बदायूं दुष्कर्म ने खोल दी शौचालय निर्माण की कलई

By: | Last Updated: Thursday, 5 June 2014 3:43 AM

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पिछले सप्ताह दो किशोरियों के साथ दुष्कर्म और फिर आम के पेड़ से फंदा डालकर उनकी हत्या के मामले ने देश के ग्रामीण इलाकों में शौचालयों की कमी को उजागर किया है. दोनों किशोरियां शौच के लिए गई थी.

 

एक एनजीओ के खुलासे से इस लोमहर्षक अपराध के पीछे सबसे बड़ा कुतूहल सामने आ खड़ा होता है. इस इलाके में बनवाए गए शौचालय अब ‘लापता’ पाए जा रहे हैं.

 

राष्ट्रमंडल के मानवाधिकार पहल के सूचना कार्यक्रम पहुंच के कार्यक्रम संयोजक वेंकटेश नायक ने सवाल उठाया, “निर्मल भारत अभियान में 2011 के बाद बने शौचालयों का क्या हुआ?”

 

स्वच्छता के लिए चलाया गया निर्मल भारत अभियान सरकार द्वारा समर्थित था. इस अभियान की वेबसाइट पर बताया गया है कि बदायूं जिले के जिस कटरा सादतगंज की दोनों लड़कियां रहने वाली थीं, वहां अभियान के तहत शौचालय का निर्माण कराया गया था.

 

अभियान की वेबसाइट पर दर्शाया गया है कि वर्ष 2011 में गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले 172 परिवारों के पास शौचालय नहीं थे. अभियान में ऐसे परिवारों के लिए 178 शौचालय का निर्माण कराया गया. यह संख्या जरूरत से अधिक है.

 

नायक ने कहा, “सिविल सोसायटी और स्थानीय लोगों द्वारा की गई लेखा परीक्षा में खुलासा हुआ कि ऐसे परिवारों के लिए शौचालय का निर्माण कार्य कागजों पर पूरा हुआ, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है.”

 

संभव है कि बदायूं जैसी जगहों पर कुछ शौचालयों का निर्माण कराया गया होगा, लेकिन सच तो यह है कि देश के 60 फीसदी से अधिक ग्रामीण घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है. वहीं उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इलाकों में 35.22 फीसदी घरों में ही शौचालय हैं.

 

ग्रामीण इलाकों में शौचालय की बात करें तो लोकसभा में फरवरी में एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा था कि अब तक हुए सर्वेक्षण में बिहार पहले स्थान पर है, यानी वहां 80 फीसदी घरों में शौचालय सुविधा नहीं है.

 

निर्मल भारत अभियान की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012-13 में केंद्र एवं राज्य सरकारों ने देशभर में शौचालय के निर्माण पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए. जबकि 2011-12 में 1,820 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

 

नायक के मुताबिक भारत में करीब 5000 साल पहले हड़प्पा सभ्यता के दौरान शौचालय काफी स्वच्छ हुआ करते हैं. अब हम उस गौरब से काफी आगे निकल आए हैं.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में शौचालय निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा था, “पहले शौचालय, फिर देवालय”.

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Web Title: बदायूं दुष्कर्म ने खोल दी शौचालय निर्माण की कलई
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