त्वरित टिप्पणी: गरीबी और गरीबों के बीच हांफती सियासत में मध्यवर्ग बना आम से 'खास'

By: | Last Updated: Friday, 17 January 2014 1:16 PM
त्वरित टिप्पणी: गरीबी और गरीबों के बीच हांफती सियासत में मध्यवर्ग बना आम से ‘खास’

नई दिल्ली. सच कहते हैं कि लोकतंत्र में सियासत जनता की रियासत है. भले ही वह चुनाव के वक्त ही समझ में आए. अब यदि आप सत्ता की बात करेंगे तो जरूर कांग्रेस के एक ‘खास’ परिवार की विरासत रही है.

 

भारत की राजनीतिक विकल्पहीनता के टूटने का आभास ‘आप’ ने दिलाया. आप के सत्ता में आने के बाद शहरी और मध्यवर्ग भी सियासत में अहम होता जा रहा है. आप की विजय और उत्कर्ष ने पक्ष और विपक्ष दोनों को ही गरीबी और गरीबों से अलहदा मध्यवर्ग को भी अहम बना दिया.

 

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में पार्टी के ‘ज़िल्ले इलाही’ बनकर उभरे हैं. तीन राज्यों की हार के ‘उघड़े जख्मों’ पर राहुल के तेवर लाल दवा का काम करेगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन एक बात साफ है कि अब मध्यवर्ग वाला ‘आम’ खास बन गया है. सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अपने भाषण में बार-बार मीडिल क्लास पर फोकस बरकरार रखा. अब इसे आप ‘इफेक्ट’ कहें या नरेंद्र मोदी का असर. आज के बैठक में दोनों ने शहरी मतदाताओं और मध्यवर्ग से ढेर सारे वादे किये. पहली बार गरीबी और गरीबों के बीच हांफती सियासत में मध्यवर्ग खास बनकर उभरा है.

 

आज के भाषण में मध्यवर्ग के आंगन में राहुल गांधी अपना लोकतंत्र पोषित करने की कोशिश कर रहे थे. प्रधानमंत्री से 12 सिलेंडर की मांग के साथ में यह भी कहा कि कांग्रेस राज वाले प्रदेशों में महंगाई कम होगी. क्योंकि महंगाई के चलते ही कांग्रेस विधानसभा में बुरी तरह हारी. इसी कांग्रेसी मंच पर पीएम कह रहे हैं कि महंगाई से किसानों को फायदा पहुंचा है और कांग्रेस के पुरोधा कुछ और राग अलाप रहे हैं.

 

अब जरा आम कार्यकर्ताओं को रिझाते राहुल गांधी को पहली बार इस तरह सभी ने देखा. राहुल गांधी ने कहा कि अब कार्यकर्ताओं से पूछकर उम्मीदवार तय किये जाएंगे. घोषणापत्र में आम लोगों से लेकर कार्यकर्ताओं तक की रायशुमारी की जाएगी. 15 संसदीय क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत कैंडिडेट का चुनाव लोग करेंगे. पदाधिकारी और कार्यकर्ता वोट डालकर चुनेंगे. राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 10 सालों से गरीबों की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी है. अगले 5 साल मीडिल क्लास के लिए काम करेंगे.

 

राहुल ने मध्यवर्ग के कार्यकर्ताओं को लुभाते हुए अपनी चाहत बताई कि वह इस कमरे में, संसद में आधी आबादी का आधा हिस्सा चाहता हैं. वह चाहते हैं कि कांग्रेस शासन वाले राज्यों में आधी मुख्यमंत्री महिला हों. अब यह विचार कितना क्रांतिकारी है और कितना व्यावहारिक, आप खुद ही सोच लें. राहुल गांधी ने पिछले कुछ भाषणों की तर्ज पर टेलीकॉम क्रांति का बार-बार जिक्र किया. वह यह भी बोले कि गरीबी रेखा और मिडल क्लास के बीच फंसे लोगों को हम ऐसी ही क्रांति की तर्ज पर मिडल क्लास कैटेगरी में लेकर आएंगे.

 

युवाओं और मध्यवर्ग को को लुभाने के लिये राजनीति में अब अतिश्योक्ति और अन्योक्ति अलंकार का भरपूर प्रयोग हो रहा है. राहुल गांधी भी आज अपनी भाषा शैली में तैमूर दिखे. बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर उन्हीं की शैली में जमकर निशाना साधा तो आम आदमी पार्टी को भी अपने तेवर दिखाए. राहुल ने कहा कि विपक्षी दल (भाजपा) गंजे को कंघा बेच रहे हैं. फिर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए बोले कि नए लोग आए हैं, जो गंजों को हेयर कट दे रहे हैं.

 

19वीं सदी की घनी काली रात में जन्मी कांग्रेस ने 20वीं सदी की भोर में उठकर चलना सीखा है. कदम दर कदम चलकर कांग्रेस 21वीं सदी का चेहरा बनने की जद्दोजहद में है. इसलिए वह अपने तरकश के सारे तीर छोड़ रही है.

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Web Title: त्वरित टिप्पणी: गरीबी और गरीबों के बीच हांफती सियासत में मध्यवर्ग बना आम से ‘खास’
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