐसा एक मामला सामने आया था, जहां एक बुजुर्ग दंपत्ति बिगिराम नर्जरी और उनकी पत्नी उर्वशी नर्जरी को एक ओझा द्वारा शैतान बताए जाने के बाद स्थानीय लोगों ने पत्थरों से मार-मार कर उनकी जान ले ली थी. उस ओझा को गांव में कई और हत्या के लिए भी जिम्मेदार पाया गया.

 

सैकिया ने कहा, “दर्ज मामलों की संख्या अधिक नहीं है, लेकिन आखिर एक भी ऐसा मामला क्यों हो और क्यों राज्य और इसके सभ्य समाज पर एक धब्बा बने.”

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Web Title: चोर-डाकुओं से ही नही जादू-टोने से भी समाज को बचाएगा ये पुलिस वाला
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